जबलपुर। मेडिकल कॉलेज सैक्स स्कैंडल मामले में पुलिस ने आज पूरे दिन रादुविवि में जांच पड़ताल की, इस दौरान कुछ कर्मचारियों की भूमिका उजागर होने पर उनकी तलाश में पुलिस ने कुछ स्थानों पर दबिश दी, लेकिन पुलिस के हाथ खाली रहे।
उधर इस मामले में फरार आरोपी अजय खंडेलवाल की गिरफ्तारी के लिए एसपी ने तीन हजार रुपये का ईनाम घोषित कर दिया है। विवेचना के दौरान राजू खान के साथ अजय खंडेलवाल, निवासी मढ़ाताल का घटना में शामिल होना एवं फरार होना पाया गया है।
अजय खंडेलवाल की गिरफ्तारी हेतु कई स्थानों पर दबिश दी गई। गिरफ्तारी न हो पाने के कारण एसपी संतोष कुमार सिंह ने उसकी गिरफ्तारी पर 3 हजार रुपये का ईनाम घोषित कर दिया है।
एक अधिकारी के आरोपी राजू खान से संबंध होने की बात सामने आने पर जांच टीम बदल दी गई है। अब जांच का जिम्मा एएसपी क्राइम अशोक शुक्ला, डीएसपी अजाक जेडी भोसले, टीआई गढ़ा जयंत टेंमरे, टीआई गोहलपुर आरडी भारद्वाज, महिला थाना प्रभारी रूचिता चतुर्वेदी को जांच टीम में शामिल किया गया है। इस मामले की जांच में जरूरत के हिसाब से अन्य अधिकारियों से कार्य कराया जा सकता है।
सोमवार तक प्रतिवेदन दे पुलिस
मेडिकल कॉलेज के सेक्स स्कैण्डल में घिरे अजय खण्डेलवाल ने आज जिला अदालत में अग्रिम जमानत अर्जी के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। जिला न्यायाधीश जेके जैन की अदालत ने अभियोजन पक्ष को सोमवार तक प्रतिवेदन पेश करने के निर्देश दिये हैं।
मामले की अगली सुनवाई सोमवार को विशेष न्यायाधीश अंजुली पालो की कोर्ट में होगी। मेडिकल मामले में आज अजय खण्डेलवाल के अधिवक्ता ने अग्रिम जमानत लाभ प्रदान करने का आवेदन प्रस्तुत किया। कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए गढ़ा पुलिस को निर्देशित किया है कि सोमवार तक प्रकरण का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए। शासन की ओर से अधिवक्ता अशोक पटेल उपस्थित हुए।
छात्र-छात्राओं को एमबीबीएस में पास कराने के बदले धन और अस्मत मांगने के मामले में एडीशनल कलेक्टर मनीषा सेतिया, डॉ. शशि खरे, डॉ. पुष्पा किरार ने जो जांच रिपोर्ट तैयार की थी, वह अब आईजी व्ही मधुकुमार को सौंपी गई है।
कमेटी के तीन सदस्यों ने दस दिनों तक जांच की और मुख्य आरोपी प्रेरणा ओटवाल न मिलने पर उस बिंदु को छोड़कर जांच रिपोर्ट संभागायुक्त को सौंप दी गई। इस रिपोर्ट के बाद कुछ लोगों पर जल्द ही मामले दर्ज हो सकते हैं।
आज पुलिस दल इसी को लेकर मेडिकल में पहुंचने वाला था, लेकिन यह दल विवि में ही कार्रवाई में व्यस्त रहा। अब शुक्रवार को पुलिस टीम मेडिकल पहुंचेगी।
Friday, March 4, 2011
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन सिंह का दिल का दौरा पड़ने से निधन

नई दिल्ली. ८१ साल की उम्र में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन सिंह का निधन हो गया है। पूर्व मानव संसाधन मंत्री और मध्य प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे अर्जुन सिंह को कुछ दिनों पहले ही सीने में दर्द की शिकायत के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में दाखिल कराया गया था। शुक्रवार को अर्जुन सिंह ने शाम साढ़े पांच बजे सांस लेने में तकलीफ होने की शिकायत की। उन्हें दिल का दौरा पड़ा और शाम करीब सवा छह बजे उन्होंने अंतिम सांसें लीं।
कांग्रेस के विवादास्पद नेता रहे अर्जुन सिंह को राजीव गांधी का करीबी माना जाता था। भोपाल गैस कांड के समय अर्जुन सिंह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे।अर्जुन सिंह की मौत के साथ ही भोपाल गैस कांड के आरोपी वॉरेन एंडरसन के भारत छोड़ने की वजहों और परिस्थितियों पर हमेशा के लिए पर्दा गिर गया है।
करीब छह दशकों तक देश की राजनीति में सक्रिय रहे कांग्रेस के दिग्गज नेता अर्जुन सिंह पिछले कई सालों से खराब सेहत से जूझ रहे थे। अर्जुन सिंह ने १९५७ में मध्य प्रदेश विधानसभा सदस्य के तौर पर अपने लंबे राजनैतिक जीवन की शुरुआत की थी। 5 नवंबर, 1930 को मध्य प्रदेश में उनका जन्म हुआ था। ८० के दशक में वे कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी रहे और उग्रवाद के दौर में वे पंजाब के राज्यपाल भी रहे थे। राजीव गांधी और लोंगोवाल के बीच हुए समझौते में अर्जुन सिंह की अहम भूमिका थी। १९९२ में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव की कैबिनेट और कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, वे बाद में पार्टी में लौट आए थे। अर्जुन सिंह के मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर कार्यकाल के दौरान चंबल के कई कुख्यात डाकुओं ने हथियार डाले थे।
यह संयोग ही है कि कांग्रेस ने नीति बनाने वाली अपनी सर्वोच्च संस्था कांग्रेस वर्किंग कमेटी से उन्हें हटाकर स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाने का फैसला शुक्रवार को ही लिया था। अर्जुन सिंह अपने पीछे पत्नी सरोज देवी, दो बेटों-अजय सिंह और अभिमन्यु के अलावा बेटी वीणा को छोड़ गए हैं। अजय सिंह मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य हैं।
नसबंदी कराओ मोटरसाइकिल पाओ!
नसबंदी कराओ मोटरसाइकिल पाओ!
भोपाल, 4 मार्च 2011। अगर आप मोटरसाइकिल की सवारी करना चाहते हैं और इसमें आर्थिक संकट आड़े आ रहा है तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है, बस इसके लिए आपको 25 से ज्यादा लोगों की नसबंदी करानी होगी। ऐसा करने में सफल रहे तो आपके लिए मोटरसाइकिल की सवारी भी आसान हो जाएगी।
मध्य प्रदेश सरकार वर्ष 2010-11 को परिवार कल्याण वर्ष के रूप मे मना रही है। इसी के चलते हर जिले को कुछ लक्ष्य दिए गए हैं। सरकार द्वारा तय लक्ष्य हासिल करना जिला प्रशासन के लिए मुसीबत बन गया है, इसीलिए हर जिले में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई लुभावनी योजनाएं बनाई गई हैं। कहीं बंदूक के लाइसेंस दिए जा रहे हैं तो कहीं मोटरसाइकिल और कपड़े बांटे जा रहे हैं।
पन्ना जिले में भी एक मार्च से छह मार्च तक नसबंदी का महा अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान ज्यादा से ज्यादा ऑपरेशन कराने को प्रोत्साहित करने के लिए जिला प्रशासन ने लुभावनी योजना बनाई है। इसके मुताबिक 25 से ज्यादा लोगों के ऑपरेशन कराने वाले को मुफ्त में हीरो होंडा मोटरसाइकिल दी जाएगी। इसी तरह 20 से ज्यादा लोगों के लिए एलसीडी टीवी, 10 से ज्यादा पर टीवी, पांच से ज्यादा पर प्रशस्ति पत्र व शाल, श्रीफल दिया जाएगा।
इस योजना में हितग्राहियों का भी ध्यान रखा गया है, उनको भी इनाम दिए जाएगें। इसके लिए छह मार्च के बाद प्रत्येक विकास खंड में लाटरी के जरिए पांच-पांच विजेताओं को प्रेशर कुकर दिए जाएंगे।
यह योजना नसबंदी के प्रति लोगो में प्रोत्साहन लाने के लिए बनाई गई है। वह इन कोशिशों की वजह सरकार द्वारा तय किए गए लक्ष्य को हासिल करने में आ रही कठिनाईयों को मानने को तैयार नही हैं।यहां हम आपको बता दें कि पन्ना जिले में 10750 लोगों की नसबंदी का लक्ष्य दिया गया है, मगर अभी तक 8500 ऑपरेशन ही हुए हैं। जिला लक्ष्य हासिल करने से अभी लगभग 20 प्रतिशत दूर है।प्रदेश में नसबंदी को प्रोत्साहित करने की यह पहली पुरस्कार योजना नहीं है, भोपाल में भी प्रोत्साहन पुरस्कार का एलान किए जाने के साथ हितग्राहियों को कपड़े भी दिए जा रहे हैं। इसी तरह सागर के कलेक्टर मनीष श्रीवास्तव ने पांच नसबंदी ऑपरेशन कराने वाले को बंदूक का लाइसेंस देने में प्राथमिकता देने की योजना शुरू की है।
भोपाल, 4 मार्च 2011। अगर आप मोटरसाइकिल की सवारी करना चाहते हैं और इसमें आर्थिक संकट आड़े आ रहा है तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है, बस इसके लिए आपको 25 से ज्यादा लोगों की नसबंदी करानी होगी। ऐसा करने में सफल रहे तो आपके लिए मोटरसाइकिल की सवारी भी आसान हो जाएगी।
मध्य प्रदेश सरकार वर्ष 2010-11 को परिवार कल्याण वर्ष के रूप मे मना रही है। इसी के चलते हर जिले को कुछ लक्ष्य दिए गए हैं। सरकार द्वारा तय लक्ष्य हासिल करना जिला प्रशासन के लिए मुसीबत बन गया है, इसीलिए हर जिले में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई लुभावनी योजनाएं बनाई गई हैं। कहीं बंदूक के लाइसेंस दिए जा रहे हैं तो कहीं मोटरसाइकिल और कपड़े बांटे जा रहे हैं।
पन्ना जिले में भी एक मार्च से छह मार्च तक नसबंदी का महा अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान ज्यादा से ज्यादा ऑपरेशन कराने को प्रोत्साहित करने के लिए जिला प्रशासन ने लुभावनी योजना बनाई है। इसके मुताबिक 25 से ज्यादा लोगों के ऑपरेशन कराने वाले को मुफ्त में हीरो होंडा मोटरसाइकिल दी जाएगी। इसी तरह 20 से ज्यादा लोगों के लिए एलसीडी टीवी, 10 से ज्यादा पर टीवी, पांच से ज्यादा पर प्रशस्ति पत्र व शाल, श्रीफल दिया जाएगा।
इस योजना में हितग्राहियों का भी ध्यान रखा गया है, उनको भी इनाम दिए जाएगें। इसके लिए छह मार्च के बाद प्रत्येक विकास खंड में लाटरी के जरिए पांच-पांच विजेताओं को प्रेशर कुकर दिए जाएंगे।
यह योजना नसबंदी के प्रति लोगो में प्रोत्साहन लाने के लिए बनाई गई है। वह इन कोशिशों की वजह सरकार द्वारा तय किए गए लक्ष्य को हासिल करने में आ रही कठिनाईयों को मानने को तैयार नही हैं।यहां हम आपको बता दें कि पन्ना जिले में 10750 लोगों की नसबंदी का लक्ष्य दिया गया है, मगर अभी तक 8500 ऑपरेशन ही हुए हैं। जिला लक्ष्य हासिल करने से अभी लगभग 20 प्रतिशत दूर है।प्रदेश में नसबंदी को प्रोत्साहित करने की यह पहली पुरस्कार योजना नहीं है, भोपाल में भी प्रोत्साहन पुरस्कार का एलान किए जाने के साथ हितग्राहियों को कपड़े भी दिए जा रहे हैं। इसी तरह सागर के कलेक्टर मनीष श्रीवास्तव ने पांच नसबंदी ऑपरेशन कराने वाले को बंदूक का लाइसेंस देने में प्राथमिकता देने की योजना शुरू की है।
रात में लगती थी भावी डाक्टरों की क्लास
Mar 04, 12:01 जबलपुर। किस्मत के बदले अस्मत प्रकरण में आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि मेडिकल कॉलेज के एटॉनोमी विभागाध्यक्ष एवं पूर्व हॉस्टल वॉर्डन डॉ.मीता श्रीवास्तव के पति डॉ.एसके श्रीवास्तव कभी मेडिकल कॉलेज पर तो कभी घर पर रात के वक्त छात्राओं की क्लास लेते थे। कई बार ये कक्षाएं देर रात तक भी चलीं। पुलिस यह जानने में जुटी है कि देर रात तक कक्षाएं क्यों चलती थीं और इसमें केवल छात्राओं को ही क्यों बुलाया जाता था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार रात की कक्षाओं के दौरान कुछ चुनिंदा छात्राओं को कोर्स की वे किताबें या अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती थीं, जो आम छात्राओं को मिलना मुश्किल रहता था। सूत्रों का यह भी कहना है कि रात में लगने वाली क्लास के दौरान ही छात्राओं के पास-फेल कराने की बातें होती थी।
प्रेरणा ने मेडिकल छात्रा दीपा ठाकुर को राजू से मिलवाया। कुछ दिनों बाद दीपा भी राजू की करीबी हो गई। पुलिस को इस बात के सुराग लगे हैं कि दीपा भी अजय खण्डेलवाल की तर्ज पर मेडिकल छात्रावास से छात्राओं को बाहर ले जाने का काम करतीं थी। इसके लिए राजू ने दीपा को एक कार भी मुहैया कराई थी। दीपा ने कई छात्राओं से पास कराने के नाम पर मोटी रकम ऐंठी।
पुलिस ने तीनों आरोपियों की निशानदेही पर करीब दस लोगों से पूछताछ की। इनमें से कुछ लोग अब भी थानों में हैं। एसपी संतोष सिंह ने गढ़ा थाने में जाच की समीक्षा की। तीनों आरोपियों से मिले सुरागों की बिंदुवार जानकारी ली, और कई दिशा-निर्देश दिए।
जाच कमेटी ने प्रकरण की मुख्य आरोपी प्रेरणा अटवाल के बयान नहीं ले पाई, क्योंकि प्रेरणा फरार है। इसके चलते जानकारों ने रिपोर्ट को अधूरा करार दिया है। उनका कहना है कि प्रेरणा के बयान के बिना व्यवहारिक रूप से जाच को पूर्ण नहीं माना जा सकता। न्यायालय में यह रिपोर्ट एकतरफा जाच के कारण खारिज हो सकती है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अशोक ठाकुर का कहना है कि कमेटी से प्रेरणा के भी बयान दर्ज करने की माग की जाएगी।
पुलिस ने राजू के मोबाइल की कॉल डिटेल की जाच शुरू कर दी। इसमें भी कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। सूत्रों के अनुसार राजू के मोबाइल की फोन बुक में कई बडे़ राजनेताओं, पुलिस अधिकारियों, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय व मेडिकल के अधिकारियों के मोबाइल नंबर हैं। लेकिन पुलिस नामों का खुलासा नहीं कर रही है।
पुलिस को प्रेरणा अटवाल, अनिल सिंह, नागेन्द्र सिंह व अजय खण्डेलवाल का सुराग नहीं लग पाया है। पुलिस तीनों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार रात की कक्षाओं के दौरान कुछ चुनिंदा छात्राओं को कोर्स की वे किताबें या अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती थीं, जो आम छात्राओं को मिलना मुश्किल रहता था। सूत्रों का यह भी कहना है कि रात में लगने वाली क्लास के दौरान ही छात्राओं के पास-फेल कराने की बातें होती थी।
प्रेरणा ने मेडिकल छात्रा दीपा ठाकुर को राजू से मिलवाया। कुछ दिनों बाद दीपा भी राजू की करीबी हो गई। पुलिस को इस बात के सुराग लगे हैं कि दीपा भी अजय खण्डेलवाल की तर्ज पर मेडिकल छात्रावास से छात्राओं को बाहर ले जाने का काम करतीं थी। इसके लिए राजू ने दीपा को एक कार भी मुहैया कराई थी। दीपा ने कई छात्राओं से पास कराने के नाम पर मोटी रकम ऐंठी।
पुलिस ने तीनों आरोपियों की निशानदेही पर करीब दस लोगों से पूछताछ की। इनमें से कुछ लोग अब भी थानों में हैं। एसपी संतोष सिंह ने गढ़ा थाने में जाच की समीक्षा की। तीनों आरोपियों से मिले सुरागों की बिंदुवार जानकारी ली, और कई दिशा-निर्देश दिए।
जाच कमेटी ने प्रकरण की मुख्य आरोपी प्रेरणा अटवाल के बयान नहीं ले पाई, क्योंकि प्रेरणा फरार है। इसके चलते जानकारों ने रिपोर्ट को अधूरा करार दिया है। उनका कहना है कि प्रेरणा के बयान के बिना व्यवहारिक रूप से जाच को पूर्ण नहीं माना जा सकता। न्यायालय में यह रिपोर्ट एकतरफा जाच के कारण खारिज हो सकती है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अशोक ठाकुर का कहना है कि कमेटी से प्रेरणा के भी बयान दर्ज करने की माग की जाएगी।
पुलिस ने राजू के मोबाइल की कॉल डिटेल की जाच शुरू कर दी। इसमें भी कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। सूत्रों के अनुसार राजू के मोबाइल की फोन बुक में कई बडे़ राजनेताओं, पुलिस अधिकारियों, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय व मेडिकल के अधिकारियों के मोबाइल नंबर हैं। लेकिन पुलिस नामों का खुलासा नहीं कर रही है।
पुलिस को प्रेरणा अटवाल, अनिल सिंह, नागेन्द्र सिंह व अजय खण्डेलवाल का सुराग नहीं लग पाया है। पुलिस तीनों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
पास-फेल के बदले छात्राओं की इज्ज्त की सौदेबाजी
4-3-2011पास-फेल के बदले छात्राओं की इज्ज्त की सौदेबाजी
परीक्षा में पास होने के लिए छात्राओं को अपनी इज्जत का सौदा करना पड़ता था. जबलपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज की एक छात्रा ने ये सनसनीखेज खुलासा किया है. इस खुलासे के बाद पुलिस ने शहर के तीन सफेदपोशों को गिरफ्तार किया है.
जबलपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज के छात्र भड़के हुए हैं. परीक्षा में पास-फेल के बदले छात्राओं की इज्ज्त की सौदेबाजी की खबर के बाद यहां हंगाम मचा हुआ है. कॉलेज की एक छात्रा के खुलासे के बाद कॉलेज और शहर के कई सफेदपोश अब गिरफ्त में हैं.
एक छात्रा के इस खुलासे से सनसनी फैल गई कि कॉलेज में नंबरों में हेराफेरी के नाम पर छात्राओं को जिस्मफरोशी के लिए मजबूर किया जा रहा था. छात्रा ने आरोप लगाया कि इस शर्मनाक धंधे में जबलपुर की रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर और परीक्षा नियंत्रक एस एस राणा और सहायक कुलसचिव रवींद्र ककोडिया भी शामिल हैं. जबकि इस गिरोह का सरगना राजू खान नाम का शख्स है.
इस गिरोह के लिए छात्राओं को फंसाने का काम करने वाली मेडीकल कालेज की ही एक अन्य छात्रा के साथ, एक फर्नीचर व्यापारी और होटल मालिक की तलाश की जा रही है
परीक्षा में पास होने के लिए छात्राओं को अपनी इज्जत का सौदा करना पड़ता था. जबलपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज की एक छात्रा ने ये सनसनीखेज खुलासा किया है. इस खुलासे के बाद पुलिस ने शहर के तीन सफेदपोशों को गिरफ्तार किया है.
जबलपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज के छात्र भड़के हुए हैं. परीक्षा में पास-फेल के बदले छात्राओं की इज्ज्त की सौदेबाजी की खबर के बाद यहां हंगाम मचा हुआ है. कॉलेज की एक छात्रा के खुलासे के बाद कॉलेज और शहर के कई सफेदपोश अब गिरफ्त में हैं.
एक छात्रा के इस खुलासे से सनसनी फैल गई कि कॉलेज में नंबरों में हेराफेरी के नाम पर छात्राओं को जिस्मफरोशी के लिए मजबूर किया जा रहा था. छात्रा ने आरोप लगाया कि इस शर्मनाक धंधे में जबलपुर की रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर और परीक्षा नियंत्रक एस एस राणा और सहायक कुलसचिव रवींद्र ककोडिया भी शामिल हैं. जबकि इस गिरोह का सरगना राजू खान नाम का शख्स है.
इस गिरोह के लिए छात्राओं को फंसाने का काम करने वाली मेडीकल कालेज की ही एक अन्य छात्रा के साथ, एक फर्नीचर व्यापारी और होटल मालिक की तलाश की जा रही है
श्रीमती पटेरिया के बयान से बौखलाई गोंडवाना

विधायिका श्रीमती नीता पटेरिया यह भी कह रही हैं कि कौन से मुझे इस क्षेत्र से वोट मिले थे। वहीं कौन आदिवासियों ने मुझे वोट दिया है आदिवासियों ने वोट तो गोंगपा, मुनमुन राय, व कांग्रेस को दिया था। वहंीं हमारे नेता डॉ. बिसेन भी आदिवासियों के वोट नहीं मिल पाने के कारण हार गये और तो और भाजपा में जो भी आदिवासी नेता आये हेैं वे सभी किसी दूसरी पार्टी से आये हैं या फिर स्वार्थ वस पार्टी में आये हैं ।
सिवनी सिवनी विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती नीता पटेरिया ने बैठे-बिठाये गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को भारतीय जनता पार्टी सरकार के विरोध में बोलने के लिए एक जबरदस्त मुद्दा दे दिया है। उन्होने पिछले दिनों मृतक राकेश बरकड़े की आत्महत्या के पश्चात जो बयानबाजी कर बरैया के छत्ते में मानो पत्थर मार दिया है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने श्रीमती पटेरिया के बयान के विरोध में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन का माहौल तैयार कर लिया है। आदिवासी समाज के व्यक्ति श्रीमती पटेरिया के बयान को सारी जाति का अपमान मान रहे हैं। पूरे जिले मेें आदिवासियों के बीच श्रीमती पटेरिया का बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि यह पहला अवसर नहीं है,जब श्रीमती पटेरिया अपनी ऊलजलूल बयानबाजी से पूरी पार्टी को परेशानी में डाला हो। इसके पूर्व भी वे या उनके वरदहस्तों द्वारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए परेशानियां खड़ी करते रहे हैं। सांसद रहते हुए एक सिवनी जिले के आदिवासी की लाश तत्कालीन सांसद रहीं श्रीमती पटेरिया द्वारा कोई मदद आश्वासन देने के पश्चात भी न करने के कारण सड़ते रही और मृतक के परिजनों ने मजबूरन उसे दिल्ली में ही दफन किया था। वह घटना भी फिर से ताजा हो गई है। अभी हाल ही में सिवनी विधानसभा क्षेत्र के थांवरी नामक गांव में एक आदिवासी कृषक द्वारा आत्महत्या कर ली गई है। इस कृषक आत्महत्या को घाटे की कृषि के कारण आत्महत्या न होना बताने का सत्ताधारी दल की विधायक और प्रशासन द्वारा भरसक प्रयास किया जा रहा है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी श्रीमती नीता पटेरिया के व्यवहार को और बर्ताव को आदिवासी विरोधी मान रहे हैं। गोंडवाना का आरोप है कि नीता पटेरिया ने यहां तक कहा है कि भाजपा को आदिवासियों का कौन सा वोट मिलता है। आदिवासियों ने गोंडवाना, मुनमुन राय और कांग्रेस को वोट दिया था,हमें तो कोई वोट मिले ही नहीं। आदिवासियों का वोट अगर भाजपा को मिल जाता तो डॉक्टर ढालसिंह बिसेन जी जीत जाते गोंगपा का ऐंसा आरोप है कि यह बात श्रीमती नीता पटेरिया ने कही है। हालांकि यह बात नीता पटेरिया ने अवश्य कही है और विज्ञप्ति भी जारी हुई है कि आत्महत्या करने वाला किसान महत्वकांक्षी था उसने आत्महत्या कृषि में हुई नुकसानी के कारण नहीं अन्य कारणों से की है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के द्वारा इन्ही सब मुद्दों पर विशाल सम्मेलन 04 मार्च को केवलारी के रायखेड़ा में आयोजित किया गया है। जारी विज्ञप्ति में गोंगपा के मीडिया प्रभारी विवेक डहेरिया ने बताया है कि इस सम्मेलन में गोंगपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम मौजूद रहेंगे। इस सम्मेलन में जिले में किसानों के साथ मुआवजा वितरण में की जा रही लापरवाही आमजनता के साथ अन्याय अत्याचार,शोषण और शासकीय योजनाओं में किये जा रहे भ्रष्टाचारों एवं भाजपा विधायक की आदिवासी विरोधी टिप्पणियों का विरोध किया जायेगा। मीडिया प्रभारी के अनुसार जिले में कई गा्रामों में अभी भी किसानों की पाला से प्रभावित हुई फसलों का सर्वे नहीं हो पाया है ओैर जहां पर सर्वे हुआ है तो अनेक स्थानों पर मुआवजा वितरण नहीं हो पाया है। वहीं राजस्व विभाग के अधिकारियों ने कागजी आंकड़े बनाकर तैयार कर लिये हैं। जिसका प्रचार-प्रसार भाजपा व उनके जनप्रतिनिधियो के द्वारा किया जा रहा है परंतु किसानों को किसी भी तरह से राहत नहंीं मिल पा रही है मुआवजा वितरण कार्य में सिवनी जिला प्रशासन पूरी तरह विफल रहा है। वहीं ग्राम थांवरी का आदिवासी युवा किसान के द्वारा खेती किसानी में हो रहे लगातार घाटे व बढ़ते कर्ज के कारण आत्महत्या कर लिया गया , परंतु उसकी आत्महत्या के कारण को जैसा कि अन्य किसानों की आत्महत्या के मामले में म.प्र. की सरकार विधानसभा में शराबी व पागल बनाकर प्रस्तुत कर रही है उसी तरह सिवनी में भी प्रशासन और भाजपा की विधायिका समझ से परे बताकर कोई नया कारण बनाने का प्रयास कर रहें है। साथ में वोट के आंकड़ों का हवाला देकर एवं मुआवजे को राजनैतिक रंग देकर मुआवजा के मामले में भाजपा पार्टी की विधायिका श्रीमती नीता पटेरिया यह भी कह रही हैं कि कौन से मुझे इस क्षेत्र से वोट मिले थे। वहीं कौन आदिवासियों ने मुझे वोट दिया है आदिवासियों ने वोट तो गोंगपा, मुनमुन राय, व कांग्रेस को दिया था। वहंीं हमारे नेता डॉ. ढालङ्क्षसह बिसेन भी आदिवासियों के वोट नहीं मिल पाने के कारण हार गये और तो और भाजपा में जो भी आदिवासी नेता आये हेैं वे सभी किसी दूसरी पार्टी से आये हैं या फिर स्वार्थ वस पार्टी में आये हैं । इस तरह की बयान बाजी करके म.प्र. में सत्तारूढ़ दल भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा आदिवासी सम्मान यात्रा के दौरान आदिवासी मेरे लिए भगवान है जैसी बातों को कहने पर प्रश्र चिन्ह लगा रहीं हैं। आज जनता के साथ बढ़ृ रहे अन्याय, अत्याचार शोषण एवं किसानों का मुआवजा भी भाजपा को वोट देने वाले क्षेत्र के आधार पर ही बनाया जा रहा है। ऐसी जनविरोधी नीतियों के विरोध एवं अन्य समस्याओं को लेकर गोंगपा का विशाल सम्मलेन का आयोजन कल ४ मार्च को किया गया है। सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय महासचिव श्यामसिंह मरकाम, व अन्य राष्ट्रीय व प्रांतीय पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा श्री अर्जुन सिंह के निधन पर शोक व्यक्त

मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा श्री अर्जुन सिंह के निधन पर शोक व्यक्त
वे कुशल राजनीतिज्ञ थे
मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केन्द्रीय मंत्री, राज्य सभा के सदस्य एवं वरिष्ठ राजनेता अर्जुन सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
श्री चौहान ने स्व. श्री अर्जुन सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे कुशल राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने जीवन-पर्यन्त पिछड़े वर्गों, कमजोरों और वंचित तबकों की खुशहाली और कल्याण के लिये कार्य किया। प्रदेश के मुख्यमंत्री, केन्द्रीय मंत्री, राज्यपाल एवं सार्वजनिक क्षेत्र की विभिन्न भूमिकाओं में रहते हुए वे जीवनपर्यंत गरीबों और पिछड़ों के कल्याण के लिये कार्य करते रहे। उनके निधन से प्रदेश ही नहीं देश के सार्वजनिक जीवन में जो शून्य उत्पन्न हुआ है उसकी भरपाई मुश्किल होगी।
श्री चौहान ने कहा कि स्व. श्री सिंह के निधन पर शोक स्वरूप शनिवार-दिनांक 05 मार्च को अवकाश रहेगा और तीन दिन का राजकीय शोक रहेगा।
श्री चौहान ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोक-संतप्त परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निधन की जानकारी प्राप्त होते ही स्व. श्री अर्जुन सिंह के सुपुत्र एवं प्रदेश के पूर्व पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री अजय सिंह से दूरभाष पर बात कर अपनी हार्दिक शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं।
Date: 04-03-2011
कांग्रेस नेता अर्जुन सिंह का निधन

कांग्रेस नेता अर्जुन सिंह का निधन
नई दिल्ली, 4 मार्च 2011। । तीन बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह का शुक्रवार को नई दिल्ली में निधन हो गया।
कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता अर्जुन सिंह 2004 से 2009 के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार में मानव संसाधन मंत्री रहे थे। 1930 में मध्य प्रदेश में जन्मे अर्जुन सिंह इससे पहले 1991 से 1994 तक भी मानव संसाधन मंत्री रहे थे।
अपने राजनीतिक करियर के अंतिम वर्षो में मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए सिंह को खराब स्वास्थ्य के कारण मौजूदा कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया था।
भाजपा विधायक आशारानी गिरफ्तार
भाजपा विधायक आशारानी गिरफ्तार
भोपाल 4 मार्च 2हाईप्रोफाइल ड्रामे के तहत आज दोपहर एक बजे भाजपा से निलंबित विधायक आशारानी सिंह को विधानसभा से निकलते ही पुलिस ने गिरफ्तार कर यहां के कोलार थाने में ले गई। छतरपुर जिले के बिजावर की भाजपा विधायक आशारानी सिंह अपने पति पूर्व विधायक अशोक वीर विक्रम सिंह उर्फ भैयाराजा के साथ नौकरानी तिज्जीबाई की हत्या के मामले में आरोपी हैं। भैयाराजा पहले से ही जेल में हैं।
आशारानी सिंह सुबह 10 बजे विधानसभा पहुंच गई थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया। वे सदन में भी मौजूद थीं। शून्यकाल में कांग्रेस विधायक डॉ. गोविंद सिंह ने आशारानी की मदद करने का अध्यक्ष से आग्रह किया, लेकिन अध्यक्ष ने डॉ. सिंह को यह मामला उठाने की इजाजत नहीं दी। आशारानी सदन में करीब एक घंटे रहने के बाद लॉबी में चली गईं। बाहर पुलिस उनका इंतजार कर रही थी।
पुलिस विधानसभा परिसर से बाहर निकल रहे एक-एक वाहन की तलाशी ले रही थी। दोपहर एक बजे जैसे ही आशारानी आईं, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। साठ दिन लगातार विधानसभा से बिना अनुमति अनुपस्थित रहने वाले विधायक की सदस्यता खत्म हो सकती है, इसी के चलते आशारानी सिंह विधानसभा पहुंची थीं। अब गिरफ्तारी के बावजूद उनकी विधायकी बची रह सकेगी। वे इसके पहले विधानसभा में प्रश्न लगाती रही हैं। पिछले साल उन्होंने सत्तापक्ष की सदस्य होने के बावजूद बजट में संशोधन प्रस्ताव विधानसभा सचिवालय भिजवा दिया था।011।
भोपाल 4 मार्च 2हाईप्रोफाइल ड्रामे के तहत आज दोपहर एक बजे भाजपा से निलंबित विधायक आशारानी सिंह को विधानसभा से निकलते ही पुलिस ने गिरफ्तार कर यहां के कोलार थाने में ले गई। छतरपुर जिले के बिजावर की भाजपा विधायक आशारानी सिंह अपने पति पूर्व विधायक अशोक वीर विक्रम सिंह उर्फ भैयाराजा के साथ नौकरानी तिज्जीबाई की हत्या के मामले में आरोपी हैं। भैयाराजा पहले से ही जेल में हैं।
आशारानी सिंह सुबह 10 बजे विधानसभा पहुंच गई थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया। वे सदन में भी मौजूद थीं। शून्यकाल में कांग्रेस विधायक डॉ. गोविंद सिंह ने आशारानी की मदद करने का अध्यक्ष से आग्रह किया, लेकिन अध्यक्ष ने डॉ. सिंह को यह मामला उठाने की इजाजत नहीं दी। आशारानी सदन में करीब एक घंटे रहने के बाद लॉबी में चली गईं। बाहर पुलिस उनका इंतजार कर रही थी।
पुलिस विधानसभा परिसर से बाहर निकल रहे एक-एक वाहन की तलाशी ले रही थी। दोपहर एक बजे जैसे ही आशारानी आईं, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। साठ दिन लगातार विधानसभा से बिना अनुमति अनुपस्थित रहने वाले विधायक की सदस्यता खत्म हो सकती है, इसी के चलते आशारानी सिंह विधानसभा पहुंची थीं। अब गिरफ्तारी के बावजूद उनकी विधायकी बची रह सकेगी। वे इसके पहले विधानसभा में प्रश्न लगाती रही हैं। पिछले साल उन्होंने सत्तापक्ष की सदस्य होने के बावजूद बजट में संशोधन प्रस्ताव विधानसभा सचिवालय भिजवा दिया था।011।
खिसियाए पेंटर ने बनाई अरुंधति रॉय की न्यूड पेंटिंग

शुक्रवार, मार्च 4, 2011प्रणब ने इस पेंटिंग का नाम अरुंधति की किताब 'गॉड ऑफ द स्मॉल थिंग्स' की तर्ज पर 'गॉडेस ऑफ 15 मिनट्स ऑफ फेम' रखा है। प्रणब ने इस पेंटिंग के बीच में अरुंधति रॉय को न्यूड दिखाया है जबकि उनके आजू-बाजू माओ और ओसामा बिन लादेन को नाम मात्र के कपड़ों में दिखाया गया है। प्रणब का कहना है कि उनकी पेंटिंग अरुंधति के पब्लिसिटी के स्टंट खिलाफ एक प्रोटेस्ट है।
प्रणब की इस पेंटिंग के चर्चा में आने के बाद कला जगत के नामी दिग्गज इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय अलग-अलग तरीके से जाहिर कर रहे हैं। प्रसिद्ध पेंटर अशोक भौमिक इस पेंटिंग को प्रणब का पब्लिसिटी स्टंट बताते हुए उनकी पेंटिंग को सिर्फ एक गाली करार दे रहे हैं। जबकि जो लोग प्रणब की पेंटिंग के द्वारा विरोध प्रदर्शन को जायज कह रहे हैं वह भी एक महिला को नग्न दिखाए जाने
के विरोध में हैं।
आप को क्या लगता है, किसी महिला की न्यूड पेंटिंग बनाना क्या लोकतंत्र में विरोध जताने का एक जायज तरीका है, हमें जरूर बताएं।
Wednesday, March 2, 2011
शिवरात्रि

एक समय था जब भारतीय संस्कृति में 365 त्योहार हुआ करते थे। दूसरे शब्दों में हर दिन उत्सव मनाने के लिए उन्हें बस एक बहाने की जरूरत होती थी। जीवन के अलग-अलग उद्देश्यों को लेकर ये 365 त्योहार मनाए जाते थे। पर महाशिवरात्रि का अपना अलग ही महत्व है।
कृष्ण पक्ष में हरेक चंद्र मास का चौदहवाँ दिन या अमावस्या से एक दिन पूर्व शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। एक पंचांग वर्ष में होने वाली सभी बारह शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि जो फरवरी-मार्च के महीने में पड़ती है सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। इस रात्रि में इस ग्रह के उत्तरी गोलार्थ की दशा कुछ ऐसी होती है कि मानव शरीर में प्राकृतिक रूप से ऊर्जा ऊपर की ओर चढ़ती है।
NDयह एक ऐसा दिन होता है जब प्रकृति व्यक्ति को उसके आध्यात्मिक शिखर की ओर ढकेल रही होती है। इसका उपयोग करने के लिए इस परंपरा में हमने एक खास त्योहार बनाया है जो पूरी रात मनाया जाता है। पूरी रात मनाए जाने वाले इस त्योहार का मूल मकसद यह निश्चित करना है कि ऊर्जाओं का यह प्राकृतिक चढ़ाव या उमाड़ अपना रास्ता पा सके।
वे लोग जो अध्यात्म मार्ग पर हैं उनके लिए महाशिवरात्रि बहुत महत्वपूर्ण है। योग परंपरा में शिव की पूजा ईश्वर के रूप में नहीं की जाती बल्कि उन्हें आदि गुरु माना जाता है, वे प्रथम गुरु हैं जिनसे ज्ञान की उत्पति हुई थी। कई हजार वर्षों तक ध्यान में रहने के पश्चात एक दिन वे पूर्णतः शांत हो गए, वह दिन महाशिवरात्रि का है। उनके अंदर कोई गति नहीं रह गई और वे पूर्णतः निश्चल हो गए। इसलिए तपस्वी महाशिवरात्रि को निश्चलता के दिन के रूप में मनातें हैं।
पौराणिक कथाओं के अलावा योग परंपरा में इस दिन और इस रात को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि महाशिवरात्रि एक तपस्वी व जिज्ञासु के समक्ष कई संभावनाएँ प्रस्तुत करती है। आधुनिक विज्ञान कई अवस्थाओं से गुजरने के बाद आज एक ऐसे बिंदु पर पहुँचा है जहाँ वे यह सिद्ध कर रहे हैं कि हर चीज जिसे आप जीवन के रूप में जानते हैं, वह सिर्फ ऊर्जा है, जो स्वयं को लाखों करोड़ों रूप में व्यक्त करती है।
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शिव की सच्ची उपासना सिद्ध होगी।

विज्ञान की बिग बैंग थ्योरी के अनुसार बकी उत्पत्ति एक महाविस्फोट से हुई थी। इस सिद्धात के बरक्स हम शिव तत्व को रख सकते हैं, जो ऊर्जा के रूप में हमारे पूरे परिवेश में व्याप्त है। सृष्टि के जन्म से अंत तक का परिवेश शिव तत्व है, जिसमें डूबने के लिए हमें जागरूक होना होगा अपने परिवेश और समाज के प्रति..। आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्रीश्री रविशंकर का नजरिया:
शिव वहां होते हैं, जहां मन का विलय होता है। ईश्वर को पाने के लिए लंबी तीर्थ यात्रा पर जाने की आवश्यकता नहीं। हम जहां पर हैं, वहां अगर ईश्वर नहीं मिलता, तो अन्य किसी भी स्थान पर उसे पाना असभव है। जिस क्षण हम स्वय में स्थित, केंद्रित हो जाते हैं, तो पाते हैं कि ईश्वर सर्वत्र विद्यमान है। शोषितों में, वंचितों में, पेड़-पौधों, जानवरों में.. सभी जगह। इसी को ध्यान कहते हैं।
शिव के कई नामों में से एक है 'विरुपक्ष'। अर्थात जो निराकार है, फिर भी सब देखता है। हमारे चारों ओर हवा है और हम उसे महसूस भी करते हैं, लेकिन अगर हवा हमें महसूस करने लगे तो क्या होगा? आकाश हमारे चारों ओर है, हम उसे पहचानते हैं, लेकिन कैसा होगा अगर वह हमें पहचानने लगे और हमारी उपस्थिति को महसूस करे? ऐसा होता है। केवल हमें इस बात का पता नहीं चलता। वैज्ञानिकों को यह मालूम है और वे इसे सापेक्षता का सिद्धात कहते हैं। जो देखता है और जो दिखता है; दोनों दिखने पर प्रभावित होते हैं। ईश्वर हमारे चारों ओर है और हमें देख रहा है। वह हमारा पूरा परिवेश है। वह दृष्टा, दृश्य और दृष्टित है। यह निराकार दैवत्व शिव है और इस शिव तत्व का अनुभव करना शिवरात्रि है।
साधारणतया उत्सव में जागरूकता खो जाती है, लेकिन उत्सव में जागरूकता के साथ गहरा विश्राम शिवरात्रि है। जब हम किसी समस्या का सामना करते हैं, तब सचेत व जागृत हो जाते हैं। जब सब कुछ ठीक होता है, तब हम विश्राम में रहते हैं। अद्यंतहिनम् अर्थात जिसका न तो आदि है न अंत, सर्वदा वही शिव है। सबका निर्दोष शासक, जो निरंतर सर्वत्र उपस्थित है। हमें लगता है शिव गले में सर्प लिए कहीं बैठे हुए हैं, लेकिन शिव वह हैं, जहां से सब कुछ जन्मा है, जो इसी क्षण सब कुछ घेरे हुए है, जिनमें सारी सृष्टि विलीन हो जाती है। इस सृष्टि में जो भी रूप देखते हैं, सब उसी का रूप है। वह सारी सृष्टि में व्याप्त है। न वह कभी जन्मा है न ही उनका कोई अंत है। वह अनादि है।
शिव के पांच रूप हैं- जल, वायु, पृथ्वी, अग्नि और आकाश। इन पांचों तत्वों की समझ तत्व ज्ञान है। शिव तत्व में हम उनके पांचों रूपों का आदर करते हैं। हम उदार हृदय से शुभेच्छा करें कि ससार में कोई भी व्यक्ति दुखी न रहे। सर्वे जन: सुखिनो भवंतु..। पृथ्वी के सभी तत्वों में देवत्व है। वृक्षों, पर्वतों, नदियों और लोगों का सम्मान किए बिना कोई पूजा संपूर्ण नहीं होती। सब के सम्मान को 'दक्षिणा' कहते हैं। दक्षिणा का अर्थ है कुछ देना। जब हम किसी भी विकृति के बिना, कुशलता से समाज में रहते हैं, क्रोध, चिंता, दु:ख जैसी सब नकारात्मक मनोवृत्तियों का नाश होता है। हम अपने तनाव, चिताएं और दु:ख दक्षिणा के रूप में प्रकृति और परिवेश को दे दें और अपना समय दुखियों-पीड़ितों की सेवा को समर्पित कर दें। यही शिव की सच्ची उपासना सिद्ध होगी।
निरूपमा पाठक ने की थी आत्महत्या

कोडरमा। पुलिस ने यहा एक स्थानीय अदालत में दाखिल अपनी रिपोर्ट में बताया कि दिल्ली में रह रही पत्रकार निरूपमा पाठक की मौत आत्महत्या का मामला था और उसके परिवार के तीन सदस्यों तथा उसके प्रेमी ने उसे इसके लिए उकसाया था।
कोडरमा के पुलिस अधीक्षक जी. क्राति कुमार ने पत्रकारों को बताया कि जाच रिपोर्ट मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजित कुमार की अदालत में कल दाखिल की गई। कुमार ने कहा कि जाच रिपोर्ट में धारा 306 [आत्महत्या के लिए उकसावा] के तहत निरूपमा के पिता धर्मेन्द्र पाठक, मा सुधा, भाई समरेन्द्र और प्रेमी प्रियभाशु रंजन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने की सिफारिश की गई है।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि कोलकाता की एक फॉरेंसिक प्रयोगशाला में की गई जाच में पाया गया कि सुसाइड नोट पर निरूपमा के ही हस्ताक्षर थे। निरूपमा का शव पिछले साल 29 अप्रैल को कोडरमा के झुमरी तलैया में चित्रगुप्त नगर कॉलोनी स्थित उसके निवास पर पाया गया था।
मुम्बई की बालाओं द्वारा खुलेआम अश्लीलता परोसी गई और भाजपा के तमाम नेता मूक दर्शक बने देखते रहे। उन्होंने कहा कि भाजपा गुप्त एजेण्डे को थोपना चाह रही ह
राज्य के दोनों प्रमुख सियासी दलों कांग्रेस और भाजपा में अब भोपाल का नाम बदलने के सवाल पर भिड़ने की तैयारी हो रही है। भाजपा और उसकी सरकार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जहां सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का हवाला देकर इस नवाबी शहर का नाम बदलकर भोजपाल करने के हिमायती हैं, वहीं कांग्रेस को भाजपा की इस मुहिम में कोई तुक नजर नहीं आ रही है। उसका कहना है कि राज्य सरकार बुनियादी सवालों से जनता का ध्यान हटाने के लिए फिजूल का विषय उठा रही है।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने भोपाल के बड़े तालाब पर राजा भोज की प्रतिमा स्थापित कर कल ही भाजपा नेता वेंकैया नायडू से उसका अनावरण कराया है। और कल शाम को ही भोज का सहस्त्राब्दी समारोह मनाने के लिए लाल परेड मैदान पर एक भव्य जलसा भी किया, जिसमें भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। यह अलग विषय है कि बालीवुड सिंगर सुखविंदर सिंह के दल में शामिल लड़कियों की पोशाक को देखकर खुद मुख्यमंत्री चौहान नाराज हो गए थे। उनकी नाराजगी के चलते सुखविंदर को ब्रेक लेना पड़ा और लड़किया भी डांस करने नहीं आई।
इस बीच वरिष्ठ काग्रेसी विधायक आरिफ अकील ने भोपाल का नाम बदल कर भोजपाल करने के मध्यप्रदेश सरकार के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है और कहा है कि इस पर किसी भी हाल में अमल नहीं होने दिया जाएगा।
काग्रेसी विधायक ने कहा कि भोपाल का नाम बदल कर भोजपाल करने का प्रश्न ही नहीं उठता और ऐसा करने की इजाजत किसी भी हाल में प्रदेश सरकार को नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की राजधानी का नाम भोपाल बहुत सालों से चला आ रहा है और इसको बदलने का कोई भी कारण उन्हें समझ में नहीं आता।
कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने भी एक बयान में कहा कि राजा भोज के नाम पर सरकार ने जनता के 10 करोड़ रूपए फूंक दिए हैं। मुम्बई की बालाओं द्वारा खुलेआम अश्लीलता परोसी गई और भाजपा के तमाम नेता मूक दर्शक बने देखते रहे। उन्होंने कहा कि भाजपा गुप्त एजेण्डे को थोपना चाह रही है।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने भोपाल के बड़े तालाब पर राजा भोज की प्रतिमा स्थापित कर कल ही भाजपा नेता वेंकैया नायडू से उसका अनावरण कराया है। और कल शाम को ही भोज का सहस्त्राब्दी समारोह मनाने के लिए लाल परेड मैदान पर एक भव्य जलसा भी किया, जिसमें भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। यह अलग विषय है कि बालीवुड सिंगर सुखविंदर सिंह के दल में शामिल लड़कियों की पोशाक को देखकर खुद मुख्यमंत्री चौहान नाराज हो गए थे। उनकी नाराजगी के चलते सुखविंदर को ब्रेक लेना पड़ा और लड़किया भी डांस करने नहीं आई।
इस बीच वरिष्ठ काग्रेसी विधायक आरिफ अकील ने भोपाल का नाम बदल कर भोजपाल करने के मध्यप्रदेश सरकार के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है और कहा है कि इस पर किसी भी हाल में अमल नहीं होने दिया जाएगा।
काग्रेसी विधायक ने कहा कि भोपाल का नाम बदल कर भोजपाल करने का प्रश्न ही नहीं उठता और ऐसा करने की इजाजत किसी भी हाल में प्रदेश सरकार को नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की राजधानी का नाम भोपाल बहुत सालों से चला आ रहा है और इसको बदलने का कोई भी कारण उन्हें समझ में नहीं आता।
कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने भी एक बयान में कहा कि राजा भोज के नाम पर सरकार ने जनता के 10 करोड़ रूपए फूंक दिए हैं। मुम्बई की बालाओं द्वारा खुलेआम अश्लीलता परोसी गई और भाजपा के तमाम नेता मूक दर्शक बने देखते रहे। उन्होंने कहा कि भाजपा गुप्त एजेण्डे को थोपना चाह रही है।
सहरिया आदिवासियों का गुस्सा पुलिस पर फूटा
ग्वालियर, संवाददाता। शिवपुरी में सहरिया आदिवासियों की नाराजगी को हल्के ढंग से लेना पुलिस महकमे को भारी पड़ गया। एक महिला की छेड़खानी को लेकर गुस्साए आदिवासियों को जब पुलिस ने खदेड़ा तो उन्होंने में जमकर हमला बोल दिया और एक दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया। इस घटना के बाद इलाके में अभी भी तनाव की स्थिति बनी हुई है।
पोहरी तहसील के भोजपुर गांव की एक सहरिया आदिवासी महिला को खंगार जाति के कुछ युवकों ने छेड़ दिया था। इसके बाद जब आदिवासी समुदाय के कुछ लोग दूसरे पक्ष से बात करने तो उन्होंने सहारियाओं की जमकर पिटाई की और भगा दिया। इससे गुस्साए सहरिया आदिवासी अपने लाठी-डंडे लेकर आ गए और खंगार समुदाय से लड़ने चल दिए। इस बीच मौके पर पुलिस पहुंच भी पहुंच गयी और उन्होंने पोहरी की सड़क पर आदिवासियों को रोका। चूंकि आदिवासी जमकर नाराज थे, लिहाजा उन्होंने पुलिस पर ही हमला बोल दिया। आदिवासियों ने जमकर पुलिस पर पत्थर फेंके। हालांकि पुलिस तो यही कहती है कि आदिवासी शराब के नशे में धुत्त थे और इसी के चलते उन्होंने पुलिस पर हमला बोला। इस हमले में एसडीओपी अजय सिंह सहित कई पुलिस अफसर भी पत्थर से घायल हो गए। जब पुलिस के ऊपर पथराव हुआ, तब जाकर पुलिस व प्रशासनिक अफसरों को होश आया और अब उन्होंने आदिवासी महिला से छेड़खानी करने और पीटने के आरोप में दूसरे समुदाय के लोगों पर मामला दर्ज किया है। इसके बाद भी सहरिया आदिवासियों में जमकर नाराजगी है। वैसे सहरिया आदिवासी आमतौर पर शांत रहते हैं, लेकिन इस बार उनका रोष फूट गया और उन्होंने अपना गुस्सा पुलिस पर ही दिखा दिया।
2-2-2011
पोहरी तहसील के भोजपुर गांव की एक सहरिया आदिवासी महिला को खंगार जाति के कुछ युवकों ने छेड़ दिया था। इसके बाद जब आदिवासी समुदाय के कुछ लोग दूसरे पक्ष से बात करने तो उन्होंने सहारियाओं की जमकर पिटाई की और भगा दिया। इससे गुस्साए सहरिया आदिवासी अपने लाठी-डंडे लेकर आ गए और खंगार समुदाय से लड़ने चल दिए। इस बीच मौके पर पुलिस पहुंच भी पहुंच गयी और उन्होंने पोहरी की सड़क पर आदिवासियों को रोका। चूंकि आदिवासी जमकर नाराज थे, लिहाजा उन्होंने पुलिस पर ही हमला बोल दिया। आदिवासियों ने जमकर पुलिस पर पत्थर फेंके। हालांकि पुलिस तो यही कहती है कि आदिवासी शराब के नशे में धुत्त थे और इसी के चलते उन्होंने पुलिस पर हमला बोला। इस हमले में एसडीओपी अजय सिंह सहित कई पुलिस अफसर भी पत्थर से घायल हो गए। जब पुलिस के ऊपर पथराव हुआ, तब जाकर पुलिस व प्रशासनिक अफसरों को होश आया और अब उन्होंने आदिवासी महिला से छेड़खानी करने और पीटने के आरोप में दूसरे समुदाय के लोगों पर मामला दर्ज किया है। इसके बाद भी सहरिया आदिवासियों में जमकर नाराजगी है। वैसे सहरिया आदिवासी आमतौर पर शांत रहते हैं, लेकिन इस बार उनका रोष फूट गया और उन्होंने अपना गुस्सा पुलिस पर ही दिखा दिया।
2-2-2011
महाशिवरात्रि पर गूंजे बाबा महाकाल के जयकारे

महाशिवरात्रि पर गूंजे बाबा महाकाल के जयकारे
महाशिवरात्रि पर गूंजे बाबा महाकाल के जयकारे
भोपाल, 2 मार्च 2011। देश के प्रमुख ज्योतिर्लिगों में से एक उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर सहित मध्य प्रदेश के अन्य शिवालयों में बुधवार को महाशिवरात्रि के मौके पर पूजा अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए। इसके अलावा तमाम पवित्र नदियों के तटों पर श्रद्धालुओं ने स्नान किया।
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के ही श्रद्घालुओं ने बाबा महाकाल के जयकारों के साथ पूजा अर्चना का सिलसिला शुरू कर दिया। यहां देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे लाखों श्रद्घालु महाकाल के दर्शन और पूजा अर्चना कर सुखमय जीवन की कामना की।
खंडवा जिले में नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में भी श्रद्घालुओं ने पूजा-अर्चकी की। इसके अलावा खजुराहो के मतंगेश्वर मंदिर में श्रद्घालुओं का तांता लगा रहा। बेतवा तथा नर्मदा नदी के तटों पर हजारों लोगों ने स्नान कर शिवालयों में शिव की आराधना की।
विरोध
हर-हर महादेव
भोपालः महाशिवरात्रि के मौके पर बड़वाले महादेव मंदिर से भोले शंकर की भव्य बारात निकाली गई। बारात में शामिल रजत रथ को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नगरी
मंदिरों तोड़ने के विरोध में बजरंग दल का ग्वालियर बंद का आह्वान
मंदिरों तोड़ने के विरोध में बजरंग दल ग्वालियर,
शहर को सुंदर बनाने में मंदिरों के तोड़े जाने के विरोध में अब बजरंग दल खुलकर सामने आ गया है और दो मार्च को इसके विरोध में ग्वालियर बंद का आह्वान किया है। इसके अलावा आज भी बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने महाराज बाड़े से हनुमान मंदिर हटाने के विरोध में जमकर प्रदर्शन भी किया।
अभी तक शहर से पचास मंदिरों को हटाया जा चुका है, लेकिन बजरंग दल का विरोध मुखर नहीं रहा। अचानक अब बजरंग दल ने इस मामले में कड़ा रुख अपना लिया है और अब किसी भी मंदिर को हटाए जाने के खिलाफ नजर आने लगे हैं। बजरंग दल के प्रांतीय संयोजक पप्पू वर्मा का कहना है कि प्रशासन व नगर निगम शहर के मंदिरों को हटाने में पक्षपात कर रहा है। टोपी बाजार में बनी मस्जिद की कुछ दुकानों को निगम ने नहीं हटाया और वे इस मामले में उनके कागजात देखकर संतुष्ट हो गए। जबकि शहर में ऐसे अनेक मंदिर हटा दिए गए, जो वर्षो पुराने थे। ऐसे मंदिरों के कागजात तक अफसरों ने देखना उचित नहीं समझा। इसलिए इसका विरोध करने के लिए अब बजरंग दल हर काम करेगा। पहले चरण में दो मार्च को ग्वालियर बंद रखकर विरोध जताया जा रहा है। इसके अलावा बजरंग दल के कार्यकर्ता अब हटाने वाले मंदिरों के आगे आकर उन्हें हटाने का विरोध करेंगे। इसी क्रम में आज मंगलवार को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने महाराज बाड़े के हनुमान मंदिर तथा जीवाजी गंज के पास हनुमान चौराहे के मंदिर के आगे विरोध प्रदर्शन भी किया।
शहर को सुंदर बनाने में मंदिरों के तोड़े जाने के विरोध में अब बजरंग दल खुलकर सामने आ गया है और दो मार्च को इसके विरोध में ग्वालियर बंद का आह्वान किया है। इसके अलावा आज भी बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने महाराज बाड़े से हनुमान मंदिर हटाने के विरोध में जमकर प्रदर्शन भी किया।
अभी तक शहर से पचास मंदिरों को हटाया जा चुका है, लेकिन बजरंग दल का विरोध मुखर नहीं रहा। अचानक अब बजरंग दल ने इस मामले में कड़ा रुख अपना लिया है और अब किसी भी मंदिर को हटाए जाने के खिलाफ नजर आने लगे हैं। बजरंग दल के प्रांतीय संयोजक पप्पू वर्मा का कहना है कि प्रशासन व नगर निगम शहर के मंदिरों को हटाने में पक्षपात कर रहा है। टोपी बाजार में बनी मस्जिद की कुछ दुकानों को निगम ने नहीं हटाया और वे इस मामले में उनके कागजात देखकर संतुष्ट हो गए। जबकि शहर में ऐसे अनेक मंदिर हटा दिए गए, जो वर्षो पुराने थे। ऐसे मंदिरों के कागजात तक अफसरों ने देखना उचित नहीं समझा। इसलिए इसका विरोध करने के लिए अब बजरंग दल हर काम करेगा। पहले चरण में दो मार्च को ग्वालियर बंद रखकर विरोध जताया जा रहा है। इसके अलावा बजरंग दल के कार्यकर्ता अब हटाने वाले मंदिरों के आगे आकर उन्हें हटाने का विरोध करेंगे। इसी क्रम में आज मंगलवार को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने महाराज बाड़े के हनुमान मंदिर तथा जीवाजी गंज के पास हनुमान चौराहे के मंदिर के आगे विरोध प्रदर्शन भी किया।
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