Friday, October 4, 2013
Thursday, October 3, 2013
उप सचिव श्रीमती शशि कर्णावत निलंबित
भोपाल 3 अक्टूबर 2013। राज्य शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी और खेल एवं युवा कल्याण विभाग की उप सचिव श्रीमती शशि कर्णावत को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मण्डला के विशेष न्यायालय द्वारा सजा सुनाये जाने के कारण निलंबित कर दिया है। निलंबन 27 सितम्बर, 2013 से माना जायेगा। राज्य शासन ने श्रीमती कर्णावत पर न्यायालय द्वारा अधिरोपित दण्ड की अवधि 48 घंटे से अधिक होने पर यह कार्रवाई की है। निलंबन अवधि में श्रीमती कर्णावत का मुख्यालय पृथक् आदेश से तय किया जायेगा।
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आम विस चुनाव के समय शिवराज सरकार ने फिर लिया बाजार से 500 करोड़ का कर्ज
भोपाल 3 अक्टूबर 2013। ऐन विधानसभा आम चुनावों के समय प्रदेश की शिवराज सरकार ने फिर बाजार से 500 करोड़ रुपये का ऋण उठाया है। पहले से ही 71 हजार करोड़ रुपयों के कर्ज से लदी राज्य की भाजपा सरकार ने रिजर्व बैंक आफ इण्डिया के मुम्बई आफिस से दस हजार प्रति सिक्युरिटी के हिसाब से यह पांच सौ करोड़ रुपये की राशि बाजार से उठाई है।
अधिकृत जानकारी के अनुसार, कूपन ब्याज रेट पर उठायी गई कर्ज की इस राशि का पुनर्भगतान 25 सितम्बर,2023 को राज्य सरकार करेगी। दस साल के इस कर्ज पर हर साल 25 मार्च और 25 सितम्बर को ब्याज का भुगतान किया जायेगा। इस कर्ज को लेने के लिये राज्य सरकार ने वर्ष 2012-13 के बजटीय आंकड़ों का सहारा लिया है तथा राजस्व प्राप्तियों को राजस्व व्यय से अधिक बताया है अर्थात 6 हजार 370 करोड़ 50 लाख रुपयों का बजट आधिक्य प्रदर्शित किया है जबकि इससे पूर्ववर्ती वर्ष 2011-12 में यह बजट आधिक्य 9 हजार 910 करोड़ 37 लाख रुपयों का बताया गया था। यही नहीं राज्य सरकार ने 31 मार्च,2012 की स्थिति में अपने ऊपर दर्ज कर्ज की राशि 71 हजार 478 करोड़ 10 लाख रुपये की राशि वित्तीय विवरण में बताई है। जबकि 31 मार्च,2013 को समाप्त वित्त वर्ष के कर्ज संबंधी अंतिम आंकड़े अभी तक राज्य सरकार नये कर्जों के लिये जारी नहीं कर रही है। इस साल राज्य सरकार ने 18 जनवरी 2013, 14 फरवरी 2013 तथा 26 जुलाई 2013 को भी एक-एक हजार करोड़ रुपये के ऋण गवर्मेन्ट सिक्युरिटीज का विक्रय कर बाजार से कर्ज उठाया था तथा अब फिर पांच सौ करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया है।
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शहर के 104 चौराहा पर अब सी.सी. टी.व्ही. केमरा की नजर
गृह मंत्री श्री गुप्ता ने किया भोपाल सिटी सर्विलेंस कंट्रोल-रूम का उदघाटन
भोपाल 3 अक्टूबर 2013। भोपाल शहर के 104 चौराहे पर 430 सी.सी. टी.व्ही. केमरे लगाये गये हैं। इन सब केमरों की मॉनीटरिंग भोपाल सिटी सर्विलेंस कंट्रोल-रूम से होगी। गृह मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने आज पुलिस कंट्रोल-रूम के पास सिटी सर्विलेंस कंट्रोल-रूम का उदघाटन किया। इस सिस्टम से अत्याधुनिक डॉयल 100 प्रणाली भी जोड़ी गई है।
गृह मंत्री श्री गुप्ता ने कहा कि प्रदेश में बेहतर और पारदर्शी प्रशासन देने के हर-संभव प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह का सिस्टम पूरे प्रदेश में स्थापित किया जायेगा। इसके लिये शासन द्वारा बजट प्रावधान कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे आम आदमी के साथ ही सड़क पर पुलिस की गतिविधियों की रिकार्डिंग भी होगी। गृह मंत्री ने पुलिस बल के लिये शासन द्वारा किये गये कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब पुलिस बल की और अधिक प्रभावी कार्यवाही क्षेत्र में दिखनी चाहिये। श्री गुप्ता ने कहा कि प्रदेश का शांतिपूर्ण माहौल उद्योगपतियों को उद्योग लगाने के लिये प्रेरित करेगा। इससे प्रदेश के नौजवानों को रोजगार उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि कंट्रोल-रूम में बैठने वाले कर्मचारियों को भी विशेष प्रशिक्षण दिलवाया जायेगा।
पुलिस महानिदेशक श्री नंदन दुबे ने कहा कि सी.सी. टी.व्ही. केमरे लगने से ट्रेफिक मेनेजमेंट के साथ ही अपराधियों को पकड़ने में भी सहूलियत होगी। श्री दुबे ने गृह मंत्री द्वारा पुलिस बल के लिये किये गये उल्लेखनीय कार्यों के लिये उनका आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इससे मेन पॉवर का उपयोग अन्य कार्यों में किया जा सकेगा। पुलिस महानिरीक्षक श्री संजय झा ने सर्विलेंस कंट्रोल-रूम की कार्य-प्रणाली के बारे में जानकारी दी।
शहर में प्रथम चरण में प्रमुख 16 चौराहे पर सी.सी. टी.व्ही. केमरे लगाये गये। दूसरे चरण में 61 प्रमुख चौराहे पर 283 केमरे लगाये गये। इसके बाद राजभवन और उसके आसपास 27 स्थान पर 71 केमरे लगाये गये। अब सबको मिलाकर शहर के प्रमुख 104 चौराहे पर 430 केमरे लग चुके हैं। इन केमरों की 30 दिन तक की वीडियो रिकार्डिंग सुरक्षित रहेगी। इसके साथ ही 100 नम्बर को भी जोड़ा गया है। इसके माध्यम से किसी भी चौराहे पर अवांछित गतिविधि दिखने अथवा कोई सूचना मिलने पर तुरंत पुलिस वाहन रवाना होगा। इसके लिये 105 वाहन रखे गये हैं। इसी तरह की व्यवस्था इंदौर शहर के लिये भी की गई है।
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अवंतिलाल जैन की हत्या की आशंका
स्वास्थ्य मंत्रालय ने हत्या का प्रकरण मान प्रकरण दर्ज करवाने की सलाह दी
उज्जैन 3 अक्टूबर 2013। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व वरिष्ठ पत्रकार अवंतिलाल जैन की मृत्यु के बाद अब चौकाने वाली जानकारी सामने आई है। 15 अगस्त 2011 को संजीवनी हॉस्पिटल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी। मेडिकल दस्तावेजों को देख संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत का कारण बताकर उनके पुत्र डॉ. अरुण जैन निवासी 102 रेणुका प्लाजा (फ्रीगंज) ने स्वास्थ्य मंत्रालय भोपाल को आवेदन देकर पिता की मौत की जांच मेडिकल बोर्ड से करवाए जाने की मांग की थी। जवाब में स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रथम दृष्टया मौत का कारण हत्या मानकर डॉ. जैन को पुलिस में प्रकरण दर्ज करवाने की सलाह दी है। डॉ. जैन ने हाल ही में एक मर्तबा फिर आईजी वी. मधुकुमार को शिकायत कर एफआईआर दर्ज कर दोषियों के खिलाफ सत कार्रवाई की मांग की है। इससे पहले वे तत्कालीन एसपी राकेश गुप्ता से भी शिकायत कर चुके हैं।
इसलिए हत्या की आशंका
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त संचालक ने डॉ. जैन को भेजे जवाब में जिक्र किया है कि 29 अप्रैल 2012 को आपके द्वारा भेजे पत्र क्रमांक एजे/एचएम/12 में पिताजी की मृत्यु संदेहास्पद परिस्थितियों में दर्शाई गई है। प्रकरण प्रथम दृष्टया हत्या से संबंधित होकर पुलिस विवेचना का है। अत: आप पुलिस विभाग में प्रकरण दर्ज करवाएं।
इनका कहना - पिताजी की संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत की आशंका संजीवनी अस्पताल के पेपर्स देखकर हुई थी। स्वास्थ्य मंत्रालय, भोपाल से मौत की जांच मेडिकल बोर्ड से करवाए जाने की मांग की गई थी। उन्होंने प्रथम दृष्टया हत्या का प्रकरण बताकर पुलिस में प्रकरण दर्ज करवाने के निर्देश दिए हैं। एफआईआर दर्ज करवाए जाने को लेकर एक मर्तबा फिर आईजी से शिकायत की गई। - डॉ. अरुण जैन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जैन के पुत्र शिकायत एसपी को भेजी है। जांच कर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।- वी. मधुकुमार, आईजी उज्जैन
शिकायत के आधार पर तथ्यों को जुटाया जा रहा है। जो तथ्य सामने आएंगे, उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी। -अनुराग, एसपी उज्जैन
इन बिंदुओं के आधार पर जैन की मौत संदेहास्पद
डॉ. अरुण जैन ने मेडिकल दस्तावेज और रिपोर्ट देखने के बाद पिता की मौत को संदेहास्पद माना था। उन्होंने निन बिंदुओं के आधार पर पिता की मौत की जांच मेडिकल बोर्ड से करवाए जाने के लिए 29 अप्रैल 12 को स्वास्थ्य मंत्रालय, भोपाल से मांग की थी। कुछ खास बिंदु इस प्रकार हैं -
> मेरे पिता (स्व. अवंतिलाल जैन) वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी व राज्य स्तरीय अधिमान्य पत्रकार थे।
> संजीवनी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर दशहरा मैदान (जहां पिताजी को भर्ती कराया था) से प्राप्त हॉस्पिटल के पेपर्स कईं प्रश्न खड़े करते हैं।
> हॉस्पिटल पेपर्स में किसी भी शल्य अथवा हृदय चिकित्सक द्वारा जांच करने, उपचार करने के कोई संकेत नहीं हैं। न ही जांचकर्ता विशेषज्ञ डॉक्टर के हस्ताक्षर हैं।
> पिता को फोर्टिविन और फेनरगान इंजेक्शन लगाना बताए गए पर अस्पताल संचालक ने अपने यहां इंजेक्शन लगाने से लिखित में इंकार किया है, जबकि हॉस्पिटल पेपर में इंजेक्शन लगाए जाने का जिक्र है। इंजेक्शन कहां और किसने लगाए, यह स्पष्ट नहीं।
> फोर्टिविन इंजेक्शन 60 वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्ति के लिए प्रतिबंधित है क्योंकि इससे कार्डिक अरेस्ट का खतरा है। बावजूद इसके इंजेक्शन लगाए गए।
> 15 अगस्त 2011 दोपहर 12 बजे अचानक कार्डिक अरेस्ट आने की जानकारी दर्ज है। सवा 12 बजे फिर वही सूचना दर्ज है, मसाज लिखी है। 12.30 बजे उनकी मृत्यु दर्शाई गई है।
> शहर और प्रदेश के वरिष्ठतम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी (वीवीआईपी) के साथ ऐसा सलूक गंभीर लापरवाही, षड्यंत्र का संकेत करती है। मेरी मांग है कि समस्त प्रकरण की विस्तारपूर्वक मेडिकल बोर्ड से जांच कराई जाए और सभी दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
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तहकीकात पुस्तक का विमोचन
| तहकीकात पुस्तक का विमोचन |
इंदौर/ युवा पत्रकार और मध्य प्रदेश में तहलका के वरिष्ठ संवाददाता शिरीष खरे की खोजी पत्रकारिता पर आधारित पहली पुस्तक ‘तहकीकात’ का विमोचन किया गया. इस दौरान देश के वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई, दूरदर्शन के महाप्रबंधक त्रिपुरारी शरण, जाने-माने न्यूज एंकर आषुतोष, एक्सचेंज फॉर मीडिया के संपादक अनुराग बत्रा, सकाल (मराठी) के सलाहकार संपादक विजय नायक, नई दुनिया के समूह संपादक श्रवण गर्ग, अजय उपाध्याय, सुरेश बाफना और सीमा मुस्तफा जैसी हस्तियां मौजूद थीं. ‘तहकीकात’ पुस्तक में मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई बड़े घोटालों के खुलासों से जुड़ी बातों पर प्रकाश डाला गया है. यह पुस्तक युवा पत्रकार की उन विशेष रिपोर्टों पर आधारित हैं जो उन्होंने बीते दो सालों के दौरान इन राज्यों में पत्रकारिता का काम करते हुए तैयार की हैं. इसमें खास तौर से इन राज्यों के राजनीतिक मूल्यों में आई गिरावट को प्रक्रियाओं के साथ समझने की कोशिश की गई है और उन्हें संदर्भों सहित रखा गया है.
गौरतलब है कि मीडिया के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी यह सभी हस्तियां इंदौर के होटल फॉरच्यून लेंड मार्क में इंदौर प्रेस क्लब और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में द्वारा आयोजित ‘पत्रकारिता की नई चुनौतियां’ में शामिल हुई थीं. इस दौरान उन्होंने खास तौर से युवा पत्रकारों के सामने आ रही चुनौतियों को लेकर अपने अनुभव और विचारों को भी लोगों के साथ साझा किया.
पुस्तक के बारे में :
''तहकीकात'' यह पुस्तक मुखौटों के पीछे का ऐसा सच है जिसमें रिपोर्ट दर रिपोर्ट कई बड़े घोटालों का खुलासा हुआ है. साथ ही भ्रष्ट व्यवस्था के ऊंचे सोपानों पर बैठे व्यक्तियों के
दोहरे चरित्र की पड़ताल भी की गई है. यह पुस्तक मुख्यतः उन विशेष रिपोर्टों पर आधारित है जो युवा पत्रकार ने बीते दो सालों में मध्य प्रदेश और राजस्थान रहते हुए लिखी थीं. अपने समय की तस्वीरें बताती हैं कि देश के विकसित होते इन राज्यों में आर्थिक घटनाक्रम किस तेजी से बदल रहा है. इसकी वजह से कैसे खास तौर पर राजनीतिक मूल्यों में किस हद तक गिरावट आई है. रिपोर्टिंग के पीछे मकसद था कि ऐसी स्थितियों की प्रक्रियाओं को जाना जाए और उन्हें संदर्भ के रुप में रखा जाए. दूसरे शब्दों में यह अपने समय का लघु दस्तावेज है. एक युवा पत्रकार के लिए इससे बड़ी खुशी की बात और क्या हो सकती है कि पत्रकारिता के पहले ही दौर में मैंने जो लिखा उसकी गूंज सियासी गलियारों से लेकर सदन तक हुई. इस मामले में मध्य प्रदेश के साथ ही राजस्थान के उन संस्कारों का धन्यवाद जहां असली शक्ल दिखाने के बावजूद आईना तोड़ने का चलन अभी पनपा नहीं है. उम्मीद है कि यह प्रयास अपने समय के मुद्दों को संदर्भ और विश्लेषण के साथ समझने में मदद करेगा.
लेखक के बारे में :
जनपक्षीय पत्रकारिता में बीते बारह सालों से सक्रिय. इस दौरान दिल्ली के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेष के गांवों को देखा-समझा. गरीबी, समाज के उत्पीडि़त वर्ग पर होने वाले अत्याचारों और सत्ता के ऊंचे पदों पर बैठे लोगों की अराजकता की वजह से आम आदमी पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को पत्रकारिता का विषय बनाया. 2002 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विष्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त की. प्रतिष्ठित लाडली मीडिया पुरस्कार और सेंट्रल स्टडी ऑफ डवल्पमेंट सोसाइटी, नई दिल्ली द्वारा मीडिया फेलोशिप सम्मान.
जन्मः 24 अक्टूबर, 1980
संप्रतिः वरिष्ठ संवाददाता, तहलका
स्थान: भोपाल, मध्य प्रदेश
मोबाईल: 08827190959
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Wednesday, October 2, 2013
’पत्रकार की जंग‘‘ फिल्म का निर्माण भोपाल में होगा
’’पत्रकार की जंग‘‘ फिल्म का निर्माण भोपाल में होगा
प्रतिवाद मिडीया हाऊस द्वारा राष्ट्रीय एकता एवं पत्रकारिता के उच्चतम मापदंड एवं भ्रष्टाचारों के विरूद्व छेड़ी जंग पर ‘‘पत्रकारिता की जंग’’ फिल्म का निर्माण 2 अक्टूबर महात्मा गांधी के जन्म दिवस से प्रारंभ किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय पत्रकार कलाकारों का चयन किया गया है । फिल्म की एक यूनिट, बम्बई में कार्यरत है।
फिल्म का निर्देषन मनीष सोनी करेंगे,जिन्होंने अनेक फिल्मों का निर्माण किया है फिल्म के निर्माण प्रमुख राजेन्द्र कष्यप,दीपक शर्मा एवं प्रतिवाद मीडिया हाऊस के बेनर तले फिल्म ‘‘पत्रकार की जंग’’ का निर्माण भोपाल एवं मध्यप्रदेष के अनेक स्थानों पर किया जायेगा।
राजेन्द्र कष्यप मोबाईल नंबर 9753041701 एम.आई.जी. 11/4 गीतांजली काम्पलेक्स पी एंड टी चैराहा भोपाल।
प्रतिवाद मिडीया हाऊस द्वारा राष्ट्रीय एकता एवं पत्रकारिता के उच्चतम मापदंड एवं भ्रष्टाचारों के विरूद्व छेड़ी जंग पर ‘‘पत्रकारिता की जंग’’ फिल्म का निर्माण 2 अक्टूबर महात्मा गांधी के जन्म दिवस से प्रारंभ किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय पत्रकार कलाकारों का चयन किया गया है । फिल्म की एक यूनिट, बम्बई में कार्यरत है।
फिल्म का निर्देषन मनीष सोनी करेंगे,जिन्होंने अनेक फिल्मों का निर्माण किया है फिल्म के निर्माण प्रमुख राजेन्द्र कष्यप,दीपक शर्मा एवं प्रतिवाद मीडिया हाऊस के बेनर तले फिल्म ‘‘पत्रकार की जंग’’ का निर्माण भोपाल एवं मध्यप्रदेष के अनेक स्थानों पर किया जायेगा।
राजेन्द्र कष्यप मोबाईल नंबर 9753041701 एम.आई.जी. 11/4 गीतांजली काम्पलेक्स पी एंड टी चैराहा भोपाल।
Saturday, September 28, 2013
मीडिया के सभी माध्यमों में 'वेब मीडिया' सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है
मीडिया के सभी माध्यमों में 'वेब मीडिया' सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि इसने पत्रकारिता का लोकतांत्रिकरण किया है। मुख्यधारा के मीडिया से लोग हताश और निराश हैं। सो, बड़े पैमाने पर लोग सोशल साइट्स, ब्लॉग और वेबसाइट के जरिए अपने विचार अभिव्यक्त कर रहे हैं। यहां वे स्वयं ही लेखक, संपादक और मालिक हैं। यह कम खर्चीला मीडिया माध्यम है। इसके लिए कागज की जरूरत नहीं, सो पर्यावरण के अनुकूल भी है। समय सीमा और भौगोलिक सीमा से मुक्त है। कोई समाचार अपलोड करते ही एक सेकेण्ड में पूरी दुनिया में फैल जाता है। कभी भी इसका अर्काइव देखा जा सकता है। अब लोग खबर के लिए समाचार-पत्र, रेडियो और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर निर्भर नहीं हैं। फेसबुक और वेबसाइट से लोग आसानी से समाचार पा रहे हैं। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में अन्य सभी मीडिया माध्यमों को वेबमाध्यम से कड़ी टक्कर मिल रही है। वहां के कई प्रमुख समाचार-पत्र बंद हो चुके हैं।
वेबमीडिया दिनोंदिन सशक्त हो रहा है और यह परिवर्तनकामी भूमिका भी निभा रहा है। समाजसेवी अन्ना हजारे की अगुआई में चले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में सोशल मीडिया ने प्रभावी भूमिका निभाई, यह हम सब जानते ही हैं। अब सभी राजनीतिक दल सोशल मीडिया पर विशेष प्रकोष्ठ भी बना रहे हैं।
उपरोक्त विशेषताएं होने के बाद भी वेबमीडिया की राह में कई चुनौतियां हैं। आर्थिक प्रारूप का अभाव। विज्ञापन के मामले में गूगल द्वारा भारतीय भाषाओं के साथ भेदभाव। असंसदीय भाषा का धड़ल्ले से प्रयोग। वेब मीडिया के लिए किसी आचारसंहिता का न होना। बिजली की दिक्कत, सो बहुसंख्यक आबादी तक इंटरनेट का ना पहुंच पाना।
यह सही है वेबमीडिया लगातार अपनी पहुंच व्यापक करता जा रहा है लेकिन उस पर विश्वसनीयता और प्रामाणिकता के प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं। इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहे हैं कि मीडिया और राजनीति के अलावे क्या समाज-जीवन के अन्य क्षेत्रों की चर्चा वेबमीडिया पर हो रही है? वेबमीडिया में साहित्य, कला, संस्कृ्ति, विज्ञान आदि का क्या परिदृश्य है?
उद्घाटन सत्र। अतिथियों - भारत सरकार के वरिष्ठ वैज्ञानिक मनोज पटेरिया, विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रो. प्रमोद वर्मा, वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा, वेबदुनिया के संपादक जयदीप कर्णिक, वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपाध्याय द्वारा दीप-प्रज्वलन से शुभारंभ। अपने वक्तव्य में प्रो. प्रमोद वर्मा ने इस तरह के कार्यक्रम को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत पर बल दिया। कार्यक्रम के आयोजक व स्पंदन संस्था से जुड़े अनिल सौमित्र ने संचालन करते हुए मीडिया चौपाल की भूमिका रखी और कहा कि यह सब प्रयास इसलिए हो रहा है ताकि वेब मीडिया के संचारकों की क्षमता में वृद्धि हो।
पहला सत्र। 'नया मीडिया, नई चुनौतियां।' मुख्य वक्ता वेबदुनिया के संपादक जयदीप कर्णिक ने कहा कि हम तथ्य की जांच किये बिना उसे जल्दबाजी में फेसबुक, ट्विटर और ब्लॉग पर अपलोड कर देते हैं, यह ठीक नहीं है। इसलिए सोशल मीडिया की प्रामाणिकता और विश्वसनीयता बनाये रखने पर जोर देना होगा। इस सत्र के दौरान वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपध्याय, पत्रकार अनुराग अन्वेषी, मुक्ता पाठक, पंकज कुमार झा, यशवंत सिंह, वर्तिका तोमर, संजीव कुमार सिन्हा, उमेश चतुर्वेदी आदि ने भी अपने विचार रखें। इस सत्र की अध्यक्षता मध्यप्रदेश एकता समिति के उपाध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा ने की एवं संचालन टीवी पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने किया।
दूसरा सत्र। 'विकास कार्य क्षेत्र और मीडिया अभिसरण (कन्वर्जेंस) की रूपरेखा।' इस सत्र में वरिष्ठ वैज्ञानिक और मध्यप्रदेश शासन के वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. प्रमोद के वर्मा ने प्रजेंटेशन के माध्यम से बताया कि किस तरह सोशल मीडिया समाज में वैज्ञानिक चेतना और जागरूकता लाने में मदद कर सकता है। मध्यप्रदेश एकता समिति के उपाध्यक्ष श्री रमेश शर्मा ने कहा कि भारत में विज्ञान की महान परम्परा रही है। भारत सरकार के वरिष्ठ वैज्ञानिक श्री मनोज पटेरिया भी उपस्थित थे। वरिष्ठ् पत्रकार श्रीमती स्मिता मिश्रा ने भी अपने विचार रखे।
तीसरा सत्र। 'आमजन में वैज्ञानिक दृष्टि का विकास और जन माध्यम।' मुख्य वक्ता वरिष्ठ वैज्ञानिक मनोज पटेरिया ने कहा कि वर्तमान में मीडिया में विज्ञान की खबरों को लेकर पर्याप्त कवरेज नहीं मिल पा रहा है। अगर हमें लोगों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना है तो विज्ञान की खबरों को भी महत्व देना होगा। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीके कुठियाला ने कहा कि भारत में हमेशा से विज्ञान प्रतिष्ठित रहा है। उन्होंने चेताते हुए कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के नाम पर पाश्चात्य देशों का अंधानुकरण न हो क्योंकि वहां तो और अंधविश्वास व्याप्त है।
चौपाल का दूसरा और अंतिम दिन।
चौथा सत्र। 'आपदा प्रबंधन और नया मीडिया।' मुख्य वक्ता विज्ञान प्रसार नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. सुबोध मोहंती ने कहा कि मुख्य धारा के मीडिया के सहयोगी के तौर पर नया मीडिया को देखना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि स्थायी विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) को आपदा के साथ जोड़ना होगा। सामान्य तौर पर हम आपदा की अनदेखी करते हैं। 'देखा जाएगा' यह प्रवृत्ति त्यागनी होगी। उन्होंने 33 तरह के आपदाओं पर प्रकाश डाला। इस सत्र में उत्तराखंड में आई विभीषिका के दौरान न्यू मीडिया के द्वारा किए गए कार्यों पर चर्चा की गई। इस सत्र का संचालन श्री पंकज झा (दीपकमल, रायपुर) ने किया।
पांचवां सत्र। ''जनमाध्यमों का अंतर्संबंध और नया मीडिया।'' मुख्या वक्ता भारतीय जनसंचार संस्थान के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो. हेमंत जोशी ने न्यू मीडिया के परिप्रेक्ष्य में 'जन माध्यमों का अंतर्संबंध' विषय पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने 'सोशल मीडिया' नामकरण पर यह कहकर आपत्ति उठाई कि 'एंटी सोशल मीडिया' भी होता है क्या? उन्होंने आगे कहा कि ठीक है कि एक आंदोलन फेसबुक और ट्विटर से सफल हुआ और यदि वह विफल हुआ तो क्या इसका जिम्मा फेसबुक व ट्विटर को नहीं जाना चाहिए?लेखिका एवं शोधार्थी कायनात काजी ने 'समय की मांग-साहित्य में विज्ञान का समावेश' विषय पर प्रेजेंटेशन दिया। इस सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुबोध माहंती ने की।
समापन सत्र। मुक्त चिंतन। मप्र शासन के वैज्ञानिक सलाहकार एवं परिषद के महानिदेशक प्रो. प्रमोद के वर्मा ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। इस सत्र में 'नया मीडिया की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता पर उठ रहे प्रश्नचिन्ह को देखते हुए क्या इस मीडिया में 'स्वनियमन' की आवश्यकता है', इस मुद्दे पर जमकर चर्चा हुई। इस सत्र का संचालन श्री अनिल पांडेय (द संडे इंडियन) ने किया एवं अध्यक्षता श्री उमेश चतुर्वेदी (टीवी पत्रकार एवं ब्लॉगर) ने की। विभिन्न सत्रों की कार्यवाहियों को मैपकोस्ट के वरिष्ठ वैज्ञानिक डीके पाण्डेय ने प्रस्तुत किया।
ये रहे उपस्थित : "मीडिया चौपाल-2013" में श्री हर्षवर्धन त्रिपाठी (टीवी पत्रकार और ब्लॉगर), श्री अनिल पाण्डेय (द संडे इंडियन), श्री यशवंत सिंह (भड़ासफॉरमीडिया डॉट कॉम), श्री संजीव सिन्हा (प्रवक्ता डॉट कॉम), श्री आशीष कुमार 'अंशु', श्री अनुराग अन्वेषी, श्री सिद्धार्थ झा, श्री पंकज साव, श्री उमेश चतुर्वेदी, श्री पंकज झा (दीपकमल, रायपुर), श्री शिराज केसर, सुश्री मीनाक्षी अरोड़ा (इंडिया वाटर पोर्टल), श्री चंद्रकांत जोशी (हिन्दी इन डॉट कॉम, मुम्बई), श्री लोकेन्द्र सिंह (ग्वालियर), श्री विकास दवे (कार्यकारी संपादक, देवपुत्र, इंदौर), श्री राजीव गुप्ता, सुश्री वर्तिका तोमर, ठाकुर गौतम कात्यायन (पटना), श्री अभिषेक रंजन, श्री अंकुर विजयवर्गीय (नई दिल्ली), श्री प्रवीण शुक्ला, श्री शिवानंद द्विवेदी 'सहर', श्री अवनीश सिंह (हिंदुस्थान समाचार), श्री आशुतोष झा, श्री विभय कुमार झा, श्री नीरज पाठक, श्री रामचंद्र झा, श्री प्रेम कुमार, श्री श्रवण कुमार शुक्ला, श्री राजेश रंजन...की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
भोपाल से मीडिया चौपाल में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के प्राध्यापक पुष्पेन्द्र पाल, संजय द्वेदी, डॉ. सौरभ मालवीय, मोनिका वर्मा, लाल बहादुर ओझा, सुरेन्द्र पाल, वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपाध्याय, द बिजनेस स्टैंडर्ड के मध्यप्रदेश प्रभारी शशिकांत त्रिवेदी, द वीक के दीपक तिवारी, श्री अमरजीत कुमार, वेब पत्रकार हर्ष सुहालका, जय शर्मा केतकी, स्तंभ लेखक गोपाल कृष्ण छिब्बर, मुक्ता पाठक, शैफाली पाण्डेय, वरिष्ठ पत्रकार सुचान्दना गुप्ता, हरिअग्र हरी, सरमन नगले उपस्थित रहे।
मीडिया चौपाल-2013 के समापन सत्र में उठी प्रमुख बातें –
• न्यू मीडिया के लेखकों को एकजुट रहने के लिए किसी सक्रिय मंच की सख्त आवश्यकता। एक टीम बननी चाहिए। पत्रकारों के दमन के खिलाफ आवाज उठनी चाहिए। - यशवंत सिंह, सीइओ, भड़ासफॉरमीडिया डॉट कॉम।
• वेबपत्रकारों को मान्यता मिले। - हर्षवर्धन त्रिपाठी, टीवी पत्रकार एवं ब्लॉगर।
• न्यू मीडिया के लिए जो भी संगठन बने उनका अन्य मीडिया संगठनों से समन्वय हो। - स्मिता मिश्र, स्तंभ लेखिका।
• संगठन को सशक्त करने के लिए सदस्यता राशि - 1000 रुपए रखी जाय- संदीप।
• मीडिया चौपाल के लिए एक वेबसाइट की जरूरत। कानूनी जागरूकता की आवश्यकता। - दामोदर।
• मीडिया चौपाल का सांस्थानिक स्वूरूप ठीक नहीं। जब भी संगठन बनने की बात होने लगती है तो मुझे डर लगने लगता है। - आशीष कुमार 'अंशु', ब्लॉंगर।
• सांस्थानिक स्वरूप समय की मांग है। - अनुराग अन्वेषी, वरिष्ठ पत्रकार।
• खूब चर्चा करें, फिर इसे अगली बार साकार करें। - हेमंत जोशी, प्रोफेसर, आईआईएमसी।
• मीडिया चौपाल को संस्थागत स्वरूप दें लेकिन उसकी प्रवृत्ति चौपाल की ही हो।–प्रो. बीके कुठियाला, कुलपति, माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय
• आर्थिक प्रारूप कैसे विकसित हो, इस पर जोर दें। सहज विज्ञापन मिले, इस हेतु सरकार तक जाकर अपनी बात रखनी चाहिए। छत्तीसगढ़ से शुरूआत करें, मैं पहल के तैयार हूं। - पंकज झा, स्तंभ लेखक
• भारतीय भाषाओं के साथ गूगल का भेदभाव, पीआईबी में वेबपत्रकारों के लिए मान्यता, डीएवीपी में विज्ञापन के लिए जो शर्तें हैं, उस पर पुनर्विचार, वेबपत्रकारों को सरकारी मान्यता, इस सब विषयों पर हमारा कोई प्रतिनिधिमंडल संबंधित संस्था के पास जाकर अपनी बात रखें। - संजीव कुमार सिन्हा, संपादक, प्रवक्ता डॉट कॉम
• वेबमीडिया के लिए स्वनियमन की बात ठीक नहीं है। - उमेश चतुर्वेदी, टीवी पत्रकार एवं ब्लॉगर
(प्रस्तुति : संजीव कुमार सिन्हा)
Sunday, September 22, 2013
वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन भोपाल की आवष्यक बैठक 27 सितम्बर को पत्रकार भवन में होगी।
वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन भोवर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन भोपाल की आवष्यक बैठक 27 सितम्बर को पत्रकार भवन में होगी।
भोपाल। वर्कि्रग जर्नलिस्ट यूनियन भोपाल की आवष्यक बैठक दिनांक 27 सितबंर को पत्रकार भवन में दोपहर 12.00 बजे होगी । आमंत्रित सदस्यों को ठीक समय पर उपस्थित होने का आग्रह है।
स्थानः- पत्रकार भवन राजेन्द्र सिंह कष्यप
दिनांकः-27/09/2013 आयोजक
समयः-दोपहर 12.00 बजे संभागीय अध्यक्ष वर्किग जर्नलिस्ट यूनियन भोपाल
मो.न. 9753041701पाल की आवष्यक बैठक 27 सितम्बर को पत्रकार भवन में होगी।
भोपाल। वर्कि्रग जर्नलिस्ट यूनियन भोपाल की आवष्यक बैठक दिनांक 27 सितबंर को पत्रकार भवन में दोपहर 12.00 बजे होगी । आमंत्रित सदस्यों को ठीक समय पर उपस्थित होने का आग्रह है।
स्थानः- पत्रकार भवन राजेन्द्र सिंह कष्यप
दिनांकः-27/09/2013 आयोजक
समयः-दोपहर 12.00 बजे संभागीय अध्यक्ष वर्किग जर्नलिस्ट यूनियन भोपाल
मो.न. 9753041701पाल की आवष्यक बैठक 27 सितम्बर को पत्रकार भवन में होगी।
Thursday, August 1, 2013
इ गर्वनस शब्द शासकीय भाषा में केन्द्र एवं राज्यों शासनों में प्रचलित हैं लेकिन मध्यप्रदेश जन संपर्क ने नया शब्द इजाद कर लिया है- ए
अबतक इ गर्वनस शब्द शासकीय भाषा में केन्द्र एवं राज्यों शासनों में प्रचलित हैं लेकिन मध्यप्रदेश जन संपर्क ने नया शब्द इजाद कर लिया है- एम गर्वनेस जिसके अन्र्तगत जनसम्पर्क विभाग के अपर सचिव एवं अपर संचालक जो पिछले एक दशक से ज्यादा समय से विज्ञापन शाखा को देख रहे है। और इसके माध्यम में अपने नित्य सखा अथवा साझेदार को लाभ पहुँचाने में कोई कसर नही छोड़ते है।
पिछले वित्तीय वर्ष में मुख्यमंत्री के मोबाईल संदेश के नाम पर १५ लाख रूपये और इस वित्तीय वर्ष में ६ लाख रूपये एम गर्वनेस के नाम पर सामाजिक न्याय विभाग से नशा मुक्ति मोबाईल संदेश के नाम पर वेबसाइट mppost.com को भुगतान किया गया हैं। विभाग की तरफ से पत्र लिखकर राशि का आवन्टन मंगवाया जाना भी एक विचारनीय और जाँच का मुद्दा हैं, मध्यप्रदेश में भाजपा चुनाव में हारती हैं तो ठिकरा लाजपत अहुजा के नाम फूटना तय हैं परन्तु वह तब वो करोड़ो की हेरा-फेरी कर चुका होगा और सेवानिवृत्त हो जाएगा ।
हम यहॉ स्पष्ट करना चाहेंगे कि भाजपा नेता सुश्री उमा भारती के खिलाफ श्री दिग्विजय सिंह ने मानहानि का मामला दायर किया था तब mppost.com के कर्ताधर्ता सरमन नगेले उनके गवाह थे। इन्हे जब भी मौका मिलता है आहुजा उपक्रत करने का अवसर चुकते नही है फलाँ संघियों की जमात को कौन समझाऐं कि विभीषण और रावण दोनों उनके यहॉ विघमान है।
Saturday, July 27, 2013
Thursday, July 25, 2013
Sunday, July 21, 2013
news
श्री के0 विक्रम राव जी,
अध्यक्ष फेडरेषन आॅफ इंडियन जर्नलिस्ट,यूनियन
नई दिल्ली ।
विषयः- मध्यप्रदेष केें संगठन में एकता हेतु।
मध्यप्रदेष में गत 14 वर्षें से एकाधिकार,मनमानी,संघ के नाम पर व्यक्तिगत स्वार्थ प्रतिपूर्ति एवं पद पर रह कर संगठन के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने से संघ में फूट बढ़ती जा रही है, और प्रदेष में संगठन को गैर पत्रकार,अस्तित्वहीन कहने से नहीं चूक रहे है।
अक्टूबर 19,20,21 को भोपाल में आयोजित अखिल भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ में का 14 वां अधिवेषन भोपाल में हुआ था जिसके भोपाल श्रमजीवी पत्रकार संघ (संगठित)ने अपने (बायलाज) विधान में लिखित रूप में, आई एफ डब्लू जे से हमेषा जुड़े रहने का संकल्प दोहराया था, जिसमें विंध्य क्षत्रिय श्रमजीवी प.कार संघ रीवा सुुुुषील दीक्षित महाकौषल श्रेत्रिय श्रमजीवी पत्रकार संघ भगवती प्रसाद बाजपेयी, दण्डकारण्य क्षेत्रिय श्रमजीवी पत्रकार संघ के0वासु0ग्वालियर ,चंबंल संभागीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष दिनकर वी0 लेलेख् के साथ धन्नाला षाह प्रेम श्रीवास्तवख् एल0एस0 हरदेनिया सहित सैकड़ो पत्रकारों ने ,आई एफ डब्लू जे से जुड़े रहने का प्रस्ताव पारित किया था और पत्रकार भवन को इसी संगठन से हमेशा जुड़े रखने के लिये एक समिति बनाने का निर्णय लिया गया था। इसी भावना के अनुरूप पत्रकार भवन समिति का विधान बनाया गया जिसमें आई एफ डब्ल्यू जे के राष्ट्रीय पदाधिकारियों राष्ट्रीय पार्षदों,प्रतिनिधियों से भी विचार एवं सुझाव लिये गये थें।
इसके पूर्व वर्ष 1967 में मध्यप्रदेष श्रमजीवी पत्रकार संघ का भोपाल में अधिवेषन हुआ था। उसमें भी पत्रकार भवन समिति के निमार्ण का प्रस्ताव पास हुआ था। इस समय भोपाल सहित प्रदेश के संगठन को मजबूत बनाने के लिये शीघ्र ही कोई संयोजक/एडहाक कमेटी बना दी जाये जो कि भोपाल में या इंदौर के आई एफ डब्लू जे का राष्ट्रीय सम्मेलन शीघ्र ही कराये जाने की आवश्यकता है,जोकि वर्ष 2013 के अक्टूबर माह में भी कराया जा सकता है।
1 पत्रकार भवन समिति के चुनाव से पूर्व भोपाल श्रमजीवी पत्रकार संघ की सदस्यता में केवल आई एफ डब्लू जे के प्रति निष्ठावान सदस्य ही रखा जाये उन्य संगठनों से जुड़ेे पत्रकारों को सदस्यता न दी जाये।
2 व्यक्तिगत हित साधने हेतु शासन से विज्ञापन, सुविधाये लेने और जिसकी पत्रकार जगत में छबि स्वच्छ न हो उनको कमेटी में न लिया जाये। समाचार पत्र के मालिकों को पदाधिकारी न बनाया जाये।
3 पूरे प्रदेश में संगठन को आगामी समय में मजबूत बनाने हेतु संभागीय/जिला/तहसीलस्तर पर पर्यवेक्षक नियुक्त कराया जाये ।
4 भोपाल के पत्रकार भवन संघ के कब्जे में रखने के लिये जरूरी है कि भोपाल के सभी पत्रकारों को जो संघ के प्रति वफादार हैं, उनको महत्व दिया जावे
5 पूर्व पदाधिकारियों को भी भोपाल श्रमजीवी पत्रकार संघ का निर्वाचित अध्यक्ष/महामंत्री जो स्वयं ही पत्रकार समिति की कार्यकारणी समिति के सदस्य बन जाते हैंै। अत‘ भोपाल के संघ के चुनाव क ेसमय आपके द्वारा मनोनीत पयवेक्षक की उपस्थिति में चुनाव किये जायें।
6 वर्तमान चुनाव रमेश तिवारी अध्यक्ष गलत ढ़ंग से मात्र चालीस मिनट में छ‘ लोगोें की उपस्थिति में कर लिये गये जो पूरी तरह से गलत हैं।
7 इस चूनाव के बाद भोपाल के पत्रकारों में फुट वढ़ गई उन्होनें पत्रकार भवन जाना छोड़ दिया।
8 इस बार फरवरी में पत्रकार भवन समिति के चुनाव में आप द्वारा भेजी गई सूची पर ही चुनाव होंगें तभी पत्रकार भवन पर पूर्ण कब्जा हो पायेगा।
9 जो पत्रकार (विजय तिवारी लखनउ/भोपाल) जो फेसबुक पर केंिद्रय नेतृत्व को बदनाम करते हैंे उनके साथी पत्रकारों को संघ का सदस्य न बनाया जाय। भोपाल में संगठन के पूर्व पदाधिकारियों ने संगठन के बारे में यह प्रचार करा रहा है कि अध्यक्ष/आयोजक वही बनता है जो एक लाख का गुप्तदान देता है। मैं इसका लगातार खंडन करता रहा हूं।
10 पूरे देश में सबसे ज्यादा विवाद केवल मध्यप्रदेश मे है,क्योंकि करोडों की संपत्ति का पत्रकार भवन पर इस बार यदि पूर्ण कब्जा हो गया तो फिर कभी भी यह हमारे हाथ में नहीं आ पायेगा अभी थोड़ी उम्मीद है कियदि संगठन मजबूत हो गया तो पत्रकार भवन संगठन के हाथ रहेगा। अभी तक 80 लाख रूपये पत्रकार भवन समिति के खाते में जमा है।, जो अभी तक हम उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
कृपया निवेदन है कि उचित निर्णय लेकर आदेश दें क्योंकविरोधी संगठन षड़यंत्र में लगा है।
दिनांक 21/07/2013
आपका
राजेन्द्र कश्यप
पूर्व अध्यक्ष
भोपाल श्रमजीवी पत्रकार संघ
भोपाल इकाई
अध्यक्ष फेडरेषन आॅफ इंडियन जर्नलिस्ट,यूनियन
नई दिल्ली ।
विषयः- मध्यप्रदेष केें संगठन में एकता हेतु।
मध्यप्रदेष में गत 14 वर्षें से एकाधिकार,मनमानी,संघ के नाम पर व्यक्तिगत स्वार्थ प्रतिपूर्ति एवं पद पर रह कर संगठन के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने से संघ में फूट बढ़ती जा रही है, और प्रदेष में संगठन को गैर पत्रकार,अस्तित्वहीन कहने से नहीं चूक रहे है।
अक्टूबर 19,20,21 को भोपाल में आयोजित अखिल भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ में का 14 वां अधिवेषन भोपाल में हुआ था जिसके भोपाल श्रमजीवी पत्रकार संघ (संगठित)ने अपने (बायलाज) विधान में लिखित रूप में, आई एफ डब्लू जे से हमेषा जुड़े रहने का संकल्प दोहराया था, जिसमें विंध्य क्षत्रिय श्रमजीवी प.कार संघ रीवा सुुुुषील दीक्षित महाकौषल श्रेत्रिय श्रमजीवी पत्रकार संघ भगवती प्रसाद बाजपेयी, दण्डकारण्य क्षेत्रिय श्रमजीवी पत्रकार संघ के0वासु0ग्वालियर ,चंबंल संभागीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष दिनकर वी0 लेलेख् के साथ धन्नाला षाह प्रेम श्रीवास्तवख् एल0एस0 हरदेनिया सहित सैकड़ो पत्रकारों ने ,आई एफ डब्लू जे से जुड़े रहने का प्रस्ताव पारित किया था और पत्रकार भवन को इसी संगठन से हमेशा जुड़े रखने के लिये एक समिति बनाने का निर्णय लिया गया था। इसी भावना के अनुरूप पत्रकार भवन समिति का विधान बनाया गया जिसमें आई एफ डब्ल्यू जे के राष्ट्रीय पदाधिकारियों राष्ट्रीय पार्षदों,प्रतिनिधियों से भी विचार एवं सुझाव लिये गये थें।
इसके पूर्व वर्ष 1967 में मध्यप्रदेष श्रमजीवी पत्रकार संघ का भोपाल में अधिवेषन हुआ था। उसमें भी पत्रकार भवन समिति के निमार्ण का प्रस्ताव पास हुआ था। इस समय भोपाल सहित प्रदेश के संगठन को मजबूत बनाने के लिये शीघ्र ही कोई संयोजक/एडहाक कमेटी बना दी जाये जो कि भोपाल में या इंदौर के आई एफ डब्लू जे का राष्ट्रीय सम्मेलन शीघ्र ही कराये जाने की आवश्यकता है,जोकि वर्ष 2013 के अक्टूबर माह में भी कराया जा सकता है।
1 पत्रकार भवन समिति के चुनाव से पूर्व भोपाल श्रमजीवी पत्रकार संघ की सदस्यता में केवल आई एफ डब्लू जे के प्रति निष्ठावान सदस्य ही रखा जाये उन्य संगठनों से जुड़ेे पत्रकारों को सदस्यता न दी जाये।
2 व्यक्तिगत हित साधने हेतु शासन से विज्ञापन, सुविधाये लेने और जिसकी पत्रकार जगत में छबि स्वच्छ न हो उनको कमेटी में न लिया जाये। समाचार पत्र के मालिकों को पदाधिकारी न बनाया जाये।
3 पूरे प्रदेश में संगठन को आगामी समय में मजबूत बनाने हेतु संभागीय/जिला/तहसीलस्तर पर पर्यवेक्षक नियुक्त कराया जाये ।
4 भोपाल के पत्रकार भवन संघ के कब्जे में रखने के लिये जरूरी है कि भोपाल के सभी पत्रकारों को जो संघ के प्रति वफादार हैं, उनको महत्व दिया जावे
5 पूर्व पदाधिकारियों को भी भोपाल श्रमजीवी पत्रकार संघ का निर्वाचित अध्यक्ष/महामंत्री जो स्वयं ही पत्रकार समिति की कार्यकारणी समिति के सदस्य बन जाते हैंै। अत‘ भोपाल के संघ के चुनाव क ेसमय आपके द्वारा मनोनीत पयवेक्षक की उपस्थिति में चुनाव किये जायें।
6 वर्तमान चुनाव रमेश तिवारी अध्यक्ष गलत ढ़ंग से मात्र चालीस मिनट में छ‘ लोगोें की उपस्थिति में कर लिये गये जो पूरी तरह से गलत हैं।
7 इस चूनाव के बाद भोपाल के पत्रकारों में फुट वढ़ गई उन्होनें पत्रकार भवन जाना छोड़ दिया।
8 इस बार फरवरी में पत्रकार भवन समिति के चुनाव में आप द्वारा भेजी गई सूची पर ही चुनाव होंगें तभी पत्रकार भवन पर पूर्ण कब्जा हो पायेगा।
9 जो पत्रकार (विजय तिवारी लखनउ/भोपाल) जो फेसबुक पर केंिद्रय नेतृत्व को बदनाम करते हैंे उनके साथी पत्रकारों को संघ का सदस्य न बनाया जाय। भोपाल में संगठन के पूर्व पदाधिकारियों ने संगठन के बारे में यह प्रचार करा रहा है कि अध्यक्ष/आयोजक वही बनता है जो एक लाख का गुप्तदान देता है। मैं इसका लगातार खंडन करता रहा हूं।
10 पूरे देश में सबसे ज्यादा विवाद केवल मध्यप्रदेश मे है,क्योंकि करोडों की संपत्ति का पत्रकार भवन पर इस बार यदि पूर्ण कब्जा हो गया तो फिर कभी भी यह हमारे हाथ में नहीं आ पायेगा अभी थोड़ी उम्मीद है कियदि संगठन मजबूत हो गया तो पत्रकार भवन संगठन के हाथ रहेगा। अभी तक 80 लाख रूपये पत्रकार भवन समिति के खाते में जमा है।, जो अभी तक हम उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
कृपया निवेदन है कि उचित निर्णय लेकर आदेश दें क्योंकविरोधी संगठन षड़यंत्र में लगा है।
दिनांक 21/07/2013
आपका
राजेन्द्र कश्यप
पूर्व अध्यक्ष
भोपाल श्रमजीवी पत्रकार संघ
भोपाल इकाई
news
प्रति,
श्री के0 विक्रम राव जी,
अध्यक्ष फेडरेषन आॅफ इंडियन जर्नलिस्ट,यूनियन
नई दिल्ली ।
विषयः- मध्यप्रदेष केें संगठन में एकता हेतु।
मध्यप्रदेष में गत 14 वर्षें से एकाधिकार,मनमानी,संघ के नाम पर व्यक्तिगत स्वार्थ प्रतिपूर्ति एवं पद पर रह कर संगठन के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने से संघ में फूट बढ़ती जा रही है, और प्रदेष में संगठन को गैर पत्रकार,अस्तित्वहीन कहने से नहीं चूक रहे है।
अक्टूबर 19,20,21 को भोपाल में आयोजित अखिल भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ में का 14 वां अधिवेषन भोपाल में हुआ था जिसके भोपाल श्रमजीवी पत्रकार संघ (संगठित)ने अपने (बायलाज) विधान में लिखित रूप में, आई एफ डब्लू जे से हमेषा जुड़े रहने का संकल्प दोहराया था, जिसमें विंध्य क्षत्रिय श्रमजीवी प.कार संघ रीवा सुुुुषील दीक्षित महाकौषल श्रेत्रिय श्रमजीवी पत्रकार संघ भगवती प्रसाद बाजपेयी, दण्डकारण्य क्षेत्रिय श्रमजीवी पत्रकार संघ के0वासु0ग्वालियर ,चंबंल संभागीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष दिनकर वी0 लेलेख् के साथ धन्नाला षाह प्रेम श्रीवास्तवख् एल0एस0 हरदेनिया सहित सैकड़ो पत्रकारों ने ,आई एफ डब्लू जे से जुड़े रहने का प्रस्ताव पारित किया था और पत्रकार भवन को इसी संगठन से हमेशा जुड़े रखने के लिये एक समिति बनाने का निर्णय लिया गया था। इसी भावना के अनुरूप पत्रकार भवन समिति का विधान बनाया गया जिसमें आई एफ डब्ल्यू जे के राष्ट्रीय पदाधिकारियों राष्ट्रीय पार्षदों,प्रतिनिधियों से भी विचार एवं सुझाव लिये गये थें।
इसके पूर्व वर्ष 1967 में मध्यप्रदेष श्रमजीवी पत्रकार संघ का भोपाल में अधिवेषन हुआ था। उसमें भी पत्रकार भवन समिति के निमार्ण का प्रस्ताव पास हुआ था। इस समय भोपाल सहित प्रदेश के संगठन को मजबूत बनाने के लिये शीघ्र ही कोई संयोजक/एडहाक कमेटी बना दी जाये जो कि भोपाल में या इंदौर के आई एफ डब्लू जे का राष्ट्रीय सम्मेलन शीघ्र ही कराये जाने की आवश्यकता है,जोकि वर्ष 2013 के अक्टूबर माह में भी कराया जा सकता है।
1 पत्रकार भवन समिति के चुनाव से पूर्व भोपाल श्रमजीवी पत्रकार संघ की सदस्यता में केवल आई एफ डब्लू जे के प्रति निष्ठावान सदस्य ही रखा जाये उन्य संगठनों से जुड़ेे पत्रकारों को सदस्यता न दी जाये।
2 व्यक्तिगत हित साधने हेतु शासन से विज्ञापन, सुविधाये लेने और जिसकी पत्रकार जगत में छबि स्वच्छ न हो उनको कमेटी में न लिया जाये। समाचार पत्र के मालिकों को पदाधिकारी न बनाया जाये।
3 पूरे प्रदेश में संगठन को आगामी समय में मजबूत बनाने हेतु संभागीय/जिला/तहसीलस्तर पर पर्यवेक्षक नियुक्त कराया जाये ।
4 भोपाल के पत्रकार भवन संघ के कब्जे में रखने के लिये जरूरी है कि भोपाल के सभी पत्रकारों को जो संघ के प्रति वफादार हैं, उनको महत्व दिया जावे
5 पूर्व पदाधिकारियों को भी भोपाल श्रमजीवी पत्रकार संघ का निर्वाचित अध्यक्ष/महामंत्री जो स्वयं ही पत्रकार समिति की कार्यकारणी समिति के सदस्य बन जाते हैंै। अत‘ भोपाल के संघ के चुनाव क ेसमय आपके द्वारा मनोनीत पयवेक्षक की उपस्थिति में चुनाव किये जायें।
6 वर्तमान चुनाव रमेश तिवारी अध्यक्ष गलत ढ़ंग से मात्र चालीस मिनट में छ‘ लोगोें की उपस्थिति में कर लिये गये जो पूरी तरह से गलत हैं।
7 इस चूनाव के बाद भोपाल के पत्रकारों में फुट वढ़ गई उन्होनें पत्रकार भवन जाना छोड़ दिया।
8 इस बार फरवरी में पत्रकार भवन समिति के चुनाव में आप द्वारा भेजी गई सूची पर ही चुनाव होंगें तभी पत्रकार भवन पर पूर्ण कब्जा हो पायेगा।
9 जो पत्रकार (विजय तिवारी लखनउ/भोपाल) जो फेसबुक पर केंिद्रय नेतृत्व को बदनाम करते हैंे उनके साथी पत्रकारों को संघ का सदस्य न बनाया जाय। भोपाल में संगठन के पूर्व पदाधिकारियों ने संगठन के बारे में यह प्रचार करा रहा है कि अध्यक्ष/आयोजक वही बनता है जो एक लाख का गुप्तदान देता है। मैं इसका लगातार खंडन करता रहा हूं।
10 पूरे देश में सबसे ज्यादा विवाद केवल मध्यप्रदेश मे है,क्योंकि करोडों की संपत्ति का पत्रकार भवन पर इस बार यदि पूर्ण कब्जा हो गया तो फिर कभी भी यह हमारे हाथ में नहीं आ पायेगा अभी थोड़ी उम्मीद है कियदि संगठन मजबूत हो गया तो पत्रकार भवन संगठन के हाथ रहेगा। अभी तक 80 लाख रूपये पत्रकार भवन समिति के खाते में जमा है।, जो अभी तक हम उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
कृपया निवेदन है कि उचित निर्णय लेकर आदेश दें क्योंकविरोधी संगठन षड़यंत्र में लगा है।
दिनांक 21/07/2013
आपका
राजेन्द्र कश्यप
पूर्व अध्यक्ष
भोपाल श्रमजीवी पत्रकार संघ
भोपाल इकाई
श्री के0 विक्रम राव जी,
अध्यक्ष फेडरेषन आॅफ इंडियन जर्नलिस्ट,यूनियन
नई दिल्ली ।
विषयः- मध्यप्रदेष केें संगठन में एकता हेतु।
मध्यप्रदेष में गत 14 वर्षें से एकाधिकार,मनमानी,संघ के नाम पर व्यक्तिगत स्वार्थ प्रतिपूर्ति एवं पद पर रह कर संगठन के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने से संघ में फूट बढ़ती जा रही है, और प्रदेष में संगठन को गैर पत्रकार,अस्तित्वहीन कहने से नहीं चूक रहे है।
अक्टूबर 19,20,21 को भोपाल में आयोजित अखिल भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ में का 14 वां अधिवेषन भोपाल में हुआ था जिसके भोपाल श्रमजीवी पत्रकार संघ (संगठित)ने अपने (बायलाज) विधान में लिखित रूप में, आई एफ डब्लू जे से हमेषा जुड़े रहने का संकल्प दोहराया था, जिसमें विंध्य क्षत्रिय श्रमजीवी प.कार संघ रीवा सुुुुषील दीक्षित महाकौषल श्रेत्रिय श्रमजीवी पत्रकार संघ भगवती प्रसाद बाजपेयी, दण्डकारण्य क्षेत्रिय श्रमजीवी पत्रकार संघ के0वासु0ग्वालियर ,चंबंल संभागीय श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष दिनकर वी0 लेलेख् के साथ धन्नाला षाह प्रेम श्रीवास्तवख् एल0एस0 हरदेनिया सहित सैकड़ो पत्रकारों ने ,आई एफ डब्लू जे से जुड़े रहने का प्रस्ताव पारित किया था और पत्रकार भवन को इसी संगठन से हमेशा जुड़े रखने के लिये एक समिति बनाने का निर्णय लिया गया था। इसी भावना के अनुरूप पत्रकार भवन समिति का विधान बनाया गया जिसमें आई एफ डब्ल्यू जे के राष्ट्रीय पदाधिकारियों राष्ट्रीय पार्षदों,प्रतिनिधियों से भी विचार एवं सुझाव लिये गये थें।
इसके पूर्व वर्ष 1967 में मध्यप्रदेष श्रमजीवी पत्रकार संघ का भोपाल में अधिवेषन हुआ था। उसमें भी पत्रकार भवन समिति के निमार्ण का प्रस्ताव पास हुआ था। इस समय भोपाल सहित प्रदेश के संगठन को मजबूत बनाने के लिये शीघ्र ही कोई संयोजक/एडहाक कमेटी बना दी जाये जो कि भोपाल में या इंदौर के आई एफ डब्लू जे का राष्ट्रीय सम्मेलन शीघ्र ही कराये जाने की आवश्यकता है,जोकि वर्ष 2013 के अक्टूबर माह में भी कराया जा सकता है।
1 पत्रकार भवन समिति के चुनाव से पूर्व भोपाल श्रमजीवी पत्रकार संघ की सदस्यता में केवल आई एफ डब्लू जे के प्रति निष्ठावान सदस्य ही रखा जाये उन्य संगठनों से जुड़ेे पत्रकारों को सदस्यता न दी जाये।
2 व्यक्तिगत हित साधने हेतु शासन से विज्ञापन, सुविधाये लेने और जिसकी पत्रकार जगत में छबि स्वच्छ न हो उनको कमेटी में न लिया जाये। समाचार पत्र के मालिकों को पदाधिकारी न बनाया जाये।
3 पूरे प्रदेश में संगठन को आगामी समय में मजबूत बनाने हेतु संभागीय/जिला/तहसीलस्तर पर पर्यवेक्षक नियुक्त कराया जाये ।
4 भोपाल के पत्रकार भवन संघ के कब्जे में रखने के लिये जरूरी है कि भोपाल के सभी पत्रकारों को जो संघ के प्रति वफादार हैं, उनको महत्व दिया जावे
5 पूर्व पदाधिकारियों को भी भोपाल श्रमजीवी पत्रकार संघ का निर्वाचित अध्यक्ष/महामंत्री जो स्वयं ही पत्रकार समिति की कार्यकारणी समिति के सदस्य बन जाते हैंै। अत‘ भोपाल के संघ के चुनाव क ेसमय आपके द्वारा मनोनीत पयवेक्षक की उपस्थिति में चुनाव किये जायें।
6 वर्तमान चुनाव रमेश तिवारी अध्यक्ष गलत ढ़ंग से मात्र चालीस मिनट में छ‘ लोगोें की उपस्थिति में कर लिये गये जो पूरी तरह से गलत हैं।
7 इस चूनाव के बाद भोपाल के पत्रकारों में फुट वढ़ गई उन्होनें पत्रकार भवन जाना छोड़ दिया।
8 इस बार फरवरी में पत्रकार भवन समिति के चुनाव में आप द्वारा भेजी गई सूची पर ही चुनाव होंगें तभी पत्रकार भवन पर पूर्ण कब्जा हो पायेगा।
9 जो पत्रकार (विजय तिवारी लखनउ/भोपाल) जो फेसबुक पर केंिद्रय नेतृत्व को बदनाम करते हैंे उनके साथी पत्रकारों को संघ का सदस्य न बनाया जाय। भोपाल में संगठन के पूर्व पदाधिकारियों ने संगठन के बारे में यह प्रचार करा रहा है कि अध्यक्ष/आयोजक वही बनता है जो एक लाख का गुप्तदान देता है। मैं इसका लगातार खंडन करता रहा हूं।
10 पूरे देश में सबसे ज्यादा विवाद केवल मध्यप्रदेश मे है,क्योंकि करोडों की संपत्ति का पत्रकार भवन पर इस बार यदि पूर्ण कब्जा हो गया तो फिर कभी भी यह हमारे हाथ में नहीं आ पायेगा अभी थोड़ी उम्मीद है कियदि संगठन मजबूत हो गया तो पत्रकार भवन संगठन के हाथ रहेगा। अभी तक 80 लाख रूपये पत्रकार भवन समिति के खाते में जमा है।, जो अभी तक हम उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
कृपया निवेदन है कि उचित निर्णय लेकर आदेश दें क्योंकविरोधी संगठन षड़यंत्र में लगा है।
दिनांक 21/07/2013
आपका
राजेन्द्र कश्यप
पूर्व अध्यक्ष
भोपाल श्रमजीवी पत्रकार संघ
भोपाल इकाई
Wednesday, July 10, 2013
राघवजी की जमानत याचिका पर सुनवाई
भोपाल : मध्य प्रदेश में नौकर से अप्राकृतिक कृत्य के मामले में 22 जुलाई तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेजे गए पूर्व वित्तमंत्री राघवजी की जमानत याचिका पर सुनवाई गुरुवार 11 जुलाई को होगी।
घरेलू नौकर राजकुमार दांगी से अप्राकृतिक कृत्य करने के आरोप में राघवजी को पहले मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और फिर भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया गया। मंगलवार को राघवजी को पुलिस ने गिरफ्तार किया और मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में पेश किया जहां से उन्हें 22 जुलाई तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
घरेलू नौकर राजकुमार दांगी से अप्राकृतिक कृत्य करने के आरोप में राघवजी को पहले मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और फिर भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया गया। मंगलवार को राघवजी को पुलिस ने गिरफ्तार किया और मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में पेश किया जहां से उन्हें 22 जुलाई तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पॉलिसियों की गड़बड़ी के सिलसिले में सीबीआई के छापे
भोपाल 10 जुलाई 2013। एलआईसी की पॉलिसियों की गड़बड़ी के सिलसिले में सीबीआई ने इंदौर में बीमा कंपनी के कर्मचारियों के ठिकानों पर एक साथ छापे मारे।
भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की पॉलिसियों की प्रीमियम राशि की गड़बड़ी के सिलसिले में सीबीआई ने इंदौर और ग्वालियर में सार्वजनिक क्षेत्र की इस बीमा कंपनी के कर्मचारियों और एजेंटों के ठिकानों पर मंगलवार को एक साथ छापे मारे।
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि इंदौर में आठ और ग्वालियर में एक स्थान पर एलआईसी के कर्मचारियों और एजेंटों के ठिकानों पर छापामार मुहिम शुरू की गयी।
खबर लिखे जाने तक सीबीआई छापे जारी थे और इस सिलसिले में विस्तृत विवरण नहीं मिल सका था।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई में थके नहीं लोग: अन्ना
भोपाल 10 जुलाई 2013। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने लोगों से भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिये लगातार कार्य करते रहने और न थकने की सलाह दी है।
हजारे ने मंगलवार को ‘जनतंत्र यात्रा’ के दौरान संवाददाताओं से कहा कि हम जो करते हैं उसमें सफलता नहीं मिलती और मन में थकावट आ जाती है। लेकिन लोग इस थकावट को न आने दें और अपना कर्तव्य करते जायें, सफलता जरुर मिलेगी।
हजारे ने कहा कि जब महाराष्ट्र में हमने आंदोलन शुरु किया था तो कई रुकावटें सामने आई और सत्ता पक्ष की ओर से हमे दबाने का काम किया गया।
लेकिन हम अपना कर्तव्य करते गये, जिसका परिणाम है कि महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2002 में सूचना का अधिकार लागू किया और इसका अनुसरण करते हुए केन्द्र ने इसे पूरे देश में लागू कर दिया।
उन्होंने युवा पीढ़ी के लिए संदेश दिया कि युवा शक्ति जाग जाये तो देश में नये समाज और राजनीति का उदय होगा. इसके लिए वे कई सालों से प्रयास कर रहे हैं।
हजारे ने प्रश्नों के उत्तर में कहा कि गांधी जी ने कहा था कि जब तक गांव नहीं बदलेगा, तब तक देश नहीं बदलेगा। हमें गांव के विकास को प्राथमिकता देना है, जिस गांव में मैंने जन्म लिया वहीं से इसकी शुरुआत की है।
संसद व विधानसभा में जाने वाले नेताओं व भ्रष्टाचार को लेकर अन्ना हजारे ने कहा कि हर परिवार संस्कार का केन्द्र होता है, अच्छे संस्कार होंगे तो बदलाव जरुर आयेगा। स्कूल-कालेज में अच्छी शिक्षा प्राप्त होगी तो अच्छे देश का निर्माण होगा।
अन्ना ने दावा किया कि राहुल गांधी व नरेन्द्र मोदी देश का भविष्य नहीं है। पूरे देश की जनता जब तक प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति का प्रत्यक्ष रुप से नहीं चुनेगी तब तक देश का निर्माण नहीं हो सकेगा।
उत्तराखण्ड त्रासदी के मृतकों, संभावित मृतक के वारिसों को 2-2 लाख की आर्थिक सहायता मिलेगी
समग्र जाँच के बाद एक सप्ताह के अंदर अनुदान राशि देने के निर्देश, लापता तीर्थ-यात्री के निकटतम वारिस द्वारा आवेदन देने पर ही होगी कार्यवाही, आदेश 17 जून, 2013 से 15 सितम्बर, 2013 तक प्रभावशील
भोपाल 9 जुलाई 2013। राज्य शासन ने उत्तराखण्ड में अति-वृष्टि से उत्पन्न हुई प्राकृतिक आपदा में मध्यप्रदेश के तीर्थ-यात्रियों की मृत्यु के मामले में निकटतम वारिस को 2-2 लाख रुपये की अनुदान सहायता राशि प्रति मृतक के मान से देने का निर्णय लिया है। मृतक या लापता तीर्थ-यात्री, जिसकी मृत्यु की संभावना जताई जा रही है, के वारिस को यह सहायता राशि संबंधित कलेक्टर राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के तहत स्वीकृत करेंगे। प्रमुख सचिव राजस्व एवं राहत आयुक्त श्री आर.के. चतुर्वेदी द्वारा इस संबंध में सभी कलेक्टरों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिये गये हैं। यह आदेश 17 जून, 2013 से 15 सितम्बर, 2013 तक प्रभावशील रहेगा।
आपदा प्रभावित तीर्थ-यात्री की मृत्यु की पुष्टि के लिये उत्तराखण्ड राज्य के प्राधिकृत या स्थानीय पुलिस अधिकारी या शासकीय चिकित्सालय के प्रभारी अधिकारी द्वारा जारी मृत्यु विषयक प्रमाणीकरण या देहरादून अथवा हरिद्वार में लगाये गये मध्यप्रदेश राहत शिविर में संलग्न राजस्व अधिकारी द्वारा जारी मृत्यु विषयक प्रमाणीकरण आवश्यक होगा। ये राजस्व अधिकारी सहयात्रियों के कथन अभिलिखित कर एवं पंचनामा तैयार कर मृत्यु विषयक प्रमाणीकरण पत्र जारी कर सकेंगे।
ऐसे प्रकरण, जिनमें प्रभावित व्यक्ति की मृत्यु की पुष्टि उपरोक्तानुसार नहीं हो पा रही है लेकिन तीर्थ-यात्रा पर जाना प्रमाणित होता है और तीर्थ-यात्री लापता बताया जाता है, में तीर्थ-यात्री के निकटतम वारिस के आवेदन, अन्यथा प्राप्त सूचना के आधार पर या कलेक्टर के निर्णय पर मृत्यु की संभावना को मद्देनज़र रखते हुए यथाशीघ्र 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जायेगी। शेष डेढ़ लाख रुपये की राशि सहयात्री, परिवार के सदस्य, पड़ोसियों के कथन, मृतक तीर्थ-यात्री के यात्रा की टिकिट की प्रति, प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफ.आई.आर.) की प्रति, लापता तीर्थ-यात्री के निकटतम वारिस के शपथ-पत्र, पंचनामा एवं अन्य सुसंगत दस्तावेज की प्रस्तुति के बाद देय होगी। पंचनामा राजस्व अधिकारी द्वारा सत्यापित करना अनिवार्य होगा। समग्र जाँच के बाद एक सप्ताह के अंदर अनुदान राशि स्वीकृत करने के निर्देश दिये गये हैं।
राज्य शासन ने विभिन्न स्रोतों के आधार पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एस.डी.एम.ए.) द्वारा लापता तीर्थ-यात्रियों की जिलेवार सूची संबंधित कलेक्टर को भेज दी है। कलेक्टर सूची में दर्ज नामों का परीक्षण करने के बाद राहत राशि स्वीकृत करेंगे और तैयार सूची की एक प्रति राहत आयुक्त कार्यालय में भी भेजेंगे। जिले में प्राप्त जानकारी के आधार पर मृतक तीर्थ-यात्रियों की सूची संलग्न प्रारूप में पंजी में संधारित की जायेगी, जिसका प्रतिदिन सत्यापन प्राधिकृत अधिकारी द्वारा किया जायेगा।
नेता प्रतिपक्ष ने रखा अविश्वास प्रस्ताव
भोपाल 9 जुलाई 2013। विधानसभा के मानसूत्र के दूसरे दिन मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने एक लाईन का अविश्वास प्रस्ताव रखा कि यह सदन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में गठित मंत्रिपरिषद के प्रति अविश्वास प्रकट करता है। इस प्रस्ताव पर स्पीकर ईश्वर दास रोहाणी ने समर्थन मांगा जिस पर विपक्ष के अनेक सदस्य खड़े हो गये। इसके बाद स्पीकर रोहाणी ने घोषणा की कि गुरुवार को ध्यानाकर्षण की सूचनाओं के बाद इस प्रस्ताव पर चर्चा प्रारंभ कराई जायेगी। सदन में आज नवनियुक्त वित्त मंत्री जयंत मलैया ने 32 अरब 70 करोड़ 7 लाख 90 हजार 500 रुपयों की राशि वाला पहला अनुपूरक बजट पेश किया। इसके अलावा सदन में सात नये विधेयक पुर:स्थापित किये गये। कार्यसूची में चर्चा के कम विषय होने और कार्यसूची के सभी विषय निपटने के कारण आज सदन की कार्यवाही दोपहर सवा बारह बजे ही अगले दिन तक के लिये स्थगित हो गई।
फर्जी संस्थाओं को राशि देने की होगी जांच :
प्रश्रकाल में स्वास्थ्य राज्य मंत्री महेन्द्र हार्डिया ने कांग्रेस विधायक बिसाहूलाल सिंह के सवाल पर घोषणा की कि अनूपपुर जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत फर्जी स्वयंसेवी संस्थाओं को दो करोड़ रुपये से अधिक राशि देने की वरिष्ठ अधिकारियों को भेजकर जांच कराई जायेगी। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने राज्य के सभी आदिवासी क्षेत्रों में इस तरह की जांच कराने की मांग की परन्तु सरकार की ओर से इस बारे में कोई जवाब नहीं आया।
बुंदेलखण्ड पैकेज वाला कोई बांध क्षतिग्रस्त नहीं हुआ :
विधायक नारायण प्रजापति के सवाल पर जलसंसाधन मंत्री जयंत मलैया ने कहा कि बुन्देलखण्ड पैकेज की राशि से सम्बन्धित क्षेत्र में बनाये गये किसी बांध में बारिश से क्षति नहीं पहुंची है।
गरीब आदमी इलाज के लिये भीख मांगता है :तथा इस बारे में कार्यवाही करने के लिये सरकार के नियम हैं तो उसका प्रचार-प्रसार किया जाये।
शून्यकाल की सूचनायें पेश हुईं :
प्रश्रकाल के बाद सदन में शून्यकाल की सूचनायें प्रस्तुत हुईं। इनमें विधायक आरिफ अकील ने भोपाल में नर्मदा पाईप लाईन के ऊपर अवैध निर्माण होने, गोविन्द सिंह ने भिण्ड के अटेर क्षेत्र की सड़कें खराब होने, प्रताप ग्रेवाल ने जिला धार के सरदारपुर में सड़क निर्माण पूर्ण न होने, भगत सिंह नेताम ने बालाघाट के ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकरण न होने, दिलीप सिंह गुर्जर ने नागदा खाचरौद नगर पालिका के संविदा कर्मचारियों का शोषण किये जाने, सुखदेव पांसे ने प्रदेश में उच्च शिक्षा हेतु दिये गये ऋण का छात्रों के बेरोजगार होने के कारण ऋण चुकाने में असमर्थ होने, महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा ने रतलाम में वन्य प्राणियों द्वारा फसलों को नष्ट किये जाने, ब्रजराज सिंह ने श्योपुर के शमशान में जलाऊ लकड़ी की सप्लाई न होने, ठाकुर दास नागवंशी ने होशंगाबाद में वाणिज्यिक कर विभाग के नियम का पालन न होने तथा परसराम मुदगल ने मुरैना की इंदिरा आवास कालोनी में विद्युत व्यवस्था न होने के सम्बन्ध में बात रखी।
कार्यमंत्रणा समिति की सिफारिशें प्रस्तुत कीं :
इसके बाद स्पीकर रोहाणी ने कार्यमंत्रणा समिति की सिफारिशों को सदन में पढ़कर सुनाया जिस पर संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सदन की सहमति व्यक्त करने संबंधी प्रस्ताव रखा जो स्वीकृत हो गया।
तीन अध्यादेश पटल पर रखे गये :
सदन में आज संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने तीन अध्यादेश अत्यावश्यक सेवा संधारण, जल विनियमन तथा शासकीय सेवक अधिवार्षिकी सदन के पटल पर रखे। उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राज्य औद्योगिक विकास निगम का 43 वां प्रतिवेदन एवं लेखे, वन मंत्री सरताज सिंह ने राज्य वन विकास निगम का 37 वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखे, पशुपालन मंत्री अजय विश्रोई ने कुक्कुट विकास निगम का वर्ष 2010-ृ12 का वार्षिक प्रतिवेदन, उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने मप्र निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग का वर्ष 2011-12 का वार्षिक प्रतिवेदन, गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने पुलिस हाऊसिंग कारपोरेशन का 31 वां प्रतिवेदन, ऊर्जा मंत्री राजेन्द्र शुक्ला ने ऊर्जा विभाग की तीन अधिसूचनायें तथा सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री ने मानव अधिकार आयोग का वार्षिक लेखा वर्ष 2010-11 सदन के पटल पर प्रस्तुत किया।
सदन में स्पीकर रोहाणी ने फरवरी-मार्च,2013 सत्र निर्धारित अवधि के पूर्व स्थगित हो जाने के फलस्वरुप शेष दिनांकों के प्रश्रोत्तरों का संकलन तथा इसी सत्र के प्रश्रों के अपूर्ण उत्तरों के पूर्ण उत्तरों का संकलन सदन के पटल पर रखवाया। स्पीकर ने नियम-267 के अधीन फरवरी-मार्च,2013 सत्र में पढ़ी गई सूचनाओं तथा उनके उत्तरों का संकलन भी सदन के पटल पर रखवाया। इसके बाद राज्यपाल की अनुमति प्राप्त ग्यारह विधेयकों की सूची प्रस्तुत की।
विधायक ब्रजराज सिंह चौहान के प्रश्र पर स्पीकर रोहाणी को कहना पड़ा कि निजी अस्पतालों में निरन्तर गरीब लोगों का शोषण हो रहा है तथा गरीब आदमी इलाज के लिये भीख मांगता रहता है
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