Sunday, February 13, 2011

अमरूद है फायदेमंद

अमरूद है फायदेमंद
इन दिनों अमरूद काफी संख्या में आ रहे हैं, सर्दियों में अमरूद का सेवन करना स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद लाभकारी होता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को विभिन्न तरह से फायदा पहुंचाते हैं। यही वजह है कि इस मौसम में विशेष्ा रूप से अमरूद के सेवन की सलाह दी जाती है।

यूं कर सकते हैं प्रयोग

अमरूद में कई तरह के गुण होते हैं जो स्वास्थ्य के बेहद लाभकारी हैं। यह विभिन्न बीमारियों में फायदा पहुंचाता है।

विटामिन सी की मात्रा अधिक होती है जिससे स्किन डिजीज नहीं होती।

विटामिन, फाइबर व मिनरल प्रचुर मात्रा में होता है।

फाइबर होने की वजह से यह कब्ज दूर करता है।

नाक व मसूढ़ों से निकलने वाले खून को रोकने में मददगार है।

एसिडिटी, अस्थमा, ब्लडप्रेशर, मोटापा आदि समस्याओं में फायदा पहुंचाता है।
कोलेस्ट्रॉल लेवल कम करता है।

ये हैं गुण
अमरूद में कई औषधीय गुण होते हैं, इसे विभिन्न प्रकार से समस्याओं को दूर करने में प्रयोग किया जा सकता है।

अमरूद के 10 ग्राम अर्क में 5 ग्राम शहद मिला कर सुबह-शाम खाली पेट सेवन करने से सूखी खांसी में फायदा होता है।

इसके अर्क के सेवने से पित्त संबंधी समस्या दूर होती है।

बीज निकालकर अमरूद को ठंडे पानी में घंटा भर रखने के बाद उस पानी का सेवन करना मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद रहता है।

ताजे कच्चे अमरूद को घिसकर सुबह के समय लेप करने से आधी शीशी का दर्द दूर होने लगता है।

ग्रीन टी पियो और ब्यूटीफुल बनो

ग्रीन टी पियो और ब्यूटीफुल बनो
यदि आप चाय के शौकीन हैं, तो ग्रीन टी पीएं। यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती है। इससे न सिर्फ बीमारियों का इलाज होता है, बल्कि यह शरीर को रोगों से जकड़ने भी नहीं देती। ग्रीन टी से स्वास्थ्य लाभ तो होता ही है साथ ही ब्यूटी के लिए ग्रीन टी अच्छा काम करती है। रोज सुबह खाली पेट ग्रीन टी का सेवन करना चाहिए। ग्रीन टी वजन कम करने, स्टे्रस कम करने और उम्र बढ़ाने के लिए कारगर है।

बीमारियों से बचाती है

ग्रीन टी पीने वाली महिलाएं फिट रहती हैं। इससे बीमारियां होने के चांसेज कम होते हैं। डायटीशियन कहते हैं कि हार्ट पेशेंट और कैंसर के पेशेंट के लिए यह बहुत लाभकारी होता है। शुगर पेशेंट अगर रोज ग्रीन टी का सेवन करें तो उसकी शुगर बैलेंस रहेगी, क्योंकि यह एक हर्बल प्रॉडक्ट है, इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती है। इससे बॉडी का कोलेस्ट्रॉल बैलेंस रहता है। यदि कोई व्यक्ति लगातार तीन महीनों तक ग्रीन टी का सेवन करे, तो खुद ही उसे अपनी बॉडी फिटनेस का अंदाजा हो जाएगा। इसके साथ ही शरीर में जितने भी दाग धब्बे हों तो वह भी ग्रीन टी के सेवन से समाप्त हो जाते हैं।

हेयर पीएच का बैलेंस
ब्यूटी एक्सपर्टर्स के अनुसार ग्रीन टी हेयर ट्रीटमेंट के लिए बेस्ट है। ग्रीन टी को पानी में उबाल कर ठंडा करके करें। शैम्पू से सिर धोने के बाद उस उबले हुए पानी से सिर धोएं। इससे स्कैल्प का पीएच बैलेंस होगा और तैलीय आवरण से भी बचाव होगा। इसके साथ ही यदि इस उबले हुए पानी को रूई की सहायता से स्कैल्प में लगाने से सारी रूसी खत्म हो जाएगी।

स्किन टोनर का काम
ग्रीन टी में एपल ग्रीन टी की वैरायटी खास होती है। इसमें मिनरल और विटामिन सी पाया जाता है, इसलिए यह अच्छे स्किन टोनर का भी काम करती है। ग्रीन टी को एक गिलास पानी में अच्छी तरह उबालें। फिर उसे सोते वक्त आंखों के नीचे लगाएं, इससे आंखों के नीचे का काला पन और झुर्रियां दूर हो जाएंगी। इसके पानी को यदि दाग धब्बों में लगाया जाए तो वह भी जल्दी ही ठीक हो जाता है।

मूंगफली भगाएगी कोलेस्ट्रॉल

मूंगफली भगाएगी कोलेस्ट्रॉल
सर्दियां में डाइट में बादाम और मूंगफली को शामिल करने से सेहत अच्छी बनी रहती है। इससे ब्लड में कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होता है। एक दिन में औसतन 67 ग्राम नट्स यानी बादाम और मूंगफली खाने से कुल कोलेस्ट्रॉल लेवल में 51 फीसदी की कमी आती है। इसके अलावा कम घनत्व वाले बैड कोलेस्ट्रॉल यानी लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल का लेवल 7.4 फीसदी कम होता है।

एक स्टडी के मुताबिक, जिन लोगों के रक्त में ट्राइग्लाइसेराइड का लेवल अधिक होता है, वे अगर नट्स खाएं, तो उनके ब्लड के लिपिड लेवल में ट्राइग्लाइसेराइड का लेवल 10.2 फीसदी कम हो जाता है। नट्स खाने के फायदे बहुत ज्यादा हैं। इससे टाइप टू मधुमेह होने का खतरा कम होता है। वसा की मात्रा अधिक होने के बावजूद यह जरूरी नहीं कि नट्स खाने से वजन बढ़े।

कसरत से दिमाग दुरूस्त

कसरत से दिमाग दुरूस्त
यदि आप चाहते हैं कि बुढ़ापे में भी आपका दिमाग तेज रहे तो शारीरिक व्यायाम इसके लिए सबसे अच्छा उपाय हो सकता है। एक नए अध्ययन के मुताबिक बुढ़ापे में व्यायाम दिमाग को चुस्त रखता है।

वेबसाइट "एक्सप्रेस डॉट को डॉट यूके" के मुताबिक हाल के वर्षो में दिमाग की सक्रियता बढ़ाने के लिए कम्प्यूटर पर खेले जाने वाले तथाकथित मस्तिष्क अभ्यास खेलों का चलन बढ़ा है। वैसे अब शोधकर्ताओं की सलाह है कि दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए मानसिक कार्य करने की अपेक्षा शारीरिक व्यायाम करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

नियमित रूप से दौड़ने या हल्का-फुल्का व्यायाम करने से मस्तिष्क को अधिक सक्रिय व फुर्तीला रखने में मदद मिलती है। उम्र बढ़ने पर लोगों का नाम याद रखने या अन्य सूचनाएं याद रखने के लिए दिमाग को काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। दिमाग को होने वाली इन परेशानियों में नियमित व्यायाम करने से 40 प्रतिशत तक की कमी आती है।

साप्ताहिक खेल खेलने या प्रतिदिन लम्बी दूरी तक पैदल चलने से भी मस्तिष्क की याददाश्त सम्बंधी परेशानियों में 35 प्रतिशत तक की कमी आती है। दरअसल व्यायाम से दिमाग में खून का प्रवाह तेज होता है और मस्तिष्क कोशिकाओं में मौजूद प्रोटीन्स की सक्रियता बढ़ती है।

पानी पीएं, वजन घटाएं

पानी पीएं, वजन घटाएं
वजन घटाने के लिए आप क्या नहीं करते। महंगी दवाईयां लेने से लेकर डाइट प्लान और जिम में घंटों पसीना बहाने जैसे हर उपाय अपनाए जाते हैं। लेकिन अब मोटापा कम करने के लिए इन उपायों को अपनाने की जरूरत नहीं है। विशेषज्ञों की मानें तो वजन कम करने का राज सिर्फ एक गिलास पानी में छिपा है।

शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में यह खुलासा किया है। अध्ययनकर्ताओं की मानें तो खाना खाने से पहले दो गिलास पानी पीने की आदत न सिर्फ आपके वजन को नियंत्रित करती है, बल्कि लंबे समय तक आपको फिट बनाने के लिए भी कारगर है। अध्ययन के अनुसार जिन डाइटर्स ने कैलोरी काउंट के तहत आधार लेने पर ध्यान दिया उनके मुकाबले वैसे डाइटर्स का वजन तेजी से घटा, जिन्होंने खाने से पहले दो गिलास पानी पीने का फंडा अपनाया। अमरीकी शोधकर्ताओं के अनुसार पानी वजन घटाने का सबसे सस्ता उपाय है। पानी को कैलोरी फ्री आहार भी माना जा सकता है। खाने से पहले जब हम पानी पीते हैं, तो हमारी काफी हद तक कम हो जाती है और परिणामस्वरूप हम कम भोजन करते हैं।

ज्यादा नमक" को करें बैलेंस

ज्यादा नमक" को करें बैलेंस
कभी-कभी गलती से किसी डिश में ज्यादा नमक पड़ जाने से उसका स्वाद भी बुरी तरह बिगड़ जाता है। ऎसे में उस खाने को फेंकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। लेकिन हम आपको बता रहे है नमक बैलेंस करने के उपाय। जिससे आप न सिर्फ ज्यादा नमक खाने से सेहत को होने वाले नुकसान से बच सकते हैं, बल्कि खाने का स्वाद भी सुधार सकते हैं।

1. विनेगर या शुगर : यदि किसी डिश में ज्यादा नमक पड़ गया हो, ग्रेवी में आधा चम्मत विनेगर या शुगर डालें।

2. क्रीमी बनाएं : यदि किसी क्रीमी डिश में ज्यादा नमक हो, तो उसमें और क्रीम मिलाकर डिश का स्वाद बेहतर बना सकते हैं।

3. आलू का कमाल : ज्यादा नमक वाले डिश में आलू के टुकड़े या आटे के छोटी-छोटी गोलियां बनाकर डालें। अब इस डिश को खौलाएं। ऎसा करने से आलू के टुकड़े या आटे की गोलियां नमक को सोख लेती हैं। डिश सर्व करने से पहले आलू और आटे की गोलियां निकाल लें।

4. कुकिंग : किसी डिश से ज्यादा नमक को बैलेंस करने का सबसे बेहतर तरीका है कुकिंग। बिना नमक की अलग से ग्रेवी बनाकर ज्यादा नमक वाले डिश में डाल दें। हालांकि, नमक को बैलेंस करने का यह लंबा तरीका है, लेकिन यह तभी संभव है, जब आपके पास ग्रेवी तैयार करने का समय हो।

ज्यादा नमक" को करें बैलेंस

ज्यादा नमक" को करें बैलेंस
कभी-कभी गलती से किसी डिश में ज्यादा नमक पड़ जाने से उसका स्वाद भी बुरी तरह बिगड़ जाता है। ऎसे में उस खाने को फेंकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। लेकिन हम आपको बता रहे है नमक बैलेंस करने के उपाय। जिससे आप न सिर्फ ज्यादा नमक खाने से सेहत को होने वाले नुकसान से बच सकते हैं, बल्कि खाने का स्वाद भी सुधार सकते हैं।

1. विनेगर या शुगर : यदि किसी डिश में ज्यादा नमक पड़ गया हो, ग्रेवी में आधा चम्मत विनेगर या शुगर डालें।

2. क्रीमी बनाएं : यदि किसी क्रीमी डिश में ज्यादा नमक हो, तो उसमें और क्रीम मिलाकर डिश का स्वाद बेहतर बना सकते हैं।

3. आलू का कमाल : ज्यादा नमक वाले डिश में आलू के टुकड़े या आटे के छोटी-छोटी गोलियां बनाकर डालें। अब इस डिश को खौलाएं। ऎसा करने से आलू के टुकड़े या आटे की गोलियां नमक को सोख लेती हैं। डिश सर्व करने से पहले आलू और आटे की गोलियां निकाल लें।

4. कुकिंग : किसी डिश से ज्यादा नमक को बैलेंस करने का सबसे बेहतर तरीका है कुकिंग। बिना नमक की अलग से ग्रेवी बनाकर ज्यादा नमक वाले डिश में डाल दें। हालांकि, नमक को बैलेंस करने का यह लंबा तरीका है, लेकिन यह तभी संभव है, जब आपके पास ग्रेवी तैयार करने का समय हो।

जरूरत से ज्यादा चर्बी हानिकारक होती है।

बढ़ती चर्बी से बचें
जैसे खांसी और कब्ज को रोगों का घर कहा जाता है, वैसे ही मोटापे को भी कई बीमारियों का जनक माना जाता है। शरीर पर बढ़ती अनावश्यक चर्बी अपने आप में कई रोगों को बुलावा देती है। दिल के रोग, ब्लडप्रेशर, डायबिटीज और कैंसर आदि कई तरह की बीमारियों का संबंध मोटापे से होता है।

जानलेवा है चर्बी
चर्बी शरीर के लिए आवश्यक होती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा चर्बी हानिकारक होती है। शरीर में अतिरिक्त चर्बी जम जाने पर यह प्रकट होता है। मोटापा शरीर के कुछ अंगों पेट, जांघ, हाथ, नितम्ब, कमर आदि को अनावश्यक रूप से फुलाते हुए अपने आस-पास के अंगों को दबाता चला जाता है, इस तरह यह पूरे शरीर को अपने कब्जे में ले लेता है। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव दिल, दिल की धमनियों आदि पर होता है। मोटापे में दिल के आसपास धमनियों में चर्बी जमा हो जाती है और दिल की परेशानियां बढ़ जाती हैं।

चरक संहिता के अनुसार अधिक मोटे व्यक्ति के शरीर में चर्बी ही बढ़ती है, अन्य धातुएं उतनी नहीं बढ़तीं। मोटे व्यक्ति अल्पायु तो होते हैं, पुरूषत्वहीन, वीर्यविहीन, पसीने से परेशान, भूख-प्यास से व्याकुल तथा अनेक बीमारियों से ग्रस्त होते हैं। मोटा व्यक्ति भूख शांत करने के लिए नहीं खाता, बल्कि स्वादेन्द्रियों को शांत करने के लिए नाना प्रकार के भोजन करता है। अतिरिक्त भोजन मिलने पर, आरामतलब होने पर तथा परिश्रम न करने पर हमारा शरीर अनावश्यक चर्बी एकत्र करने लग जाता है, यही चर्बी मोटापे का रूप होती है।


मोटापा आनुवांशिक भी हो सकता है और जीवनशैली की अनियमितता भी। चाहे जब भोजन करना, भोजन में वसा, मिठाइयां, तेल, घी, दूध, अंडे, शराब, मांस, धूम्रपान अन्य तरह का नशा आदि की अति कर देना। शरीर की कुछ ग्रंथियां भी मोटापे का कारण होती हैं, मौलिक चयापचय की क्रिया और शरीरिक क्रियाशीलता के कारण थायरॉइड ग्रंथि और पीटयूटरी ग्रंथि के स्त्रावों की कमी की वजह से मोटापा पनपता है। वंश परंपरा भी मोटापे का कारण है, यहां इसे रोग नहीं कह सकते।


भोजन में अति, भोजन पpात दिन में सोना और परिश्रम कम करना, गर्भवती çस्त्रयों को गर्भवती के नाम पर अनावश्यक खिलाते रहना। प्रसव बाद भी मेवों का अति सेवन कराना और शरीरिक श्रम कम करना जैसी बातें महिलाओं में मोटापे को बढ़ावा देती है। इनसे बचना चाहिए।


बच्चों के मोटापे का कारण यही है कि माता-पिता लाड़-प्यार में बच्चे को वसा, प्रोटीन से भरपूर पदार्थ अनावश्यक खिलाते रहते हैं। शरीर में मेद वृद्धि बचपन से ही आ जाती है। कई बार दुबले माता-पिता के बच्चे इसी कारण मोटापे की गिरफ्त में आ जाते हैं।


मोटापे का सबसे प्रभावी उपाय है अपनी जीवन शैली में बदलाव। उन सब चीजों से बचे जो शरीर में फैट को बढ़ावा देती हो। तैलीय और वसायुक्त भोजन से परहेज करें।
जीवन शैली में व्यायाम और सैर को शामिल करके मोटापे को कम किया जा सकता है और छरहरापन भी बरकरार रखा जा सकता है।

विद्या न्यूड पोज देने के लिए भी राजी की अफवाह


विद्या न्यूड पोज देने के लिए भी राजी की अफवाह
बेचारी विद्या, उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि ये अफवाह कैसे फैली? कहा गया कि मशहूर चित्रकार एम.एफ.हुसैन विद्या बालन की पेंटिंग बनाने वाले हैं। यहाँ तक तो ठीक है। वैसे भी हुसैन साहब का आए दिन किसी न किसी अभिनेत्री पर दिल आता रहता है। लेकिन ये कोई सामान्य पेंटिंग नहीं होगी बल्कि विद्या की न्यूड पेंटिंग होगी। इससे बढ़कर ये कि विद्या न्यूड पोज देने के लिए भी राजी हो गई हैं। जब इस तरह की बात जब चारों ओर तेजी से फैलने लगी तो विद्या के खेमे ने मैदान संभाला। उन्होंने तुरंत इसका खंडन करते हुए कहा कि ये मनगढ़ंत खबर है और विद्या की इमेज को धक्का पहुँचाने की चाल है।

Wednesday, February 9, 2011

एक भावी महिला डाक्टर की टी शर्ट पर -आई लव यू न्यूयार्क-लिखा देखकर डेंटल कालेज आफ इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल कृष्ण गाबा ने दो शिक्षकों की मौजूदगी में संस


जाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के डेंटल कालेज आफ इंस्टीट्यूट में पिछले दिनों अजीब और बेहद शर्मनाक घटना हुई। अजीब इस मायने में कि आधुनिकतम शहर में घटी जहां फैशन युवा वर्ग का पैशन हो चला है और इसके लिए वह किसी भी तरह का समझौता नहीं कर सकता। पूरे समाज से टकराने का मादा रखने वाला यह युवा वर्ग क्या संदेश देना चाहता है? यह कि वे जो भी कर रहे हैं, जो पहन रहे हैं बिल्कुल ठीक है। फैशन के नाम पर क्या उन्हें कुछ भी पहनने का हक है? बिल्कुल है, वे कुछ भी पहन सकते हैं और चाहे तो लोकलाज के भय से नाममात्र के वस्त्र भी धारण कर सकते हैं। उन्हें समाज की मर्यादा का भय नहीं होगा लेकिन कुछ लोग संस्कृति और गरिमा का अहसास कराने वाले भी होंगे।
घटना को शर्मनाक कहना ही पर्याप्त था पर बेहद विशेषण इसलिए क्योंकि इससे गुरु-शिष्य की परपंरा की मूल भावना आहत हुई है। जिस देश में एकलव्य जैसे शिष्य ने दक्षिणा में अंगूठा देने की अनूठी परंपरा कायम की हो वहां एक गुरू के समझाने भर से इतना गुस्सा, इतना आक्रोश। जैसे पहले से गुस्से से भरे पड़े हों और घटना से वह फूट पड़ा हो।
एक भावी महिला डाक्टर की टी शर्ट पर -आई लव यू न्यूयार्क-लिखा देखकर डेंटल कालेज आफ इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल कृष्ण गाबा ने दो शिक्षकों की मौजूदगी में संस्थान और डाक्टरी के पेशे की गरिमा को देखते हुए इससे परहेज करने या ऐसा फिर न पहन कर आए की ताकीद की थी।
उन्हें नहीं पता था कि उनकी यह समझाइश इतनी भारी पड़ेगी कि उनके खिलाफ विद्रोह हो जाएगा। उन्हें हटाने के लिए छात्र-छात्राएं आमरण अनशन करने पर उतारू हो जाएंगे और बिना उनकी रुखसती के किसी बात पर राजी नहीं होंगे। अगर पता होता तब भी गाबा क्या यही करते? क्या कह सकते हैं लेकिन एक बात पक्की है वे संस्थान में अनुशासन पैदा करना चाहते थे जिसके आदी इस संस्थान के भावी डाक्टर होने को तैयार नहीं थे।
टी शर्ट पर अंकित -आई लव यू न्यूयार्क- कोई अश्लील या आपत्तिजनक शब्द नहीं है। सच है किसी शहर या देश से प्यार दर्शाना गलत नहीं है और इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है फिर छात्रा डाक्टर को आगे से ऐसी टी शर्ट पहनने पर आपत्ति क्यों जताई गई। शायद इसके पीछे मूल भावना अनुशासन की रही होगी क्योंकि यह वह संस्थान है जहां से निकलकर ये युवा समाज में लोगों के आदर्श बनेंगे उन्हें खुद को यह ध्यान रखना चाहिए था न कि कोई उन्हें बताए।
गाबा को हटाने और सबक सिखाने के लिए जिस तरह से आंदोलन चलाया गया उससे विवि प्रबंधन भी मुश्किल में पड़ गया। मामले की जांच के आदेश हुए और गाबा को छुट्टी पर भेज दिया गया। जांच में गाबा को क्लीन चिट मिली है यानी उन्होंने गलत मंशा से कुछ भी नहीं किया। उन्होंने संस्थान के प्रिंसिपल पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के साथ ही आंदोलन भी खत्म हो गया है।
इस घटना के बाद डेंटल कालेज आफ इंस्टीट्यूट का कोई प्रिंसिपल कम से कम ड्रेस के बारे में तो कुछ नहीं कहेगा क्योंकि अगर कुर्सी पर बने रहना है तो इतना समझौता तो करना होगा। कुर्सी की चिंता होती तो गाबा भी घटना पर सामूहिक खेद जता सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उनकी नजर में अनुशासन कुर्सी से बड़ा था।
महेंद्र सिंह राठौर की रिपोर्ट

सबको खबर देने और सबकी खबर लेने का दावा करने वाला, अपने को जनता का पक्षधर और सबसे तेज, निर्भीक व निष्पक्ष बताने वाला मीडिया राडिया टेपों के प्रकाश में


सबको खबर देने और सबकी खबर लेने का दावा करने वाला, अपने को जनता का पक्षधर और सबसे तेज, निर्भीक व निष्पक्ष बताने वाला मीडिया राडिया टेपों के प्रकाश में आने के बाद जनता के बीच खुद सवालों के कठघरे में खड़ा है। देर से ही सही, तीन शीर्ष संस्थाओं ने हमपेशा लोगों के साथ इन सामयिक सवालों पर समवेत चर्चा की प्रशंसनीय पहल की।

यह सही है कि गहरी स्पर्धा के युग में ताबड़तोड़ जटिल स्टोरी का पीछा करते हुए एक पत्रकार को हर तरह के लोगों से मिलना होता है। पर दलील दी जा रही है कि पत्रकार अगर दोस्ती का चरका देकर (स्ट्रिंगिंग एलॉन्ग) किसी ऐसे महत्वपूर्ण स्रोत से संपर्क साधे, जो कापरेरेट घरानों का ज्ञात और भरोसेमंद प्रवक्ता तथा राजनीतिक दलों से उनके हित साधन का जरिया भी हो, तो क्या उससे फोन पर बात करना पत्रकार के दागी होने का प्रमाण है?

यह सवाल लचर है। बड़े कापरेरेट घरानों की पीआर एजेंसियां जो तगड़े पीआर बजट के साथ लगातार प्रभावशाली लोगों के संपर्क में रहती हैं, इतनी भोली नहीं होतीं कि वादा करवाने के बाद मुद्दे का पीछा न करें और वादाखिलाफी के बाद भी पत्रकार से संपर्क कायम रखें।

बजट से लेकर सार्वजनिक संसाधनों के आवंटन तक से जुड़ी अहम सरकारी फैसलों की धारा कंपनी के जजमानों के हित में मुड़वाने के लिए कौन नेता, अफसर या दिग्गज पत्रकार मदद देगा, इसकी उनको खूब परख होती है। किस हद तक पीआर वालों से बात की जाए, कहां दूरी बरती जाए, इसके अलिखित नियम भी हर अच्छा पत्रकार जानता है।

कार्यकुशलता तथा हिम्मती रिपोर्टिग के लिए बार-बार सम्मानित जो पत्रकार टेप के लपेटे में आए हैं, इन सच्चाइयों व धंधई लक्ष्मण रेखाओं से अनजान थे, यह असंभव है। बेहतर होता कि बचाव में अपने कॉलम या कार्यक्रमों में जिरह की बजाय वे विनम्रता से मान लेते कि उनसे गलती हुई है और उससे वे सबक लेंगे।

एक पत्रकार ने विवादित पीआर एजेंसी से दोस्ती का अनूठा तर्क दिया कि हर नागरिक अपने विचार साझा करने को स्वतंत्र है। फोन पर अपने संपर्क सूत्र से उन्होंने जो कहा, वह उनका जाती मामला है और उसकी जासूसी या उस पर बंदिश की मांग पत्रकारीय आजादी का हनन होगा।

हमारे संविधान का अनुच्छेद 19 मीडिया ही नहीं, सभी देशवासियों को अभिव्यक्ति की आजादी का हक देता है, पर वह यह नहीं कहता कि आप अमुक चैनल या अखबार के समूह संपादक और कई लाभकारी सूत्रों से संपर्क रखने वाले शख्स हैं तो आपको अभिव्यक्ति या निजता की रक्षा का दूसरों से ज्यादा हक प्राप्त है।

दिक्कत यह है कि आज भी बतौर प्रोफेशन पत्रकारिता का क्षेत्र सीमा-रेखा या परिधिविहीन है। अलबत्ता हम बात ऐसे करते हैं मानो डॉक्टरी या प्रोफेसरी की तरह उसकी प्रोफेशनल सीमाएं स्पष्ट हों और पत्रकार घोड़े पर सवार कल्किनुमा अवतार है जो राज-समाज की बुराइयों को मिटा सकता है।

इसी कारण वे तमाम उम्मीदें जो लोकतंत्र के तीन अन्य पायों (विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका) से करनी चाहिए थीं, जनता पत्रकारिता जगत के सितारों से पाल बैठी है। जनता की सराहना और उम्मीदभरी निगाहों और स्टूडियो में तालियों के नशे में खुद को विक्रमादित्य समझ बैठने वाले पत्रकार अक्सर अपनी छवि के चक्कर में पेशे की अलिखित मर्यादाएं भूल जाते हैं।

यूं भी नई तकनीकी, आक्रामक आत्मप्रचार तथा तिकड़मी क्षमता के बल पर कुछ महत्वाकांक्षी किंतु अनुभवहीन लोगों को आज कम उम्र में बहुत यश तथा ओहदा मिल जाए तो आत्मस्फीति और लालच बढ़ने का खतरा बनता है। आज भी मीडिया में क्वालिटी कंट्रोल का काम संविधान या सरकार नहीं, वरिष्ठ व अनुभवी पत्रकारों का निजी विवेक, चंद यशविमुख संपादक, संस्थान की साख और सभ्य समाज की मर्यादाएं करा रहे हैं।

हिंदी पत्रकार इन टेपों के दायरे में भले न हों, पर उनके लिए भी यह पीठ थपथपाने की बजाय तटस्थ आत्मपरीक्षण का विषय होना चाहिए। अंग्रेजी में लाभ लोभ की पत्रकारिता बढ़ने के साथ लगातार तकनीकी तथा आर्थिक तौर से समृद्ध बन रही हिंदी में भी चिंताजनक क्षरण आया है।

हिंदी में भी अनेकों अनुभवहीन साइबर पत्रकार या अंशकालिक संवाददाता हैं, जो पत्रकारिता को ऊपरी कमाई का साधन बनाकर आरोपी का पक्ष जाने बिना सिर्फ अफवाहों, निजी खुंदक या न्यस्त स्वार्थो को उपकृत करते हुए बड़े-बड़ों की उम्रभर की साख पर सियाही पोतने का काम कर रहे हैं।

जितना ऊंचा शिकार, उतनी ही उनकी कमाई और उससे भी अधिक आत्मस्फीति कि देखो हमारी ताकत! दुखद यह कि ऐसे पत्रकार चूंकि कलेक्टर से लेकर काबीना मंत्रियों तक निजी संपर्को के बूते समय-समय पर तमाम लोगों को उपकृत कराते रहते हैं, उनके पकड़े जाने पर व्यवस्था के भीतर से उनके गुप्त समर्थकों की जमात रातों-रात उनकी ओट बन जाती है।

इस बार जो चंद जाने-माने पत्रकार यकायक घिरे हैं, उसका श्रेय भी अंग्रेजी-हिंदी मीडिया के किसी लोकपाल या निगरानी संस्था को नहीं जाता। ये टेप कापरेरेट तथा राजनीतिक क्षेत्र के प्रतिस्पर्धी हितों के टकराव के कारण लीक हुए हैं और पूरे कांड की जडें इस अकथित सचाई में हैं कि हिंदी समेत हर भाषा के मीडिया पर इस दशक में राजनीतिक दलों तथा कापरेरेट तत्वों का सीधा कब्जा लगातार बढ़ा है। बाजार की पूंजी से कापरेरेटाइज हो गए मीडिया में अधिक से अधिक पैसा कमाने की इच्छा सवरेपरि है, पाठक का हित नहीं।

दर्शक या पाठक को वरगलाकर माल खरीदवाने को हर तरह के घालमेल आज स्वाभाविक हैं और अधिकतर मामलों में वरिष्ठ पत्रकार अपने संस्थानों की जानकारी के बिना नहीं, उनकी गुप्त या जाहिर सहमति से ही लक्ष्मण रेखाएं तोड़ रहे हैं।

प्रमाण कभी ‘पेड न्यूज’ के रूप में सामने आते हैं, तो कभी संपादकीय पन्नों या स्टूडियो बहसों में किसी व्यक्ति, दल या घराने के खिलाफ या समर्थन में चलाए गए योजनाबद्ध कैंपेन की शक्ल में। इससे चंद संपादक और पत्रकार ही महिमामंडित नहीं हो रहे, उनकी ग्लैमरस सुपर हीरो की छवि बनवाकर उससे बाजार में ब्रांड इमेज चमकाने वाले मीडिया संस्थान भी भरपूर लाभ उठा रहे हैं।

शायद इस बिंदु पर आकर मीडिया को अब अपने लिए खुद एक न्यूनतम आचार संहिता तय करने पर पुनर्विचार करना होगा। इमरजेंसी की कड़वी यादों के चलते मीडिया को ऐसा कोई भी अनुशासनपरक कदम नागवार लगता रहा है, लेकिन दूसरों के खिलाफ जिहादी तेवर दिखाने वाला मीडिया जान ले कि हमारा नया उपभोक्ता खुद भी नई तकनीकी से परिचित है।

मीडिया के घालमेल के खिलाफ यह उपभोक्ता या सिटीजन जर्नलिस्ट बनकर प्रेस काउंसिल, उपभोक्ता अदालत, लोकपाल या महिला आयोग में धड़धड़ाता चला जाएगा। वह सूचना अधिकार का उपयोग कर झूठ को सप्रमाण सूचना प्रसारण मंत्री या प्रतिस्पर्धी अखबार अथवा चैनल को खत या ई-मेल से भेजकर दर्ज कराएगा।

गैरजिम्मेदारी और भ्रष्टाचार के सायों से घिरी पत्रकारिता की साख अब सिर्फ विज्ञापनी रंग-रोगन या दबंगई के बल पर कायम नहीं रखी जा सकती। – (लेख में व्यक्त विचार स्तंभकार के निजी हैं।)

- लेखिका जानी-मानी साहित्यकार और वरिष्ठ पत्रकार हैं। साभार-दैनिक भास्कर

पत्रकार हल्ला विरोधी कृति समिति ने ब्रीफिंग के ठीक पहले बहिष्कार करने का फैसला किया। इसके पहले मुख्यमंत्री कार्यालय ने पत्रकारों से ब्रीफिंग में आग ले


महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने पत्रकारों के खिलाफ अपनी हालिया टिप्पणी पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण से भेंट की। वहीं पत्रकारों ने आज कैबिनेट की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन का बहिष्कार किया।
पवार ने अपनी टिप्पणियों पर चव्हाण को लिखित स्पष्टीकरण सौंपा। उन्होंने कहा कि मेरे बयानों को गलत तरीके से उद्धृत किया गया है। मैंने यह नहीं कहा कि मीडिया पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। इसके पहले पत्रकारों ने कैबिनेट की बैठक के बाद मु यमंत्री की ब्रीफिंग में भाग नहीं लिया। पत्रकार हल्ला विरोधी कृति समिति ने ब्रीफिंग के ठीक पहले बहिष्कार करने का फैसला किया। इसके पहले मुख्यमंत्री कार्यालय ने पत्रकारों से ब्रीफिंग में आग लेने का अनुरोध किया था। लेकिन पत्रकारों ने कहा कि वे इस अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे। समिति के संयोजक एस एम देशमुख ने कहा कि समिति अपनी मांग पर अडिग है कि पवार बिना शर्त माफी मांगें और पत्रकारों के साथ मारपीट करने वाले पुलिसकर्मी निलंबित किए जाएं।

हां, मैं एसपी का सप्लायर थाः अमर


जयपुर।। समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता सांसद अमर सिंह ने स्वीकार किया कि उन्होंने समाजवादी पार्टी के लिए 'सप्लायर' का काम किया। अमर ने दावा किया कि उन्होंने मुलायम सिंह की सरकार बनवाने के लिए बीएसपी विधायकों को मैनेज करने में मुख्य भूमिका निभाई थी।

अमर सिंह ने कहा कि मुझ पर आरोप लगते रहे हैं कि मैंने समाजवादी पार्टी के लिए सप्लायर और मध्यस्थ का काम किया, मैं इसे स्वीकार करता हूं।

अमर सिंह ने ये बातें जयपुर प्रेस क्लब में प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में कहीं। उन्होंने कहा कि 22 फरवरी को वह बस्ती में अपने अगले राजनीतिक कदम की घोषणा करेंगे। उन्होंने बताया कि पूर्वी उत्तर प्रदेश राज्य गठित करने की मांग को लेकर जारी उनकी पदयात्रा का अगला चरण 11 फरवरी को महराजगंज से शुरू होगा।

दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी थाने की पुलिस ने काम दिलाने के बहाने लड़कियों की खरीद फरोख्त करने और शोषण करने के मामले में दो लड़कियों को मुक्त करा लिया,

डिफेंस कॉलोनी
साउथ दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी थाने की पुलिस ने काम दिलाने के बहाने लड़कियों की खरीद फरोख्त करने और शोषण करने के मामले में दो लड़कियों को मुक्त करा लिया, लेकिन उनकी कहानी से साफ है कि कई और लड़कियां इस तरह के जाल में फंस चुकी हैं। गांव से लाकर उन्हें कई जगह बेचा जाता और फिर घरों में काम करने वाली मेड के तौर पर लगा दिया जाता। ये मेड घर में कुछ दिन काम करके किसी बहाने भाग जातीं और कस्टमर का पैसा हड़प लिया जाता।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में सोना ने बताया कि झारखंड में उनके पड़ोस के गांव में रहने वाला जयराम नाम का शख्स उसे दिल्ली लाया था। जयराम 20-25 दिन पहले उसकी बड़ी बहन मुनिया को भी काम दिलाने के बहाने दिल्ली लाया था और तब से मुनिया की अपने परिजनों से फोन पर बात तक नहीं हो पाई थी। सोना ने पुलिस को बताया कि जयराम उसके घर गया और उसके परिजनों से कहा कि मुनिया की तबीयत बहुत खराब है और कोई उसकी देखभाल करने वाला नहीं है, इसलिए वह मुनिया की देखभाल करने के लिए सोना को दिल्ली ले जाना चाहता है। परिजन इसके लिए राजी हो गए और उन्होंने सोना को भी जयराम के साथ दिल्ली भेज दिया। चूंकि सोना विकलांग थी, इसलिए जयराम को केवल 10 हजार रुपये मिले, वरना अन्य लड़कियों के बदले उसे 15 से 20 हजार रुपये मिलते थे।

सोना को उसकी बहन मुनिया के पास ले जाने के बहाने से राजकुमार, सलीम और पिंकू उसे गुड़गांव के नत्थूपुरा गांव में स्थित एक कमरे पर ले गए, लेकिन वहां कोई नहीं था। वहां पर तीनों आरोपियों ने सोना को जबरन शराब पिलाने और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की, लेकिन किसी तरह सोना ने खुद को बचा लिया। आरोपी दो तीनों दिनों तक कोशिश करते रहे, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। इस बीच वे कोई अच्छा खरीदार तलाशते रहे, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। तब तक सोना भी उनके इरादे भांप चुकी थी। 2 फरवरी की शाम जब ये लोग सोना को कार में लेकर डिफेंस कॉलोनी इलाके से गुजर रहे थे, उसी दौरान सोना ने पानी पीने के बहाने कार रुकवाई और फिर कार से बाहर निकलकर शोर मचा दिया। आरोपियों ने उसे खींचकर ले जाने की कोशिश भी की, लेकिन तब तक लोग इकट्ठा हो गए और मजबूरन उन्हें वहां से भागना पड़ा।

पुलिस के मुताबिक जयराम से लड़कियां खरीदने के बाद राजकुमार और उसके साथी पहले इन लड़कियों का शारीरिक शोषण करते थे और फिर उन्हें 25 से 35 हजार रुपये में प्लेसमेंट एजेंसियों को बेच देते थे। प्लेसमेंट एजेंसी के मालिक कस्टमर से संपर्क करके उनसे अडवांस के रूप में मोटा अमाउंट ले लेते थे। लड़कियों को वहां से घरों पर मेड के तौर पर काम पर भेज दिया जाता। लेकिन कुछ ही दिनों बाद ये लोग लड़कियों को किसी बहाने से वापस बुला लेते थे और इस तरह कस्टमर के पैसे हड़प जाते थे। पुलिस को पता चला है कि इस गिरोह के लोग अब तक 60-70 लड़कियों की खरीद फरोख्त कर चुके हैं। पुलिस इस बारे में विस्तार से छानबीन कर रही है।
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वेलैंटाइन डे. कायरों कामुकों और नपुंसकों के लिये नहीं



वेलैंटाइन डे. कायरों कामुकों और नपुंसकों के लिये नहीं
हर वर्ष की भांति एक बार फिर वेलैंटाइन डे आने वाला है और एक बार फिर कार्ड बेचने वाले कार्ड बेचेंगेए गुलदस्ते बेचने वाले गुल्दस्ते और फूल बेचेंगेए अखबार वेलैंटाइन सन्देश छापने के नाम पर विज्ञापनों का धन्धा करेंगे। एक बार फिर भारतीय संस्कृति को न समझने वाले किंतु उसके नाम पर धन्धा करने वाले भाजपा शासित राज्यों में अपनी गुंडा टोली लेकर निकलेंगे और युवा प्रेमी प्रेमिकाओं के मुँह पर कालिख मलेंगे और मारपीट करेंगे। व्यक्तिगत स्वतंत्रता की हत्या करने वाले इन गुन्डों की सुरक्षा भाजपा शासित राज्य की पुलिस करेगी। एक बार फिर कायर बुद्धिजीवी अपने अपने सुविधा घरों में बैठ कर अखबारों में बयान देंगे। हर वर्ष की तरह यह सन्देश भी दिया जायेगा कि. संत वेलैंटाइन भारत के नहीं थे तो क्या प्रेम के सन्देश पर उनका कापी राइट हो गयाए जबकि राधाकृष्ण की प्रेम कथाओं से लेकर कामसूत्र और खजुराहो जैसी मन्दिर की दीवारों पर अंकित मूर्तियाँ तो हमारी ही बपौती हैं। यदि नई आर्थिक नीति के वैश्वीकरणए उदारीकरणए और निजीकरण के प्रभाववश हम इस दिन को बसंत पंचमीए होलीए या अन्य किसी हिन्दू त्योहार की जगह उस कलेंडर के हिसाब से मनाने लगते हैं जिसके अनुसार हमारे सारे कामकाज़ चल रहे हैं तो क्या प्रेम का अर्थ बदल जायेगा! सच तो यह है कि इस दिन मनाने से इसकी संकीर्णता दूर होकर यह जाति धर्मए भाषा और राष्ट्र तक की सीमाओं से मुक्त होता है और विश्वबन्धुत्व तक पहुँचता है। आज प्रत्येक मध्यम वर्गीय परिवार रंगीन टीवीए डीवीडी प्लेयर या सिनेमा हाल में जो फिल्में देख कर खुश होता है और सपरिवार ताली बजाता है उनमें से नब्बे प्रतिशत में प्रेम कहानी ही होती है। यह सन्देश रोज रोज हर घर में पहुँच रहा है किंतु उससे किसी को कोई शिकायत नहीं होती।

पर मेरा मानना है कि.वेलैंटाइन डे पर इन प्रेमियों को पिटना ही चाहिये क्योंकि वेलैंटाइन डे कायरों कामुकों और नपुंसकों के लिये नहीं होता है। वे जिन फिल्मों को देख कर जीभ लपलपा लड़कियों के पीछे चक्कर लगाते हैं उनसे वे फैशन और अदायें तो सीखते हैं किंतु यह नहीं सीखते कि फिल्म का हीरो एक सुडौल देह का स्वाभिमानी पुरुष होता है और वह अपनी प्रेमिका की ओर उंगली उठाने वाले गुण्डों के हाथ पैर तोड़ देने में स्वयं को घायल करा लेने से लेकर जान की बाज़ी लगा देने में भी पीछे नहीं रहता। यह कैसा लिज़लिज़ा दृष्य होता है कि चन्द भगवा दुपट्टाधारियों के डर से ये तथाकथित प्रेमी या तो उस दिन बाहर ही नहीं निकलते या चुपचाप अपनी प्रेमिका का अपमान बर्दाश्त करते रहते हैं और पिटते हुये संघर्ष भी नहीं करते। ऐसे प्रेमी पिटने ही चाहिये। दूसरी बात यह कि अगर कोई पुरुष प्रेमी प्रेम के अधिकार का पक्षधर है तो इसे यही अधिकार अपनी बहिनों को भी देना पड़ेगाए पर जो प्रेमी अपनी बहिनों को घरों में कैद करके यह अधिकार नहीं देना चाहते और स्वयं लेना चाहते हैं वे साधारण से लम्पट और कामुक हैं और उनका प्रेम किसी विचारपूर्ण निष्कर्ष का हिस्सा नहीं है। इस दोहरेपन के लिये भी वे पिटने के पात्र हैं। जब भी समाज बदलता है तो पुराने समाज को नियंत्रित कर उसे अपने हित में बनाये रखने वाले लोग किसी भी परिवर्तन का विरोध करते हैं। वे एक संगठित संस्था का बल रखते हैं इसलिये इक्कों दुक्कों पर भारी पड़ते हैं। ये वेलंटाइन डे मनाने वाले स्वयं इतने अपराधबोध से ग्रस्त रहते हैं कि न तो वे अपना कोई संगठन ही बनाते हैं और ना ही अपने जैसों की मदद ही करते हैं। इसलिये ये पिटते हैं और हर वर्ष की भांति पिटते ही रहेंगे जब तक कि गुंडों को उन्हीं की भाषा में जबाब नहीं देते।

शायद इसी पिटने से कोई राह निकल

About वीरेन्द्र जैन

Tuesday, February 8, 2011

नई दिल्‍ली। राजधानी और एनसीआर में अपराधों का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ता नज़र आ रहा है। इस बार इंसान रूपी दरिंदों का शिकार हुई है दिल्‍ली के आरके पुरम में


नई दिल्‍ली। राजधानी और एनसीआर में अपराधों का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ता नज़र आ रहा है। इस बार इंसान रूपी दरिंदों का शिकार हुई है दिल्‍ली के आरके पुरम में रहने वाली दसवीं की छात्रा। उसके पड़ोस में रहने वाले तीन दोस्‍तों उसे घुमाने के बहाने एक फ्लैट में ले गए और वहां उसके साथ मिलकर सामूहिक बलात्‍कार की वारदात को अंजाम दिया।

पीडि़त लड़की पहले तो डरी सहमी रही और बात को दबाए रही, लेकिन जब बर्दाश्‍त के बाहर हो गया तो उसने अपनी व्‍यथा अपने परिजनों को सुनाई तो माता-पिता के होश उड़ गए। माता पिता ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक आरके पुरम के सेक्टर-6 स्थित सरकारी आवास में रहने वाली छात्रा केरल की है। वह चाणक्‍यपुरी के एक स्‍कूल में पढ़ती है।

छात्रा का पड़ोसी मोहित पाल अकसर उससे बातचीत करता था। दोनों में दोस्‍ती हो गई। गत 2 फरवरी को मोहित ने छात्रा को घूमने चलने का ऑफर दिया, जिसे स्‍वीकार करते हुए लड़की उसके साथ चली गई। दोनों पहले एक रेस्‍त्रां गए और वहां खाना खाया फिर वो बाइक से छात्रा को मोहम्‍मदपुर स्थित एक फ्लैट में लेकर गया, जहां उसके दोस्‍त शरद कुमार और अजीत मौजूद थे। तीनों ने मिलकर वहां उसके साथ गैंगरेप किया।

फिर उसे घर के पास छोड़कर चले गए। साथ ही उसे किसी को नहीं बताने की धमकी भी दी। लड़की डरी सहमी रही, लेकिन 5 फरवरी को जब सारी बातें अपनी मां को बताई तो उसके माता-पिता पुलिस के पास पहुंचे। चिकित्‍सीय जांच में रेप की पुष्टि होने पर पुलिस ने मोहित, अजीत और शरद को गिरफ्तार कर लिया।

कुल मिलाकर इस वारदात से लड़कियों के लिए एक सीख जरूर निकलकर सामने आती है, कि वो आंख बंद कर किसी भी लड़के पर विश्‍वास नहीं करें चाहे वो कितना ही करीबी दोस्‍त क्‍यों न हो। इस बारे में आप क्‍या सोचते हैं, अपनी राय नीचे कमे

जेएनयू के हॉस्‍टल में छात्रों ने बनाई ब्‍लू फिल्‍म, जांच शुरू


नई दिल्ली। राजधानी के जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय (जेएनयू) के एक को-हॉस्‍टल से एक सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है। यहां के कुछ छात्रों ने मिलकर हॉस्‍टल में ब्‍लू फिल्‍म बनायी। छात्रों ने यह काम पैसा कमाने के उद्देश्‍य से किया, लेकिन जब उनके मंसूबे पूरे नहीं हुए, तो उनमें से एक ने इस फिल्‍म को सार्वजनिक कर दिया। फिल्‍म के आम लोगों के हाथों में पहुंचने पर सोमवार को इस मामले का खुलासा हुआ। दिल्‍ली पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जबकि जेएनयू प्रशासन इस मामले पर पूरी तरह मौन है।

हिन्‍दी अखबार दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के मुताबिक जेएनयू के एक को-हॉस्‍टल (जहां लड़के, लड़की दोनों रहते हैं) में भाषा विज्ञान से जुड़े कोर्स कर रहे कुछ छात्र-छात्राओं ने कुछ महीने पहले ब्‍लू फिल्‍म बना डाली। छात्रों में एक कंप्‍यूटर विज्ञान का छात्र भी शामिल है। ये छात्र जब इस फिल्‍म के माध्‍यम से मोटी रकम नहीं कमा पाए, तो उनमें फूट पड़ गई। छात्रों के बीच मारपीट भी हुई और मामला दब गया, लेकिन सोमवार को अचानक इस अश्‍लील वीडियो के बाजार में आने पर जेएनयू छात्रों, शिक्षकों और प्रशासन के होश उड़ गए।

ब्‍लू फिल्‍म के पात्र यहीं के छात्र ही हैं, जिनमें दो बिहार के हैं व अन्‍य दो दिल्‍ली के। पत्रकारों से बातचीत में जेएनयू के चीफ प्रॉक्‍टर ने ब्‍लू फिल्‍म बनाए जाने की बात स्‍वीकार तो ली है, लेकिन आगे कुछ भी नहीं बोले। उन्‍होंने सिर्फ इतना कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच के बाद ही वो कुछ स्‍पष्‍ट रूप से कह सकते हैं। इस खबर के बाद जेएनयू के छात्रों के किसी बड़े सेक्‍स स्‍कैंडल से जुड़े होने की आशंका भी जताई जा रही है।

इटली में हनीमून मनाएंगे वरुण गांधी


इटली में हनीमून मनाएंगे वरुण गांधी07/02/2011
बीजेपी सांसद वरुण गांधी 6 मार्च को बंगाली ब्राम्हण यामिनी रायचौधरी के साथ शादी रचाएंगे। शादी वाराणसी के कांची मठ में होगी। विवाह कांची शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती करवाएंगे। कांची मठ के सात पुजारी पहले दिल्ली आएंगे और यहां विवाद के पहले की रस्में अदा करने के बाद, सभी वाराणसी जाएंगे। कांची मठ को दुल्हन यामिनी रायचौधरी की मां ने पसंद किया है, जो वहां लंबे समय से जाती रही हैं। उन्होंने अपनी बेटी की शादी के लिए शॉपिंग भी वाराणसी से ही की है। शादी और रिसेप्शन के बाद अपनी नवविवाहिता के साथ वरुण गांधी हनीमून मनाने इटली चले जाएंगे.

करीब सौ साल के अंतराल के बाद गांधी परिवार का कोई सदस्य किसी ब्राह्मण से विवाह रचा रहा है। इसके पहले ऐसा 1916 में हुआ था, जब देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कमला कौल से शादी की थी। कमला कश्मीरी ब्राह्मण थीं। वरुण की दादी इंदिरा गांधी, पिता संजय, पिता के बड़े भाई राजीव, उनकी बेटी प्रियंका, सभी ने गैर-ब्राह्मण समाज में विवाह किया है। यामिनी फिल्म क्रिटिक अरुणा वासुदेव की बेटी हैं। यामिनी खुद दिल्ली में ग्राफिक्स डिजाइनिंग का काम करती हैं। उन्होंने सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद पेरिस की सोरबोन यूनिवर्सिटी से फाइन आर्ट्स का कोर्स किया है।

इंदिरा गांधी द्वारा मेनका को दी साड़ी पहनेंगीं यामिनी: विवाह के अवसर पर यामिनी स्वर्गीय इंदिरा गांधी द्वारा मेनका गांधी को दी गई साड़ी पहनेंगीं। उन्होंने यह साड़ी मेनका को पुत्र संजय से शादी के समय दी थी। गुलाबी रंग की इस बनारसी साड़ी में सुनहरे रंग की बेलें बनी हुई हैं। शादी के बाद 8 मार्च को दिल्ली में रिसेप्शन है। इस दिन यामिनी 100 साल पुरानी नारंगी रंग की बनारसी साड़ी पहनेंगीं, जो स्वर्गीय कमला नेहरू ने इंदिरा गांधी को दी थी। वरुण शादी के दिन खुद सफेद धोती कुर्ते में रहेंगे। शादी के बाद पूरा परिवार एक विशेष विमान से दिल्ली लौट आएगा। शादी में गांधी परिवार के काफी करीबी लोगों को ही बुलाया गया है।

उत्तर प्रदेश के विभिन्न राजघरानों के कई सदस्य शादी में हिस्सा ले रहे हैं, इनमें काशी, बिजनौर, मनकपुर और अयोध्या के राजघराने शामिल है। करीब 1200 लोग शामिल होंगे। दिल्ली में होने वाले रिसेप्शन में करीब 1200 लोगों को आमंत्रित किया गया है। इस अवसर पर कश्मीर, बंगाल, अवध, राजस्थान, पंजाब, गुजरात, केरल, कर्नाटक आदि प्रदेशों का वेजीटेरियन भोजन मीनू में शामिल किया गया है। वरुण अप्रैल में दक्षिण इटली के अमालफी द्वीप पर हनीमून मनाने जाएंगे।

मीडिया ने उठाया मुद्दा, सन्नाटे में समाया जेएनयू


दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के तात्पी छात्रावास में शूट िकये गये 25 मिनट के एक 'नीले' वीडियो का मुद्दा मीडिया ने उठा लिया है. कल और आज दिल्ली से प्रकाशित होनेवाले कई बड़े अखबार इसे अपनी बड़ी खबर बना रहे हैं.

मंगलवार को टाइम्स आफ इंडिया, दैनिक जागरण, मेल टुडे, पायनियर सहित कई अन्य अखबारों ने इस खबर को पहले पन्ने पर लिया है जिसके कारण पूरा जेएनयू कैम्पस इस मुद्दे पर सन्नाटे में समा गया है. कथित तौर पर अप्रैल 2010 में ताप्ती छात्रावास के एक कमरे में शूट किये गये इस विडियो के तार सेक्स रैकेट से भी जुड़े हुए हो सकते हैं. जेएनयू प्रशासन और पुलिस महकमा भी मान रहा है कि हाई डेफिनेशन कैमरे पर शूट किया गया यह विडियो सेक्स रैकेट का हिस्सा भी हो सकता है. हालांकि जेएनयू प्रशासन यह दलील दे रहा है कि उसकी नजर में पिछले हफ्ते ही यह मामला आया है और जैसे ही उसकी नजर में यह मामला आया उसने तत्काल वसंत कुंज थाने को इस बारे में इत्तिला कर दी और अब पुलिस इस मामले में जांच कर रही है. खबर है कि सोमवार को पुलिस ने इस बारे में दो छात्रों से पूछताछ भी की है.
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई अपनी जगह लेकिन इस "सेक्स काण्ड" के सामने आने से जेएनयू प्रशासन और यहां का छात्र दोनों ही सकते में हैं. एक ओर मीडिया में मुद्दा गरमाया है कि देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में यह क्या हो रहा है तो जेएनयू सन्नाटे में है. देश की हर छोटे बड़े मुद्दे पर गंभीर चर्चा करनेवाला जेएनयू इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रहा है. यहां की चर्चाओं में फिलहाल सेक्स रैकेट का मसला गायब है.

जेएनयू से जुड़े छात्र कह रहे हैं कि यह जेएनयू के चेहरे पर इतना बदनुमा दाग है कि यहां लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि क्या प्रतिक्रिया दें. फिलहाल जो प्रशासन पिछले छह महीने से इस मसले पर लीपापोती कर रहा था, वह अब बोल रहा है और कह रहा है कि वह इस मामले को पुलिस में दे चुका है. लेकिन सवाल यह है कि छह महीने तक वह चुप क्यों बैठा रहा जबकि कैंपस में इस विडियो की धूम पिछले छह आठ महीने से मची हुई है. कुछ महीने पहले किसी ने इस विडियो को लाइब्रेरी के कई कम्प्यूटरों पर भी डाल दिया था. अब तो पुलिस की जांच में ही कोई नतीजा सामने आ सकता है कि क्या वास्तव में जेएनयू किसी सेक्स रैकेट की गिरफ्त में जा चुका है?

यह है वह लड़का जिसने जेएनयू को किया शर्मसार


जेएनयू सेक्स रैकेट में पुलिस की जांच पड़ताल शुरू हो गयी है. लेकिन आखिर वह कौन है जिसने दूर बिहार से पढ़ने आई एक लड़की को अपने मोहपाश में फंसाता है और उसका सेक्स विडियो बनाता है. लड़की जेएनयू छोड़कर जा चुकी है.

जेएनयू में भाषा की छात्र रही वह लड़की अब अपनी नयी दुनिया बसा चुकी है और उसे शायद इस बात का भान भी नहीं होगा कि उसके नाम पर एक बदजात सहपाठी ने क्या गुल खिला दिया है. बेशर्मी की हद तो यह है कि इतना सब होने के बाद भी वह लड़का आज भी जेएनयू का सम्मानित छात्र है.

मूलत: गया का रहनेवाला यह लड़का यहां भाषा विभाग में कोरियन लैंग्वेज का तीसरे साल का छात्र है. इसका नाम है जनार्दन वर्मा. इसी लड़के ने उस लड़की को बहला-फुसलाकर उसके साथ नाजायज संबंध बनाए और न केवल इतना किया बल्कि उसका एक विडियो भी तैयार किया. इतना सब होने के बाद भले ही जेएनयू प्रशासन यह दावा कर रहा है वह इस मामले की जांच कर रहा है लेकिन अभी तक उस लड़को को न तो हास्टल से बाहर जाने के लिए कहा गया है और न ही उसे कैंपस से बाहर निकाला गया है.

छात्रों में इस बात को लेकर गहरा असंतोष है कि इतना सब कुछ होने के बाद उस लड़के को कैसे जेएनयू में कैसे बना कर रखा गया है. हालांकि चीफ प्राक्टर ने एक अखबार से बात करते हुए कहा है कि अगर उस लड़के को परिसर से निकाल दिया तो पूछताछ की कार्रवाई कैसे पूरी होगी? जेएनयू के छात्रों का कहना है कि यह सिर्फ अनुशासन का मामला नहीं है बल्कि जघन्य अपराध है और इस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे विश्वविद्यालय से बाहर कर दिया जाना चाहिए.