Tuesday, April 20, 2010

नवभारत के मालिक प्रफुल्ल माहेश्वरी फर्जीवाड़ा करते सी.बी.आई. की चपेट में

नवभारत के मालिक प्रफुल्ल माहेश्वरी फर्जीवाड़ा करते सी.बी.आई. की चपेट में
भोपाल । नवभारत (म.प्र.) के मालिकों ने जो धोखाधड़ी की घटना ने पत्रकारिता को शर्मासार कर दिया। मशीन के नामपर 16 करोड़ के प्रकरण से सभी हतप्रभ है। प्रजातन्त्र के चौथे स्तंभ पर सबकी नज़र रहती है सरकार और जनता के मध्य सेतू की भूमिका निभाता है परन्तु इन दिनों चौथे स्तंभ ने भी बड़े व्यापारी की भूमिाक अदा कर रहे है और व्यापारी अधिक पैसा कमाने के लिये कई तरह के गलत कार्य कर बैठता है। एक नहीं कई उल्टे कार्य दैनिक नवभारत (म.प्र.) के मालिकों द्वारा किये गये, एन.बी. प्लाटेंशन में करोड़ों रुपये जनता से लेकर डकार गये न्यायालय से धारा 138 के कई प्रकरण है जिनमें कई गैर जमानती वारंट जारी है परन्तु पुलिस विभाग समाचार पत्र मालिक एवं पूर्व सांसद होने के कारण प्रफुल्ल माहेश्वरी को गिरतार नहीं कर पा रही है जो आम जनता के साथ अन्याय तथा न्यायालय की अवमानना है इतना ही नहीं प्रफुल्ल माहेश्वरी ने समाज को मिली सरकारी जमीन को भी बेच दिया था आपत्ति लगने पर जमीन बिकने से रुकी ऐसे अनेकों प्रकरण है। ताजा महाराष्ट्र बैंक प्रकरण में केन्द्रीय जांच ब्यूरो, दिल्ली की टीम ने शुक्रवार को फर्जी लोन के मामले में राजधानी के बैंक अ‚फ महाराष्ट्र एवं मेसर्स नवाारत प्रेस के मालिक माहेश्वरी ग्रुप के आवास और सात ठिकानों पर छापे की कार्रवाई की है। साथ ही फर्जी लोन के मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद प्रफुल्ल माहेश्वरी, सन्दीप माहेश्वरी, संजीव माहेश्वरी, श्रीमती बृज माहेश्वरी से भी पूछताछ की गई है। सीबीआई के एडीजीपी हर्ष बहल ने बताया कि वर्ष 2004 में माहेश्वरी के एमपी नगर जोन वन स्थित नवाारत प्रेस में मशीनरी लगाने के लिए बैंक अ‚फ महाराष्ट्र से 15.67 करोड रुपए ऋण के लिए आवेदन किया गया था। बैंक से मंजूरी मिलने के बाद बैंक मैनेजर राजन मल्होत्रा के सहयोग से चार व्यतियों सन्दीप चौरसिया, प्रदीप चौरसिया, राकेश भाटिया, अशोक सिंह के नाम से फर्जी एकाउंट खोले गए थे और पूरी ऋण राशि इन्हीं फर्जी एकाउंट में ट्रांसफर करा ली। इस पूरे मामले में बैंक को धोखा देने के आरोप में सीबीआई ने नवाारत प्रेस के डायरेटर प्रफुल्ल माहेश्वरी, संजीव माहेश्वरी, सन्दीप माहेश्वरी सहित चार निजी लोगों के खिलाफ 420 का मामला दर्ज कर लिया है। इसी सिलसिले में बैंक अ‚फ इण्डिया और सेंट्रल बैंक में भी सीबीआई की टीम पहुंची थी।

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वर्ष 2007 से पत्रकार शलभ भदौरिया, विष्णु वर्मा पर धारा 120 बी,420, 467, 468, 471 भादवि में मामला ई.ओ.डब्ल्यू. में पंजीबध्द प्रकरण मुख्य न्यायायिक दण्डाधिकारी हेतु तैयार दबाव से रूका है।
भोपाल। जानकारी के अनुसार राय आर्थिक अनवेषण ब्यूरो भोपाल में प्रकरण क्रमांक 0506 पंजीयन दिनांक 23.2.06 को हुआ। प्रकरण का घटना स्थल पत्रकार भवन है। प्रकरण में फरियादी गुलाबसिंह राजपूत थाना प्रभारी रा.आ.अप. अन्वेषण ब्यूरो भोपाल है जिसमें सन्देहीआरोपी शलभ भदौरिया एवं विष्णु वर्मा विद्रोही है जिसकी विवेचना 30.10.2007 को पूर्व कर पुलिस अधीक्षक सुधीर लाड़ ब्यूरो इकाई भोपाल ने की। ब्यूरो में पंजीबध्द प्रकरण में श्रमजीवी पत्रकार मासिक पत्र का आर.एन.आई. प्रमाण पत्र क्र. 327672 दिनांक 12.8.72 दिया वह स्पूतनिक तेलगू पाक्षिक राजमून्दरी आंध्र प्रदेश का पाया गया।
उक्त प्रमाण फर्जी पत्र के आधार पर शलभ भदौरिया एवं विष्णु वर्मा विद्रोही ने डाक पंजीयन कराकर जनवरी 2003 से अगस्त 2003 तक 34.755 रु. का अवैध रूप से आर्थिक लाभ लिया। बुक पोस्ट की दरों में वृिध्द के कारण राशि 1,40625 हुई। अतरू प्रथम –ष्टा अन्तर्गत धारा 120 बी, 420, 467, 468, 471 भादवि का दण्डनीय पाये जाने से प्रकरण पंजीबध्द किया। पत्र के सम्बंध्द में विष्णु वर्मा ने जानकारी दी कि श्रमजीवी पत्रकार की 4500 प्रतियां प्रतिमाह सदस्यों को भेजी जाती है। झूठे प्रमाण पत्र के आधार पर आरोपी शलभ भदौरिया एवं विष्णु वर्मा द्वारा सांठगांठ कर कूट रचना की। जप्त दस्तावेजों के आधार एवं शलभ भदौरिया एवं विष्णु वर्मा के द्वारा दिये दस्तावेज एवं मौखिक साक्ष्य के आधार पर आरोप पूर्ण रूप से सत्य पाये।
जनसम्पर्क विभाग की सक्रियता एवं नियमों का पालन करने के कारण विभाग ने समस्त समाचार पत्र पत्रिकाओं मासिक एवं साप्ताहिक को विज्ञापन नीति के परिपालन के लिये आर.एन.आई. प्रमाण पत्र मांगे तब श्रमजीवी पत्रकार मासिक पत्र के प्रमाण पत्र की प्रति विष्णु वर्मा द्वारा दी गई 15.5.2002 को जांच में पाया गया कि वर्ष 1999 से 2003 तक श्रमजीवी पत्रकार समाचार पत्र के प्रधान संपादक शलभ भदौरिया थे तथा इनके द्वारा कार्यालय कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी भोपाल, प्रवर अधीक्षक डाक घर भोपाल में भी शलभ भदौरिया द्वारा हस्ताक्षरित दस्तावेज प्रस्तुत किये। फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर आर्थिक लाभ प्राप्त कर भारत शासन के साथ धोखाधड़ी कर शासन को 1,74970 रुपये की आर्थिक क्षति की।
मामला सम्पूर्ण दस्तावेजों एवं जांच रिपोर्ट के बाद महानिदेशक आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को वर्ष 2007 में भेजा जा चुका है जिसे माननीय मुख्य न्यायायिक दण्डाधिकारी महोदय जिला भोपाल में प्रस्तुत करना है। -राधावल्लभ शारदा
प्रदेश अध्यक्ष वकिंZग जर्नलिस्ट यूनियन

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