Tuesday, November 30, 2010

स्पेक्ट्रम’ आखिर है क्या ?



‘स्पेक्ट्रम’ आखिर है क्या ?
17 वीं सदी में महान वैज्ञानिक इसाक न्यूटन ने एक ऐसा प्रयोग किया जिसने साइंस की धारा ही बदल दी। उन्होंने अपनी प्रयोगशाला के सभी खिड़की दरवाजे बंद कर दिए। फिरभी प्रयोगशाला में पूरा अंधेरा नहीं हो सका, क्योंकि खिड़की की एक दरार से सूरज की किरण भीतर आ रही थी। न्यूटन ने मुस्कराते हुए शीशे का एक छोटा प्रिज्म उठाया और उसे सूरज की उस किरण के सामने ले गए। एक जादू सा हो गया और सूरज की रोशनी का रहस्य सामने आ गया। सामने रखे एक सफेद बोर्ड पर इंद्रधनुष खिल उठा, दरअसल शीशे के प्रिज्म ने सूरज की रोशनी में मौजूद सात उन रंगों को अलग कर दिया था। हमारी आंख जो कुछ भी देखती है वो इन सात रंगों की सीमा में ही सिमटा रहता है। न्यूटन ने सूरज की रोशनी में छिपे इन सात रंगों को स्पेक्ट्रम कहा, और फिजिक्स में एक नई शुरुआत हो गई।
हमारा सूरज और एक साधारण अणु ये दोनों ही स्पेक्ट्रम के प्राकृतिक स्रोत हैं। आज स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल हम हर रोज जाने-अनजाने करते रहते हैं, टीवी के रिमोट से लेकर लैपटॉप पर वॉयरलेस इंटरनेट, माइक्रोवेव ओवेन, खिली-खिली धूप और मोबाइल फोन तक सब स्पेक्ट्रम का ही कमाल है। न्यूटन ने हमें स्पेक्ट्रम के गुण के बारे में बताया लेकिन स्पेक्ट्रम की वजह को गहराई से समझा महान भारतीय वैज्ञानिक सर सी.वी. रमन ने। रमन ने अगर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम का राज नहीं समझा होता तो आज न तो रिमोट होता और न मोबाइल फोन। हर अणु परमाणुओं सो बनता है और हर परमाणु के केंद्र में एक नाभिक होता है, जिसमें प्रोटान और न्यूट्रॉन होते हैं और अलग-अलग कक्षाओं में परिक्रमा करते इलेक्ट्रान चारों ओर से नाभिक को घेरे रहते हैं। अब शुरू होता है असली खेल, जब परमाणु को गर्म किया जाता है तो नाभिक की परिक्रमा करते इलेक्ट्रान अपनी कक्षा से छलांग लगाकर और ऊपर वाली कक्षा में पहुंच जाते हैं। इसी तरह जब परमाणु को ठंडा किया जाता है तो नाभिक की परिक्रमा कर रहे इलेक्ट्रान निचली कक्षाओं में गिर जाते हैं। सबसे खास बात ये कि नाभिक के चारोंओर घूमता इलेक्ट्रान जब भी अपनी कक्षा से ऊपर छलांग लगाता है या नीचे गिरता है, उस वक्त वो खास स्पेक्ट्रम छोड़ता है। इसे कहते हैं इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम। रमन ने पता लगाया कि कुदरत में मौजूद सभी धातुओं, खनिजों, गैसों और तरल का स्पेक्ट्रम बिल्कुल अलग-अलग होता है। ये स्पेक्ट्रम बिल्कुल उंगलियों के निशान जैसा होता है यानि हर तत्व का स्पेक्ट्रम बिल्कुल अलग और अनोखा। इस खोज के लिए रमन को भौतिकी के नोबेल से सम्मानित किया गया और तत्वों से निकलने वाले स्पेक्ट्रम को रमन इफेक्ट कहा गया। आज रमन इफेक्ट से ही हम चंद्रमा और मंगल ग्रह मौजूद खनिजों का पता लगा रहे हैं, और खोजे जा रहे नए ग्रहों के बारे में यहीं बैठे-बैठे बता सकते हैं कि वहां पानी है या नहीं, या उसका वातवरण कैसा है।
इलेक्ट्रोमैगनेटिक रेडिएशन की वजह जानने के बाद अब मनचाही स्पेक्ट्रम को हासिल करना आसान हो गया, और यहीं से स्पेक्ट्रम के कारोबारी इस्तेमाल की शुरुआत हुई। फ्रीक्वेंसी और वेवलेंथ हर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन की खास पहचान होती है, और इसी के आधार पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन को रेडियो, माइक्रोवेव, इंफ्रारेड, विजिबिल, अल्ट्रावॉयलेट, एक्स-रे और गामा-रे की पहचान की गई। ये सारी स्पेक्ट्रम, जिन्हें हम रेडिएशन भी कह सकते हैं, इनमें से कुछ हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचाती और हमारे बेहद काम की हैं, जैसे रेडियो जिससे हम टीवी के प्रोग्राम्स देखते हैं, माइक्रोवेव जिससे सेटेलाइट संचार और ओवन से लेकर मोबाइल फोन तक काम करते हैं और इंफ्रारेड जिसपर सभी रिमोट काम करते हैं। समुद्र के किनारे की धूप में 53 फीसदी इन्फ्रारेड, 44 फीसदी दिखाई देने वाली रोशनी और 3 फीसदी अल्ट्रावॉयलेट किरणें होती हैं। अल्ट्रावॉयलेट, एक्स-रे और गामा-रे स्पेक्ट्रम बेहद खतरनाक हैं और इनके संपर्क में कुछ देर रहने से ही हम बीमार पड़ सकते हैं।
मोबाइल, सेटेलाइट और टेलीविजन इन तीनों में माइक्रोवेव और रेडियो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल किया जाता है। अब सवाल ये कि आखिर इसका कारोबारी इस्तेमाल कैसे होता है? दरअसल किसी स्पेक्ट्रम का कारोबारी इस्तेमाल इन बातों से तय होता है कि उसकी तरंग की लंबाई कितनी है, उसकी फ्रिक्वेंसी (वेवलेंथ या साइकल प्रति सेकंड) क्या है और वो कितनी ऊर्जा कितनी दूर तक साथ ले जा सकती है।
रेडियो वेव स्पेक्ट्रम से लंबी दूरी तय की जा सकती हैं और वह भी बिना किसी दिक्कत के। रेडियो वेव स्पेक्ट्रम की तरंगें काफी लंबी होती हैं। इनकी वेवलेंथ 1 किलोमीटर से लेकर 10 सेंटीमीटर तक की होती है और फ्रिक्वेंसी भी 3 किलोहट्र्ज (3,000 साइकिल प्रति सेकंड) से लेकर 3 गीगाहट्र्ज (3 अरब साइकिल प्रति सेकेंड) तक के बीच होती है। रेडियो तरंगों को सबसे ज्यादा असर भाप और आयन से होता है। साथ ही, इन पर सोलर फ्लेयर और एक्सरे किरणों के विस्फोट का भी असर होता है। साथ ही, पहाड़ों की वजह से भी रेडियो तरंगों से संचार में काफी असर पड़ सकता है। छोटी फ्रिक्वेंसी मकानों और पेड़ों को भी पार कर सकती हैं। साथ ही, ये पहाड़ों के किनारे से भी निकल सकती हैं।
माइक्रोवेव स्पेक्ट्रम का सबसे फायदेमंद इस्तेमाल दूरसंचार और इंटरनेट में होता है। दूरसंचार और ब्रॉडबैंड के लिए 700-900 मेगाहट्र्ज की छोटी फ्रिक्वेंसी काफी फायदेमंद होती हैं। सेंटीमीटर और मिलीमीटर की रेंज वाली माइक्रोवेव्स की फ्रिक्वेंसी 300 गीगाहट्र्ज तक हो सकती है। इसके अलग-अलग प्रकार के इस्तेमाल को देखते हुए इसे अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। खाना पकाने वाले माइक्रोवेव में सैकड़ों वॉट बिजली का इस्तेमाल आरएफ वेवलेंथ को पैदा करने में होता है। ये वेवलेंथ 32 सेमी (915 मेगाहट्र्ज) से लेकर 12 सेमी (2.45 मेगाहट्र्ज) तक के होते हैं। छोटी ऊर्जा स्रोतों वाले उपकरणों से पैदा होने वाले माइक्रोवेव का इस्तेमाल संचार के साधनों के रूप में होता है और ये काफी कम ऊर्जा पैदा करते हैं। इन्फ्रारेड वेव छोटी होती हैं और वे काफी गर्म होती हैं। लंबी दूरी वाले इन्फ्रारेड बैंड्स का इस्तेमाल रिमोट कंट्रोल के लिए होता है। साथ ही, इनका इस्तेमाल बहुत कम गर्मी पैदा करने वाले बल्बों में होता है।
2जी और 3जी
किस स्पेक्ट्रम पर हम बात करेंगे और किस स्पेक्ट्रम पर सेटेलाइट डेटा भेजे जाएंगे, इस जैसे तमाम मुद्दों की बागडोर संभाल रखी है इंटरनेशनल कम्युनिकेशन यूनियन ने। संयु्क्त राष्ट्र की इस इकाई ने सभी सदस्य देशों को अलग-अलग स्पेक्ट्रम के बैंड्स आवंटित कर रखे हैं। इसमें कोई देश मनमानी या एक-दूसरे के कामकाज में बाधा नहीं पहुंचा सकता। इन नियमों के तहत 1980 में 1-जी यानि फर्स्ट जनरेशन वायरलेस टेक्नोलॉजी की शुरुआत हुई, पहले पहल जिसका इस्तेमाल कार फोन में किया गया। 2-जी यानी सेकेंड जनरेशन वायरलेस टेलीफोन टेक्नोलॉजी की शुरुआत 1990 में हुई। 1991 में पहली बार फिनलैंड में रेडियोलिंजा कंपनी की ओर से जीएसएम मोबाइल सर्विस में 2-जी टेक्नोलॉजी का कारोबारी इस्तेमाल शुरू हुआ। डाटा ट्रांसफरिंग, टेक्स विथ रेडियो सिग्नल्स आदि सुविधाओं से हुई शुरुआत में जल्दी ही सीडीएमए का प्रवेश भी हो गया। अब आ गई है बारी 3-जी यानि थर्ड जनरेशन मोबाइल टेक्नोलॉजी की। 3-जी में डाटा का हस्तांतरण तेजी से होता है और नेटवर्क भी अच्छा होता है। 2जी स्पेक्ट्रम की बात करें तो ये हमारी सरकार के पास इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशंस यूनियन से आवंटित एक खास रेडियो वेव बैंड है। सिग्नल भेजने के लिए मोबाइल कंपनियों को फ्रिक्वेंसी रेंज की जरूरत थी। सरकार ने लाइसेंस फी लेकर स्पेक्ट्रम मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर्स को जारी किए।
खास बात ये कि 2-जी और 3-जी के स्पेक्ट्रम में कोई खास अंतर नहीं है। बस सरकार के नियमन और इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशंस यूनियन ने सदस्य देशों के बीच बेहतर तारतम्यता के तहत इसके लिए अलग स्पेक्ट्रम घोषित किया गया है। दोनों नेटवर्क 800-900 और 1800-1900 मेगाहट्र्ज पर काम करते हैं और कर सकते हैं। कमाई में इजाफे को देखते हुए अनुमानों के मुताबिक 900 मेगाहट्र्ज के 3जी में 2.1 गीगाहट्र्ज से कम लागत लगती है। फिनलैंड, आइसलैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, थाईलैंड, वेनुजुएला, डेनमार्क और स्वीडन में तो 900 मेगाहट्र्ज (2जी स्पेक्ट्रम) पर ही 3जी नेटवर्क मौजूद है। फ्रांस भी अब 2जी की जगह 3जी को बढ़ावा दे रहा है। इससे पता चलता है कि भारत में सरकारी और रक्षा इस्तेमालों की वजह से स्पेक्ट्रम की कितनी ज्यादा किल्लत है। हमें अपनी जरूरतों, लैंडलाइन फोनों की कम पहुंच और लागत को देखते हुए अपनी क्षमता के विस्तार के नए तरीकों की तलाश करनी होगी। दूसरे मुल्कों में कंपनियां इस स्पेक्ट्रम का अपनी इच्छा के मुताबिक इस्तेमाल करने के लिए मुक्त हैं, जबकि अपने मुल्क में इस बारे में कोई तस्वीर ही स्पष्ट नहीं है। हमारी नीतियों कम कीमत पर ज्यादा अच्छी कवरेज या क्षमता के बारे में स्थिति को स्पष्ट कर सकती हैं। इससे लोगों को कम कीमत पर अच्छी सेवा मिलेगी।

भारत सरकार के ‘ऑपरेशन ग्र्रीन हंट’ की निंदा की गई है।


नेपाली माओवादी पार्टी ने नक्सलियों के खिलाफ एक वर्ष पूर्व शुरू किए गए भारत सरकार के अभियान ‘ऑपरेशन ग्रीन हंट’ की निंदा करते हुए आधिकारिक तौर पर प्रतिक्रिया जताई हैं। गौरतलब है कि भारत कई बार नेपाली माओवादियों पर नक्सलियों की मदद करने का आरोप लगा चुका है लेकिन हर बार माओवादी इससे इनकार करते रहे हैं। हालांकि नक्सलियों के साथ नेपाली माओवादियों की सहानुभूति ऐसे समय में सामने आई है, जब भारतीय नक्सलियों पर चुप्पी साधने के लिए माओवादी प्रमुख पुष्प कमल दहल प्रचंड को पार्टी बैठक में आक्रोश का सामना करना पड़ा।
‘ऑपरेशन ग्रीन हंट’ की निंदा
शनिवार को पश्चिमी नेपाल के एक दूरवर्ती गांव में खत्म हुई माओवादी पार्टी की सप्ताह भर लंबी आम बैठक में औपचारिक रूप से भारत सरकार के ‘ऑपरेशन ग्र्रीन हंट’ की निंदा की गई है। यह अभियान भूमिगत नक्सलियों को बाहर निकालने के लिए देश के पांच राज्यों में नवंबर 2009 में शुरू किया गया था। बैठक में आरोप लगाया गया कि भारत ऑपरेशन ग्रीन हंट के नाम पर नागरिकों का उत्पीड़न कर रहा है। 14 सूत्रीय बयान में चेरुकुरी राजकुमार उर्फ आजाद की ‘अनैतिक’ और ‘सुनियोजित’ हत्या की भी आलोचना की गई है। चेरुकुरी राजकुमार नक्सलियों का प्रवक्ता था। पार्टी ने भारत सरकार से नक्सलियों के साथ शांतिपूर्ण ढंग से समस्या के समाधान की भी अपील की है।
नेपाली माओवादियों का रुख शुरुआत से ही भारत विरोधी रहा है। माओवादी 1996 में शुरू किए गए अपने दस वर्ष लंबे संघर्ष के दौरान 1950 में हुई भारत-नेपाल शांति और मित्रता संधि समेत अन्य समझौतों को खत्म करने की मांग करते रहे हैं। इसके अलावा माओवादी भारतीय सैनिकों की वापसी और देश में कार्यरत भारतीय कंपनियों को हटाने के खिलाफ प्रदर्शन करते रहे हैं।
बैठक अनिश्चितता के बीच समाप्त
बैठक में माओवादियों के भावी रणनीति तैयार किए जाने की संभावना थी, लेकिन प्रचंड और उनके दो सहायकों के बीच उभरे मतभेद के कारण बैठक अनिश्चितता के बीच समाप्त हो गई। घरेलू प्रतिक्रियावादी ताकतों और विदेशी हस्तक्षेप के कारण नए संविधान के मई 2011 तक लागू नहीं हो पाने की स्थिति में प्रचंड नए विद्रोह की घोषणा कर सकते हैं। माओवादी हालांकि पिछले वर्ष प्रचंड की सरकार गिरने, जन समर्थन हासिल करने और सत्ता में वापसी के प्रयास विफल होने के बाद से ही एक नए जन संघर्ष की वकालत कर रहे हैं। इस आम बैठक में लगभग 20,000 माओवादी लड़ाकों के महत्वपूर्ण मुद्दों को नहीं निपटाया जा सका। इन लड़ाकों को शांति समझौता होने के चार वर्ष बाद भी मुक्त नहीं किया जा सका है। दिक्कत यह है कि जब तक माओवादियों की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को भंग नहीं कर दिया जाता, तब तक नए संविधान की घोषणा किए जाने को लेकर अन्य पार्टियां राजी नहीं हैं। पीएलए के पुनर्वास के लिए फिलहाल 50 दिन से भी कम समय शेष है, क्योंकि पीएलए की निगरानी करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने नेपाल से जाने की तैयारी शुरू कर दी है।

सोमवार को प्रख्यात लेखिका और नई दिल्ली। अदालत के निर्देश का पालन करते हुए दिल्ली पुलिस ने सोमवार को प्रख्यात लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरूंधति राय


नई दिल्ली। अदालत के निर्देश का पालन करते हुए दिल्ली पुलिस ने सोमवार को प्रख्यात लेखिका और नई दिल्ली। अदालत के निर्देश का पालन करते हुए दिल्ली पुलिस ने सोमवार को प्रख्यात लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरूंधति राय और कश्मीरी अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी के खिलाफ यहां एक सम्मेलन में भारत विरोधी बयान देने के आरोप में राजद्रोह का मामला दर्ज कर लिया।

दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ धारा 124 ए (राजद्रोह), 153 ए (दो समुदायों में वैमनस्य फैलाने), 153 बी (राष्ट्रीय अखंडता के विरूद्ध बयान देने), धारा 504 (शांति भंग करने के मकसद से अपमानजनक टिप्पणी करने) और धारा 505 (दंगा भ़डकाने वाला बयान देने) के तहत मामला दर्ज किया है। दिल्ली की अदालत ने "रूट्स इन कश्मीर ऑर्गनाइजेशन" के एक सदस्य सुशील पंडित की शिकायत पर गिलानी, राय और पांच अन्य पर भारत विरोधी बयान देने के लिए मामला (एफआईआर) दर्ज करने का आदेश दिया था। पंडित के वकील विकास प़डोरा ने आईएएनएस से बताया कि दिल्ली पुलिस ने राय और गिलानी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पंडित ने तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में गिलानी, राय और अन्य के खिलाफ "आजादी : एक मात्र रास्ता" सम्मेलन में भारत विरोधी बयान देने के कारण 28 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत दर्ज की थी। याचिका में कहा गया था कि आरोपियों ने कश्मीर को भारत से अलग करने के पक्ष में बयान दिया था।
दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ धारा 124 ए (राजद्रोह), 153 ए (दो समुदायों में वैमनस्य फैलाने), 153 बी (राष्ट्रीय अखंडता के विरूद्ध बयान देने), धारा 504 (शांति भंग करने के मकसद से अपमानजनक टिप्पणी करने) और धारा 505 (दंगा भ़डकाने वाला बयान देने) के तहत मामला दर्ज किया है। दिल्ली की अदालत ने "रूट्स इन कश्मीर ऑर्गनाइजेशन" के एक सदस्य सुशील पंडित की शिकायत पर गिलानी, राय और पांच अन्य पर भारत विरोधी बयान देने के लिए मामला (एफआईआर) दर्ज करने का आदेश दिया था। पंडित के वकील विकास प़डोरा ने आईएएनएस से बताया कि दिल्ली पुलिस ने राय और गिलानी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पंडित ने तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में गिलानी, राय और अन्य के खिलाफ "आजादी : एक मात्र रास्ता" सम्मेलन में भारत विरोधी बयान देने के कारण 28 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज करने के लिए शिकायत दर्ज की थी। याचिका में कहा गया था कि आरोपियों ने कश्मीर को भारत से अलग करने के पक्ष में बयान दिया था।

अमेरिका की कथनी और करनी में फर्क का एक और बड़ा खुलासा हुआ है।


आतंकवाद पर दोहरे मापदंड का नमूना पेश करते रहे अमेरिका की कथनी और करनी में फर्क का एक और बड़ा खुलासा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में स्थायी सदस्यता के भारत के दावे पर मुहर लगाकर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भले ही इसी माह लौटे हों, लेकिन उनकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की राय इस मामले में ठीक उनके विपरीत ही है। हिलेरी का मानना है कि स्थायी सदस्यता की दौड़ में भारत खुद को अपने आप ही मजबूत दावेदार बता रहा है।

दोहरे मापदंड को बेनकाब कर दिया
‘विकिलीक्स’ के पिटारे से निकले इस खुलासे ने यूएनएससी सुधार को लेकर भारत की मुहिम पर अमेरिका के दोहरे मापदंड को बेनकाब कर दिया है। इसके अनुसार, पिछले साल 31 जुलाई को क्लिंटन ने भारत समेत 33 मुल्कों में तैनातअमेरिकी राजदूतों को टेलीग्राम भेजकर संयुक्त राष्ट्र सुधारों को अहम मुद्दा बताया था और कहा था कि स्थायी सदस्यता की दौड़ में भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान खुद ही अपने को प्रमुख दावेदार बता रहे हैं। ताजा खुलासे से भारतीय खेमे में खलबली है। अमेरिका के साथ मजबूत होते रिश्तों पर खुलासे की आंच न पड़े, इसलिए विदेश मंत्रालय अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा।

ओबामा की टिप्पणी इसी माह की
दूसरी ओर, मंत्रालय के अधिकारियों ने सफाई देनी शुरू कर दी है। अनौपचारिक चर्चा में अधिकारी कह रहे हैं कि संयुक्त राष्ट्र में भारत की मंजिल को लेकर हिलेरी के विचार पिछले साल के हैं और ओबामा की टिप्पणी इसी माह की। अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणी अमेरिकी नीति में बदलाव का संकेत करती है जो भारत के समर्थन में है। वैसे, मंत्रालय के कुछ अफसरों का यह भी कहना है कि भारत की स्थायी सदस्यता पर ओबामा के बयान में चाहे दो टूक समर्थन हो, लेकिन इस खुलासे के बाद अमेरिका की नीयत का ठीक से आकलन होना चाहिए। इन अफसरों ने ओबामा के समर्थन के ऐलान के चंद रोज बाद ही व्हाइट हाउस के प्रवक्ता के उस बयान का संदर्भ दिया है, जिसमें कहा गया था कि यूएनएसी में भारत की मंजिल अभी दूर की कौड़ी है।
प्रस्तुतकर्ता रामदास सोन

‘‘हमारे राजनयिकों ने वही किया जो दुनियाभर में राजनयिक प्रतिदिन करते हैं। वे रिश्ते बनाते हैं, बातचीत करते हैं, हमारे हितों को आगे बढ़ाते

अमेरिकी राजनयिकों की ओर से भारत समेत संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों की जासूसी के खुलासे के बाद आज एक शीर्ष अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि देश के प्रतिनिधि अपने अन्य विदेशी समकक्षों की तरह संबंधों को मजबूत कर रहे थे। विकीलीक्स पर अमेरिका के गोपनीय संदेशों के प्रसारित होने के बाद संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत सुसान राइस ने कहा, ‘‘हमारे राजनयिकों ने वही किया जो दुनियाभर में राजनयिक प्रतिदिन करते हैं। वे रिश्ते बनाते हैं, बातचीत करते हैं, हमारे हितों को आगे बढ़ाते हैं और जटिल समस्याओं का समान हल तलाशते हैं।‘‘ सुसान ने कहा, ‘‘मैं सिर्फ यह रेखाकिंत करना चाहती हूं कि इस जटिल विश्व में जहां हम रहते हैं, इसमें अमेरिकी राजनयिक जो काम संयुक्त राष्ट्र और पूरे विश्व में करते हैं वह हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये अनिवार्य है। यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा में हमारे साझा हितों को आगे बढ़ाता है।‘‘ विकीलीक्स के सोमवार को जारी संदेशों से खुलासा हुआ था कि अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत हरदीप पुरी तथा अन्य लोगों के ‘जीवन और शारीरिक जानकारियों‘ को इकट्ठा करने का निर्देश दिया था।
विकीलीक्स के की ओर से जारी अमेरिकी संदेशों में कहा गया था, ‘‘निर्गुट सम्मेलन, जी 77, ओआईसी के स्थायी सदस्यों, विशेषकर चीन, क्यूबा, मिस्र, भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, सूडान, उगांडा, सेनेगल और सीरिया के प्रतिनिधियों के शारीरिक और जीवन संबंधी सूचनायें और उनका उनके (देश की) राजधानी से संबंधों के बारे में जानकारी दें।‘‘ यह संदेश अगस्त 2009 में हिलेरी क्लिंटन के कार्यालय से भेजा गया था। एक अन्य संदेश में हिलेरी ने जी फोर के सदस्यों- ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिये ‘‘स्वयभू दावेदार‘ बताया था। ये संदेश अमेरिका के नयी दिल्ली स्थित दूतावास से भी भेजा गया है। यह पूछे जाने पर कि क्या संदेश असली है, इस पर सुसेन राइस ने कहा, ‘‘मैं गोपनीय दस्तावेजों या कथित गोपनीय दस्तावेजों और उसकी विषय वस्तु पर टिप्पणी नहीं करने जा रही हूं।‘‘ उन्होंने कहा, ‘‘यह वह समय है जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के नेतृत्व में हम विश्वभर में अपने भागीदारों और सहयोगियों के साथ अपने संबंधों को फिर से मजबूत कर रहे हैं।‘‘ इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि वह इन दस्तावेजों की वैधानिकता पर कोई टिप्पणी नहीं करने जा रहा है लेकिन वह और जानकारियां चाहता है। इसके बाद वह उचित जवाब देगा।
प्रस्तुतकर्ता रामदास सोनी

राजीव दीक्षित का निधन हो गया है


राजीव दीक्षित का निधन हो गया है. किसी दौर में आजादी बचाओ आंदोनल के प्रखर वक्ता और स्वदेशी के प्रवक्ता रहे राजीव दीक्षित का सोमवार को भिलाई में संदेहास्पद परिस्थितियों में निधन हो गया. वे 42 वर्ष के थे और पिछले तीन चार सालों से बाबा रामदेव के साथ काम कर रहे थे.


स्वदेशी के प्रखर प्रवक्ता के रूप में देश में ख्याति अर्जित करनेवाले राजीव दीक्षित पिछले तीन चार सालों से बाबा रामदेव से जुड़ गये थे. आज बाबा रामदेव जिस स्वदेशी और स्वाभिमान आंदोलन की बात करते हैं उसका मंत्र राजीव दीक्षित ने ही रामदेव को दिया था. लेकिन सोमवार को भिलाई में किसी स्थान पर भोजन करने जा रहे थे, जहां अचानक उनके सीने में दर्द हुआ जिसके बाद उन्हें हृदयाघात हो गया. उसके बाद उन्हें दिल्ली ले जाने की तैयारी की जा रही थी लेकिन इसी दौरान स्थानीय डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. उस वक्त उनके साथ मौजूद रहे लोग यही बात बता रहे हैं.
हालांकि राजीव दीक्षित के पुराने साथी जो आजादी बचाओ आंदोलन के दौरान उनसे जुड़े रहे थे राजीव दीक्षित के इस आकस्मिक निधन पर संदेह व्यक्त कर रहे हैं. उनके कुछ पुराने साथियों का कहना है कि राजीव दीक्षित पूरी तरह से स्वस्थ थे और वे खुद एक होम्योपैथी पैक्टिशनर थे इसलिए हृदयगति रूकने से हुई मौत की बात थोड़ी अटपटी लग रही है. उनके साथियों का कहना है कि वे इस बात को पता करने की कोशिश कर रहे हैं कि हृदयगति रुकने के बाद उन्हें किस अस्पताल में ले जाया गया और प्राथमिक तौर पर जांच करनेवाले डॉक्टरों ने क्या निष्कर्ष निकाला था.
राजीव दीक्षित का पार्थिव शरीर विशेष विमान से दोपहर बाद भिलाई से हरिद्वार लाया जा रहा है जहां बुधवार को सुबह दस बजे अंतिम संस्कार किया जाएगा...
यह लेख विस्फोट.कॉम से साभार

जनता पार्टी नेता सुब्रमनियम स्वामी ने एक और धमाका किया है

राजा के खिलाफ अभियान छेड़ने के कारण फिर से चर्चा में आये जनता पार्टी नेता सुब्रमनियम स्वामी ने एक और धमाका किया है. उन्होंने 27 नवंबर 2010 को प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर सूचित किया है कि उनके गृह मंत्री पी. चिदंबरम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा बनते जा रहे हैं. अत: उनके खिलाफ तत्काल कार्र‌वाई करते हुए उनसे इस्तीफा मांगा जाये. इस पत्र में उन्होंने चिदंबरम के चरित्र पर भी कई गंभीर सवाल खड़े किये हैं, जैसे उनका मसाज सेंटर में जाना और हाईप्रोफाइल वेश्याओं से संसर्ग करना. यह पत्र ईमेल के जरिये विस्फोट डॉट कॉम मिला है, ऐसा दावा किया गया है, मगर संभवत: इसकी खबर मीडिया में अब तक नहीं आई. पत्र का हिंदी अनुवाद –


27.11.2010
डॉ. मनमोहन सिंह
प्रधानमंत्री
साउथ ब्लाक
नई दिल्ली
प्रिय प्रधानमंत्री
मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि आपने अंतत: अपने गृह मंत्री पी. चिदंबरम के दवाब की अनदेखी करते हुए गृह विभाग के संयुक्त सचिव रवि इंदर सिंह के गिरफ्‌तारी के आदेश जारी करवा दिये जिन पर देश के साथ गद्दारी करने का आरोप था.
अब वक्त आ गया है कि आप मेरे उन पत्रों पर भी विचार करें जिनके जरिये मैंने आपको सूचित किया था कि किस तरह गृहमंत्री चिदंबरम ने कुछ ऐसे कार्य किये है एक मंत्री के रूप में जिसकी अपेक्षा उनसे नहीं की जाती है. मैंने आपको पहले ही सूचित किया था कि चिदंबरम अक्सर एक सरकारी होटल के मसाज पार्लर में जाया करते हैं, जहां उजबेक लड़कियां काम करती हैं. वे अक्सर जींस और गॉगल्‌स पहनकर नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके में बिना ड्राइवर घूमते पाये गये हैं. इसी क्रम में एक बार बेंगलुरू में उन्होंने टाइम्स आफ इंडिया के एक फोटोग्राफर की पिटाई कर दी थी, जब उसने एक डिस्कोथेक में उनकी तस्वीर लेने की कोशिश की थी. वित्त मंत्रालय में कार्यरत एक महिला आईएएस ने भी उनके विभाग से तबादला कराने का अनुरोध किया था, उसका आरोप था कि उसे परेशान किया जा रहा है.
मैंने आपको हाल में ही सूचित किया है कि लंदन निवासी मेरे एक मित्र ने मुझे सूचित किया है कि ब्रिटिश गुप्तचर एजेंसी एमआई-6 के पास चिदंबरम का ऐसा वीडियो है जिसमें उन्हें एक यूरोपियन एस्कॉट गर्ल‌ के साथ दिखाया गया है. यह एस्कॉट एक भारतीय कंपनी ने उपलब्‌ध कराई थी जिसके वे पेड निदेशक रह चुके हैं. आपको यह निश्चित तौर पर मालूम होगा कि 2009 के चुनाव में चिदंबरम की जीत पूरी तरह से फ्रॉड था. एआईडीएमके कैंडिडेट उनसे 7000 वोटों से जीत चुके थे.
अब यह जानकर हम चिंतित हैं कि आपकी सरकार ने चिदंबरम महोदय के अनुरोध पर उन तमाम लोगों को कश्मीर वापस आने की अनुमति दे दी है जो 1989 में कश्मीर छोड़कर पीओके चले गये थे. यह राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से घातक कदम होगा. यह उन तत्वों को समर्थन देने की कोशिश होगा जो कश्मीर को भारत से अलग करना चाहते हैं. इसके अलावा इस कदम से आईएसआई को भारत में आतंक का नेटवक्‌ फैलाने में भी मदद मिलेगी. इसके अलावा इस बात पर भी ध्यान देने की जरूरत है कि कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला दुबई और लंदन में पाकिस्तानी एजेंसियों से मिलते हैं.
इसलिये सुरक्षा के मद्देनजर मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप अपने गृह मंत्री पी. चिदंबरम से इस्तीफा मांग लें, क्योंकि उनके क्रियाकलापों से राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो रहा है. वे लगातार अपने मंत्रालय के काम पर ध्यान देने में विफल रहे हैं.
आपका विश्वासभाजक
सुब्रमनियम स्वामी


(यह सनसनीखेज रहस्योदघाटन विस्फोट.कॉम से शब्दशः साभार)

BAN MUSLIMS, NOT MINARETS – A year after Swiss voters approved a ban on the building of minarets, both pro and contra groups are launching new campaig


BAN MUSLIMS, NOT MINARETS – A year after Swiss voters approved a ban on the building of minarets, both pro and contra groups are launching new campaigns to put the issue back on the political agenda.
SWISS INFO - An anti-minaret movement led by Ulrich Schlüer of the rightwing Swiss People’s Party presented a manifesto on Monday against the Islamisation of Switzerland.
The document underlines Switzerland’s Christian foundations and aims to prevent the creation of a parallel society inspired by Islamic sharia law.
Schlüer said the group had waited a year in vain for the government to implement the minaret ban. A sign of the lack of progress was the green light canton Bern gave in September to the building of a minaret in the town of Langenthal, the politician said.
The Bern authorities argued at the time that planning permission was originally granted months before the controversial vote.
Also on Monday, an Islamic group based in Bern said it was launching an initiative to lift the minaret ban.,The Islamic Central Council – which represents 13 Islamic organisations with 1,700 members – said the aim of the initiative was to restore “the constitutional right of equality of all citizens regardless of their religious faith”.
The council said it would submit a text to the federal chancellery in January for initial examination. If the group decides to go ahead, it will have to collect 100,000 signatures within 18 months in order to force a nationwide vote.
This is what the minarets symbolize:

Monday, November 29, 2010

दिल्ली-समलैंगिक-रैली


अनूठे अंदाज, गाने, बाजे और नारों के साथ दुनिया भर से आए समलैंगिक लोग और इनके समर्थक समलैंगिता को कानूनी जामा पहनाने और उसे सामाजिक स्वीकृति दिलाने के लिए एक बार फिर दिल्ली में इकट्ठे हुए।

रैली में लोगों का कहना था कि ये एक प्राकृतिक कृत्य है और आजाद देश में हर व्यक्ति को राजनीतिक आजादी के साथ-साथ सेक्सुअल आजादी भी चाहिए। यानी इन्हें समलैंगिक संबंधों के लिए कोई भी बंदिश मंजूर नहीं।

मध्यप्रदेश से आए एमबीए के विद्यार्थी करण कहते हैं, 'मैं एक छोटे शहर से हूँ और समलैंगिक हूँ। बड़े शहरों में तो इसके प्रति जागरूगता है लेकिन छोटे शहरों में अब भी लड़ाई जारी है।'

दिल्ली में जुटे समलैंगिकों में न सिर्फ युवक युवतियाँ, बल्कि अनेक उम्रदराज लोग भी पूरे जोशोखरोश के साथ हिस्सा ले रहे थे। यही नहीं, कुछ समलैंगिक लोगों के परिवार वाले भी उनके समर्थन में मौजूद थे। पंजाब से आए एक ऐसे ही एक व्यक्ति हैं- संभव।

उनके परिवार से उनकी इस इच्छा का समर्थन करने न सिर्फ उनकी बुजुर्ग दादी आई थीं बल्कि उनकी माँ और उनके भाई-बहन भी रैली में शामिल थे।

समस्या : उनकी दादी ने अपने आने की वजह बताई, 'मेरे पोते ने बताया कि वो समलैंगिक है, तो हमने इस सत्य को स्वीकार किया और अगर हम ऐसा नहीं करते तो वो कुछ भी कर सकता था। उसे अपना जीवन जीने का पूरा अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट और समाज को भी चाहिए कि उसे उसका अधिकार दें।'

वैसे तो रैली में आए ज्यादातर लोगों का कहना था कि वे समलैंगिक हैं, लेकिन अधिकांश लोग तस्वीरें खिंचवाने और मीडिया के सामने आने से परहेज कर रहे थे।

हालाँकि बहुत से लोग ऐसे थे जो रंग-बिरंगी पोशाकों में मीडियाकर्मियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। इनके समर्थन में कुछ बुद्धिजीवी भी थे जो अपनी माँगों को कविता के जरिए व्यक्त कर रहे थे।

इन सबसे अलग रैली में बड़ी देर से बाँसुरी बजा रहे स्वामी शनि से मेरी मुलाकात हुई। उनका कहना था कि समलैंगिकता अपनाइए लेकिन सुरक्षित तरीके से ताकि एड्स जैसी बीमारियाँ न फैलने पाएँ।

बहरहाल सैकड़ों समलैंगिक इस रैली को लेकर काफी उत्साहित थे और उन्हें पूरा विश्वास था कि आने वाले दिनों में उनके अभियान में न सिर्फ हजारों लोग शामिल होंगे बल्कि वे इसे सामाजिक स्वीकृति दिलाने में भी कामयाब हों

संभावना सेठ की सेक्स शिक्षा !

संभावना सेठ की सेक्स शिक्षा !
आइटम गर्ल संभावना सेठ इन दिनों सेक्स की शिक्षा दे रही हैं। योग गुरू बाबा रामदेव को संभावना ने सेक्स का ज्ञान कुछ इस तरह बांटा कि बाबा कहने को मजबूर हो गए कि बेटी अपने भाई और पिता समान लोगों से कैसे बात की जाए इसका ध्यान रखना चाहिए। बाबा रामदेव ने रियलटी शोज खासकर सच का सामना की खिलाफत करते हुए कहा कि ऐसे शो भारतीय संस्कृति के खिलाफ हैं। मेरे ख्याल से बाबा ने कुछ गलत नहीं कहा
, जबकि सच का सामना में एक महिला को अपनी जवान बेटी और पति की मौजूदगी में सारी दुनिया के सामने इस सवाल का जबाव देना पड़े कि क्या पति के अलावा किसी और पुरुष से उससे शारीरिक संबंध हैं। बाबा ने इन्हीं बातों की निंदा की, लेकिन संभावना सेठ भड़क गईं क्योंकि वो तो बिंदास हैं। संभावना का कहना है कि बाबा रामदेव खुद सेक्स की बात करते रहते हैं जबकि उनकी तो शादी भी नहीं हुई है। लेकिन संभावना सेठ ये भूल गईं कि आज तो बच्चे भी सेक्स के बारे में जानकारी रखते हैं। यहां तक की स्कूल में यौन शिक्षा अनिवार्य किए जाने की जरूरत पर जोर दिया जाता रहा है। सरकार भी जनता को सुरक्षित यौन संबंधों के बारे में जागरुत करती रहती है। ऐसे में भला बाबा क्या, हर व्यस्क को सेक्स के बारे में जानकारी होगी, जो होनी भी चाहिए। संभावना ने बाबा से ये सवाल तो कर दिया लेकिन संभावना को अपने सवाल का जबाव किसी और से नहीं बल्कि अपने आप से पूछना चाहिए। क्योंकि संभावना खुद भी तो शादीशुदा नहीं हैं, तो फिर उन्हें सेक्स के बारे में कैसे पता? हो सकता मैं जो कह रहा हूं, संभावना के सवाल के जबाव में वो बातें बाबा के दिमाग में भी आई होंगी लेकिन वो चुप रहे क्योंकि एक युवती के ऐसे सवाल ने उन्हें शायद शर्मिंदा कर दिया। संभावना ने ये भी कहा कि बाबा आप कहते हैं आइटम गर्ल्स ने युवाओं को बर्बाद कर दिया तो आपने अपने योग कार्यक्रमों में शिल्पा शेट्टी और मल्लिका शेरावत को क्यों बुलाया? तो संभावना अच्छे काम के लिए बाबा के साथ जाकर तुम भी पहल करो तो शायद वो तुम्हें भी मना नहीं करेंगे। शिल्पा शेट्टी ने तो बाबा के सहयोग से लोगों को योग का ज्ञान बांटा था जो कि करोड़ों लोगों के लिए रोगों से छुटकारा दिलाने के साथ साथ कई मायनों में फायदेमंद है और फिर उनकी नजर में जो काम गलत है वे उसके खिलाफ हैं न कि गलत काम करने वाले के खिलाफ। यहां किसी शख्सियत के कहे हुए ये शब्द याद आते हैं कि अपराध से नफरत करो अपराधी से नहीं। बाबा ने किसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की लेकिन संभावना ने तो बाबा पर सेक्स संबंधी ऐसे तीर छोड़े कि शर्म के जख्म से बाबा घायल हो गए और कुछ कह न सके। बाबा रामदेव जब कभी सेक्स की बात करते हैं जनता की भलाई के संदर्भ में ही करते हैं न कि अश्लीलता फैलाने के लिए। लेकिन संभावना ने ये क्या बच्चों जैसा सवाल कर दिया कि बाबा को सेक्स के बारे में जानकारी कैसे है जबकि उनकी तो शादी भी नहीं हुई है। यहां फिर से कहना चाहूंगा कि शादी तो संभावना की भी नहीं हुई और फिर यौन शिक्षा के लिए शादी ही जरूरी है तो फिर संभावना के मुताबित स्कूलों में यौन शिक्षा के मुद्दे पर जोर देने की बजाय बच्चों की शादी पर ज्यादा जोर देना चाहिए। आप अच्छी तरह समझ गए होंगे कि बाबा रामदेव जैसी शख्सियत से संभावना ये बचकाना सवाल कैसे कर बैठीं ?

by Devendra Sharma
sharmadev09@gmail.com

यौन शोषण: क्या सिर्फ पुरूष ही होते हैं दोषी ?


यौन शोषण: क्या सिर्फ पुरूष ही होते हैं दोषी ?

नोट: यदि आप यह मानते हैं कि शोषण करना सिर्फ पुरूषों का मौलिक अधिकार है, तो कृपया इस को न पढ़ें।

सबसे पहले मैं यह क्लियर कर दूँ कि मैं न तो कोई नारीवादी हूँ और न ही नारी विरोधी। अगर आप 'तस्लीम' पर मेरे पूर्व लेखों को पढ़ते रहे हैं, तो शायद यह समझ पाएँ हों कि जो भी कुछ गलत होता है, अन्यायपूर्ण होता है, उसके विरोध में लिखना मेरी प्रवृत्ति है। यदि आप इसी भावना से यह लेख पढ़ते हैं, तभी इस लेख की मूल भावना को समझ पाएँगे।
तो अब आते हैं अपने मुद्दे पर। क्या सिर्फ पुरूष ही यौन शोषण के दोषी होते हैं?


हालाँकि यह आम धारणा है कि पुरूष स्वभावत: अधिपत्यवादी होते हैं और जो भी व्यक्ति, वस्तु अथवा सम्पत्ति उसके सम्पर्क में आती है, वे उसपर पूर्ण अधिकार करने के लिए उतावले हो जाते हैं। वैसे यह धारणा सर्वथा अनुचित भी नहीं है। मेरी नजर में इसका कारण है पुरूषों को विकासक्रम में मिला जीन का पारम्परिक ढ़ाँचा, और उसकी परवरिश का सामाजिक ताना-बाना। लेकिन यह व्यवहार सिर्फ पुरूषों की बपौती नहीं रहा है। महिलाओं ने सभी क्षेत्रों में पुरूषों की बराबरी के साथ ही साथ इस क्षेत्र में भी अपने कदम मजबूती से रख दिये हैं। अगर आपको मेरी बातों पर यकीन नहीं हो रहा है, तो इस सत्य घटना को ध्यान से पढ़ें:

मेरे एक मित्र हैं, जो एक सरकारी विभाग में सेक्सन अफसर के पद को विभूषित हैं। उनके सेक्सन में कुल पाँच लोग काम करते हैं, एक महिला व चार पुरूष। जैसे ही वे दूसरे सेक्शन से ट्रांस्फर होकर नए सेक्सन में पहुँचे, तो वहाँ पर उनका सामना एक ऐसी महिला कर्मचारी से हुआ, जो न तो समय से कभी आफिस आती थी और न नियत समय तक रूक कर काम ही करती थी। हमारे मित्रवर ठहरे नियम कानून के पक्के आदमी, अत: उन्होंने एक दो-बार डाँटा फटकारा। जब उस महिला ने देखा कि उसकी दाल ऐसे नहीं गलने वाली, तो उसने अपने दूसरे हथकंडे अपनाने लगी।
कभी वह अपने बॉस के लिए घर से उनकी पसंद का छोला चावल ले आती, तो कभी सूजी का हलवा। साथ ही साथ वह अपने बॉस के साथ कुछ अतिरिक्त निकटता भी दर्शाने लगी। हंसकर बातें करना, बॉस के केबिन में अपने ऊपरी वस्त्रों को लापरवाही से बिखरा देना और कभी-कभी जान बूझकर उनके हाथों को छू लेना।

हमारे मित्रवर भी कोई विश्वामित्र तो थे नहीं, सो उनके सारे नियम कानून धराशायी हो गये। वह महिला अपने पूर्व के नियमानुसार अपननी सुविधा के समय से आने और जाने लगी। इसपर उसके संगी-साथियों ने अपने बॉस से ऐतराज किया, तो मित्र महोदय ने पुन: उस महिला को कसना चाहा। इसपर उसने चंडी का रूप ले लिया और खुले आम अपने बॉस पर यौन शोषण का आरोप लगा दिया। अपने आरोप में उसने यहाँ तक कहा कि मेरे बॉस मुझे समय समय पर प्रताड़ित करते हैं और शारीरिक सम्बंध बनाने के लिए दबाव डालते हैं। हालत है कि मित्रवर को कार्यालय से निलम्बित कर दिया गया है और उनके खिलाफ जाँच चल रही है। जब से मुझे यह खबर मिली है, मैं सोच में पड़ गया हूँ और यह सवाल बराबर मेरे दिमाग में कौंध रहा है कि क्या यौन शोषण के लिए महिला दोषी नहीं हो सकती? अगर हाँ, जैसा कि इस केस में स्पष्ट है, तो इसके विरूद्ध पुरूष क्या कर सकता है? ऐसे मामले में उसके साथी-संगाती तो थोड़िए उनकी पत्नी तक उन्हें शक की निगाह से देखने लगी है और अब उन्हें अपने बच्चों से नजरें मिलाने में शर्म आने लगी है। क्या आप लोग बता सकते हैं कि इस विषय पर मेरे मित्र क्या कर सकते हैं?

यहाँ पर एक सवाल यह भी कि जब सरकार नारी यौन शोषण के लिए कड़े कदम उठाने जा रही है, तो क्या उसे इस तरह के मामलों के बारे में भी नहीं सोचना चाहिए? आप इस बारे में क्या सोचते हैं, कृपया अपने दुराग्रह से मुक्त विचारों को हमारे साथ अवश्य साझा करें। शायद आपके विचार मेरे मित्र की जिंदगी में नई रौशनी में मददगार हो सकें। प्रस्तुतकर्ता : ज़ाकिर अली 'रजनीश' source:http://ts.samwaad.com/

Saturday, November 27, 2010

न्यूयॉर्क का एक डॉक्टर अपनी तलाकशुदा पत्नी से वह किडनी मांग रहा है जो उसने 2001 में पत्नी को दान में दी थी. अब या तो उसे




Dawnell Batista, wife of Richard Batista, who sought reimbursement for a kidney he donated

Read more: http://www.nydailynews.com/ny_local/2009/02/25/2009-02-25_judge_rejects_long_island_doctor_dr_rich.html#ixzz16YB45YAM
Judge rejects Long Island doctor Dr. Richard Batista's bid to charge estranged wife for kidney


Dr. Richard Batista was seeking reimbursement for a kidney he donated to his estranged wife.
DelMundo for NewsDawnell Batista, wife of Richard Batista, who sought reimbursement for a kidney he donated. Related NewsArticles
Batista's wife's new claim nothing to sniff atWhere has my kidney been?A Long Island judge rejected a doctor's bizarre request that his estranged wife fork over $1.5 million for a kidney he donated to her while they were still happily married.

Dr. Richard Batista's bid to have the organ he gave his wife, Dawnell, in 2001 valued like other marital assets was denied Wednesday on the grounds it would violate public policy.

"At its core, the defendant's claim inappropriately equates human organs with commodities," Suffolk County Special Referee Jeffrey Grob declared in a 10-page ruling.

Grob cited state law making it a felony for people to give or take money for a human organ.

"While the term 'marital property' is elastic and expansive ... its reach, in this court's view, does not stretch into the ethers and embrace ... human tissues or organs," Grob wrote.

The latest legal twist in the ugly battle dubbed the Kidney Divorce came after Batista and his wife, who have three children, accused each other of being unfaithful.
मुझे एक बेतुके मुकदमे के बारे में पता चला जिसमें न्यूयॉर्क का एक डॉक्टर अपनी तलाकशुदा पत्नी से वह किडनी मांग रहा है जो उसने 2001 में पत्नी को दान में दी थी. अब या तो उसे वह किडनी चाहिए या उसके एवज़ में डेढ़ मिलियन डौलर की रकम चाहिए.
डेली न्यूज़ की वेबसाईट में छपी खबर के मुताबिक डॉक्टर रिचर्ड बटिस्टा ने अपनी पत्नी पर उसके फ़िज़िओथेरेपिस्ट से अवैध सम्बन्ध रखने का आरोप लगाया. बेहद कड़वी मुकदमेबाजी के बाद रिचर्ड को तलाक तो मिल गया पर उसके तीन बच्चों की परवरिश उससे छिन गयी. इस सबसे खिन्न होकर उसने उसने अपनी पत्नी को दान में दी गयी किडनी को वापस उसे सौंपने के लिए आवेदन दिया. बटिस्टा ने कहा - "मैंने उसे किडनी दान में दी थी क्योंकि मैं अपने वैवाहिक जीवन को खंडित होने से बचाना चाहता था. किडनी दान देने का पहला उद्देश्य उसके जीवन की रक्षा करना था. इससे यह उम्मीद भी थी कि हमारे सम्बन्ध मधुर हो जायेंगे."
जून, 2001 में किडनी प्रत्यारोपण का सफल ऑपरेशन हो गया. बटिस्टा के अनुसार उसे उम्मीद थी कि उसकी पूर्ण स्वस्थ हो चुकी पत्नी उसके दान का महत्व, उसकी कीमत समझेगी पर 'कुछ भी नहीं बदला'.
सच्ची दानशीलता इसमें है कि शुद्ध मन से बिना किसी गर्व, घमंड, दिखावे, लाभ, या बदले में कुछ पाने की कामना से दान दिया जाए. ऐसा दान हमें 'मैं, मेरा, मेरे लिए' की अस्वस्थ भावना से मुक्त करता है और हमारे विचारों को पवित्र बनाता है. इसके द्वारा हम जीवन की विहंगमता को और अधिक पूर्णता में स्वीकार कर पाते हैं और क्षुद्रताओं से ऊपर उठ सकते हैं. इसके अतिरिक्त, यह मानसिक और भौतिक दरिद्रता को दूर कर शुभ कर्मों को करने और उनके संचय को प्रोत्साहित करता है.
इस प्रकार सच्चा दान हमारे अहम् से ऊपर उठने में है और दूसरों के प्रति निःस्वार्थ भाव से कर्म करने में निहित है. किस अपिरिचित व्यक्ति को अपनी किडनी दान में देना वास्तव में बहुत बड़ा दान है. अपने किसी प्रिय परिचित को किडनी दान में देना भी उतना ही विशाल शुभ कर्म है. किसी परिचित को किडनी या कोई अन्य महत्वपूर्ण जीवनरक्षक दान देने के उपरान्त निज-सम्बन्ध से जनित महती उपकार करने की भावना आ जाती है जिसे हम आम बोलचाल में अहसान लादना कह सकते हैं. इसके विपरीत किसी अजनबी को दान देने के बाद आप उसे भूल भी सकते हैं.
बटिस्टा ने अपनी पत्नी को किडनी दान करने का निर्णय प्रेम के वशीभूत होकर ही लिया होगा पर इस निःस्वार्थ प्रतीत होने वाले कर्म के पीछे भी कुछ उद्देश्य छुपे थे जो गलत भी नहीं थे. बटिस्टा के अनुसार वह अपने वैवाहिक जीवन को पुनः स्वस्थ, खुशहाल, और चिरस्थाई बनाना चाहता था. जब ऐसा नहीं हुआ तो उसने अपने निवेश को वापस ले लेने का निर्णय कर लिया. पत्नी से मिले धोखे ने बटिस्टा के भीतर उसके और उसकी पत्नी के बीच न पटने वाली दूरी पैदा कर दी और वह धीरे-धीरे अपने में ही सिमटता रह गया.
मैं अपने पाठकों से यह प्रश्न करता हूँ कि क्या हम किसी और के शरीर में प्रत्यारोपित किडनी को अपना अंग कह सकते हैं? यह देखना ही कितना विस्मयपूर्ण है कि मनुष्यों में 'मैं और मेरा' की भावना इतनी गहरी है कि यह शरीर से अलग हो चुके अंग पर भी अपना अधिकार जताती है. मैंने तुम्हें अपने शरीर का टुकड़ा दिया और तुमने ही मुझे चोट पहुंचाई! अब मुझे मेरी किडनी वापस दो!
बटिस्टा सौजन्यपूर्ण, करुणापूर्ण, और दयालुता भरे भाव से अपनी किडनी दान में दे सकता था लेकिन वह ऐसा नहीं कर सका और उसने किडनी तो दे दी पर अपने अहंकार को पोषित करता रहा.
मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि कोई भी मनुष्य अपनी किडनी तभी दान में दे जब वह उसे वापस चाहने की इच्छा न करे.

Friday, November 26, 2010

राहुल गांधी ने आज कहा कि फ़िलहाल वह प्रधानमन्त्री पद पाने में रुचि नहीं रखते और खुद को सौंपे गये काम पर ध्यान देना चाहते हैंण्


वडोदरा रू कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज कहा कि फ़िलहाल वह प्रधानमन्त्री पद पाने में रुचि नहीं रखते और खुद को सौंपे गये काम पर ध्यान देना चाहते हैंण्

राहुल ने यहां विद्यार्थियों के साथ बातचीत के दौरान कहाए ‘‘देश की सेवा करना मुख्य मकसद है और देश का प्रधानमन्त्री बनना एकमात्र उद्देश्य नहीं हो सकताण् प्रधानमन्त्री का पद हासिल करना ही केवल काम नहीं हैण् और भी कई काम हैंण्श्श्

एक छात्र के प्रश्न के उत्तर में राहुल ने कहाए ‘‘राजनीति केवल प्रधानमन्त्री का पद हासिल करने या कुर्सी पाने के लिए नहीं होती बल्कि इसमें अनेक क्षेत्रों में विकास करना होता हैण्श्श्

उन्होंने कहाए ‘‘फ़िलहाल मैं प्रधानमन्त्री का पद पाने का इच्छुक नहीं हूंण् मुङो जो काम मिला है मुङो उस पर ध्यान देने की जरूरत है और मैंने जो लक्ष्य तय किये हैं उन पर ध्यान रखना होगाण्श्श्

राजनीति में आने की अधिकतम या न्यूनतम उम्र की अवधारणा को खारिज करते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहाए ‘‘शारीरिक उम्र से ज्यादा मानसिक आयु महत्वपूर्ण हैण्श्श् उन्होंने कहाए ‘‘प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह 70 से अधिक साल के हैं लेकिन मन से वह युवा हैं और अच्छा काम कर रहे हैंण्श्श्

इस दौरान मीडिया को जाने की अनुमति नहीं थीण्

नक्सलवाद पर नियन्त्रण पाने के उद्देश्य से सरकार ने नौ राज्यों में नक्सल प्रभावित 60 आदिवासी एवं पिछडे जिलों के लिए 3ए300 करोड रुपये की विशेष कार्ययोजन


नयी दिल्ली रू विकास के माध्यम से नक्सलवाद पर नियन्त्रण पाने के उद्देश्य से सरकार ने नौ राज्यों में नक्सल प्रभावित 60 आदिवासी एवं पिछडे जिलों के लिए 3ए300 करोड रुपये की विशेष कार्ययोजना को मंजूरी दी हैण्

इस एकीकृत कार्ययोजना का उद्देश्य इन जिलों के लोगों की स्वास्थ्य देखभालए पेयजलए शिक्षा तथा सडकों से जुडी समस्याओं का निराकरण करना हैण्इस आशय का फ़ैसला कल आर्थिक मामलों की मन्त्रिमण्डलीय समिति सीसीईए में किया गयाण् इसके तहत यह कार्ययोजना दो साल के लिए 100 प्रतिशत अनुदान आधार पर अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता के रूप में काम करेगीण्

केन्द्रीय गृहमन्त्री पी चिदंबरम ने बतायाए “मौजूदा वित्त वर्ष 2010.11 में इन 60 में से प्रत्येक जिले को 25 करोड रुपये की राशि दी जाएगीण् इस राशि का उपयोग जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा चुनी गई योजना में किया जाएगाण् श्उन्होंने कहा कि परियोजनाओं को मार्च तक पूरा कर लिया जाएगाण्

उन्होंने बताया कि इस कार्ययोजना के तहत किए जाने वाले काम का फ़ैसला जिला कलेक्टर एक दिसम्बर तक कर लेंगेण् हर जिले के लिए 25 करोड रुपये की राशि को मौजूदा वित्त वर्ष के बचे चार महीनों में काम में लेना होगाण् वित्तवर्ष 2011.12 में एकमुश्त राशि को बढाकर 30 करोड रुपये कर दिया जाएगा और 12वीं पंचवर्षीय योजना की बाद की अवधि में इसके कार्यान्वयन की समीक्षा की जाएगीण्

यूएईद्ध के कामगार शिविरों में अवैध शराब के कारोबार पर वर्चस्व की लड़ाई

संयुक्त अरब अमीरात (यूएईद्ध के कामगार शिविरों में अवैध शराब के कारोबार पर वर्चस्व की लड़ाई के चलते दर्जनों भारतीय युवक जेल में हैं।

एक खबर में बताया गया है कि गिरफ्तार किए गए इन युवकों में से ज्यादातर मौत की सजा का सामना कर रहे हैं। इन पर शरजाह और दुबई में प्रतिद्वन्द्वी गिरोहों के सदस्यों की हत्या करने का आरोप है।

खबर के अनुसारए संयुक्त अरब अमीरात की अदालतों ने 22 युवा भारतीयों को पिछले तीन साल में मौत की सजा सुनाई है। कई को अधिकतम सजा भी दी गई है।

गल्फ न्यूज की जांच के अनुसारए 19 साल से 28 साल की उम्र के 60 युवा या तो मौत की सजा का सामना कर रहे हैं या उन पर मुकदमा चलाया जा रहा है। इनमें से 59 युवक पंजाब के और एक हरियाणा का है।

इन लोगों में वे 17 भारतीय भी हैं जिन्हें शरजाह में अवैध शराब के धंधे पर नियन्त्रण के लिए लड़ाई के दौरान एक पाकिस्तानी को मार डालने के जुर्म में मौत की सजा सुनाई गई है। खबर के अनुसारए संयुक्त अरब अमीरात में करीब एक लाख पंजाबी हैं।

अखबार ने ओबरॉय को यह कहते हुए उद्धृत किया है ‘‘संयुक्त अरब अमीरात में शराब के अवैध कारोबार के आरोप में पकड़े गए पंजाबी युवकों की पारिवारिक पृष्ठभूमि घोर निर्धनता का संकेत देती है। यहां आने के लिए वे लोग भारी भरकम कर्ज लेते हैं और यहां आने के बाद मजदूरी या ऐसे ही छोटे मोटे काम करते हैं।श्श्

अवैध शराब के कारोबार में लिप्त ज्यादातर युवा पहले तो कौशल युक्त कार्योंश् के लिए भाड़े पर लिए जाते हैं और उनकी मासिक आमदनी 14ए940 रुपये प्रति माह (1200 दिरहमद्ध होती है।

खबर के अनुसारए लेकिन जल्द ही वे अवैध शराब के धंधे से जुड़ जाते हैं जिसमें उन्हें पैसा तो भरपूर मिलता है लेकिन गिरोहों की आपसी रंजिश में कई लोग मारे भी जा चुके हैं।

शिवराज ने कहा- मुझसे डरी हुई है कांग्रेस

नतीजा
शिवराज ने कहा- मुझसे डरी हुई है कांग्रेस
भोपाल, 26 नवंबर 2010 (मप्र ब्यूरो)। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा भ्रष्टाचार को मुख्य मुद्दा बनाते हुए जो हंगामा किया उसके पीछे कुछ और ही कारण है। इस हंगामे से कांग्रेस पार्टी में चल रहे नेता प्रतिपक्ष बनने की जद्दोजहद सामने आती है। क्योंकि पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष पद के जोर आजमाईश चल रही है। ऐसे में हाईकमान की नज़रों मेें छा जाने का इतना अच्छा मौका वे कैसे जाया करते। यह जानकारी मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान ने दी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेसी हंगामा खड़ा कर हाईकमान की नज़रों में अपने अंक बढ़ाना चाहते हैं। उन्हें जनहित के मुद्दों से कोई सरोकार नहीं है। विपक्षी दल के पास कोई और मुद्दा नहीं था तो उन्होंने भ्रष्टाचार को ही अपना हथियार बनाकर विधानसभा का इतना कीमती वक्त जाया कर दिया। ऐसा ही कुछ हाल भाजपा का भी है। वह भी अपने गिरेबां में नहीं झांकती है। लेकिन अपने विपक्षी का पूरा ख्याल रखती है। विधानसभा में चले आरोप-प्रत्यारोपों के दौर में एक बात खुलकर सामने आ गई कि दोनों दल अपने भीतरी हाल से ज्यादा एक-दूसरे के भीतरी हाल को बखूबी जानते हैं। दोनों ही दलों के नेताओं ने इसे जाहिर करने में कोई कसर भी नहीं छोड़ी। उधर दूसरी ओर कार्यवाहक नेता प्रतिपक्ष चौधरी राकेश सिंह कहते हैं कि भाजपा धड़ों में बंटी हुई है, यह बात विधानसभा में नज़र भी आ जाती है। संसदीय कार्यमन्त्री नरोत्तम मिश्रा बोलते हैं तो कोई उनका साथ नहीं देता। वहीं उद्योगमन्त्री कैलाश विजयवर्गीय का साथ देते भाजपा के पूरे विधायक नज़र आते हैं। इतना ही नहीं, विजयवर्गीय ने तो सदन में पूर्व मुख्यमन्त्री उमा भारती का जिक्र कर अपनी मंशा भी जाहिर कर दी।
संसदीय कार्यमन्त्री नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस को गुटबाजी से घिरा बताते हुए कहा है कि नेता अपने स्वार्थ की पूर्ति और कद बढ़ाने के लिए सदन का समय खराब किए जा रहे हैं। दोनों दलों में गुटबाजी और एक-दूसरे को शिकस्त देने की कोशिशें किसी से छुपी नहीं है, लेकिन दोनों दलों के नेताओं द्वारा अपने दल के हाल का जिक्र में हिचक दिखाई जाती है। इसकी वजह भी है, क्योंकि नेता जानते हैं कि ऐसा करने से उनका अपना ही नुकसान हो सकता है और इसीलिए वे अपने दल का नहीं, दूसरे के दल का हाल बयां करने में पीछे नहीं हैं।
आर.एस. अग्रवाल
9826013975
लोकवार्ता इंटरनेट समाचार सेवा

पगड़ी व बिना पगड़ी के शिवराज

पगड़ी व बिना पगड़ी के शिवराज
आखिर माजरा क्या हैर्षोर्षो
भोपाल, 26 नवंबर 2010 (मप्र ब्यूरोे)। प्रदेश के मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह का गौरव दिवस मनाने की तैयारियां जोरों पर हैं। झीलों की नगरी में शिवराज के लगे `कटआउट´ लोगों के आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। किन्तु `कटआउट´ दो तरह के लगे होने से लोगों में जिज्ञासा पैदा कर रहे हैं। राजभवन के सामने पगड़ी वाले शिवराज का कटआउट लगा है तो दूसरी ओर बोर्ड आफिस, रोशनपुरा व अन्य चौराहों पर बिना पगड़ी वाले कटआउट लगे हैं।
फिलहाल बिहार विधानसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद देश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ी जा रही लड़ाई का लाभ भी प्रदेश सरकार शिवराज के नाम से भुनाना चाहती है। इसके पूर्व प्रदेश की पूर्व मुख्यमन्त्री उमा भारती की महिमा मण्डित कर भाजपा सत्ता में आई थी। फिलहाल प्रयोगवादी भाजपा नित्य नये प्रयोग जनता के सामने कर रही है। फैसला आने वाले चुनावों में जनता को करना है।
णआर.एस. अग्रवाल
9826013975

कांग्रेस 29 को मनाएगी शर्म दिवस

भोपाल। कांग्रेस ने भाजपा के कार्यकर्ता गौरव दिवस कार्यक्रम के जवाब में आगामी 29 नवम्बर को शर्म दिवस के रूप में मनाने का निश्चय किया है। पार्टी के सभी विधायक 29 तारीख को राजधानी भोपाल में इकट्ठा होकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सम्मान में आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम के विरोधस्वरूप धरना देंगे और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेंगे।

गौरतलब है कि चार दिन बाद 29 तारीख को भाजपा मुख्यमंत्री चौहान का सम्मान करने के लिए एक बड़ा कार्यक्रम करने जा रही है, जिसे उसने कार्यकर्ता गौरव दिवस नाम दिया है। इस आयोजन को भव्य रूप देने के लिए हर स्तर पर जबरदस्त तैयारियां की जा रही है।

दरअसल 29 नवम्बर को शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री के पद पर पांच साल पूरे कर लेंगे। वह पहले ऐसे गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री हैं, जिनके नाम यह उपलब्धि दर्ज हो रही है। जाहिर है, भाजपा इसे राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण तारीख मान रही है। इसके पीछे उसका एक मकसद कांग्रेस को यह बताना भी है कि वह न केवल पांच साल सरकार चलाना जानती है, बल्कि उसका मुख्यमंत्री भी पांच साल पूरे करता है।

कांग्रेस ने मगर इसे भाजपा का ढकोसला करार देते हुए इस आयोजन का अपने ढंग से प्रतिकार करने का कार्यक्रम बना लिया है। उसके विधायक 29 नवम्बर को सबसे पहले मिंटो हॉल पर गांधी जी की प्रतिमा पर श्रृद्धांजलि अर्पित करेंगे और फिर राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर को ज्ञापन देने जाएंगे, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका और राज्य सरकार के कथित भ्रष्टाचार का उल्लेख होगा। इसके बाद रोशनपुरा चौराहे पर दो घण्टे का धरना दिया जाएगा।

लोकतंत्र को हथकड़ी पहना दी: राकेश

भोपाल। मप्र विधानसभा में कार्यवाहक नेता विपक्ष चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी ने बृहस्पतिवार के घटनाक्रम पर कहा कि सदन में विपक्ष को अपनी बात रखने का अवसर नहीं देकर लोकतंत्र को कलंकित किया गया है। आसंदी हमारी बात सुनने को राजी नहीं हुई। स्पीकर का आचरण लोकतंत्र को हथकड़ी लगाने जैसा था।

संवाददाताओं से चर्चा करते हुए चतुर्वेदी ने कहा कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा हक है और उसके इस अधिकार की रक्षा की जाना चाहिए। पर ऐसा न होना लोकतंत्र पर ताला लगाने के समान है। इसीलिए सदन में भी उन्होंने इस बात को कहा।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार मुद्दा हमारे लिए सर्वोपरि है। नियम 130 के तहत डम्परकाड पर चर्चा कराने का प्रस्ताव विधानसभा को दिया था लेकिन न्यायिक मामला बताकर चर्चा नहीं कराई जा रही है जबकि अयोध्या मामला, जैन आयोग, गैस काड जैसे प्रसंगों पर लोकसभा एवं विधानसभा में चर्चा हुई है। गैस काड तो सुप्रीमकोर्ट में चल रहा है फिर भी विधानसभा के पिछले सत्र में चर्चा हुई थी। विपक्ष ने इस बात पर सहमति दे दी थी कि डम्परकाड पर चर्चा के दौरान न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। इसके बावजूद स्पीकर ने हमारा प्रस्ताव खारिज कर दिया।

उन्होंने इस मांग को दोहराया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को स्वविवेक से भ्रष्टाचार की जाच सीबीआई से कराने की पहल करनी चाहिए। इसके लिए विपक्ष उन्हें दस दिन का समय दे रहा है। अगर यह नहीं हुआ तो विपक्षी सदस्य राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री से मिलकर जाच की माग करेंगे। यह मामला जनता के बीच भी ले जाएंगे। इस मुद्दे पर आदोलन भी करेंगे। क्योंकि इस मामले की जाच तीन साल बाद भी पूरी नहीं हो पाई है, जिससे सरकार और लोकायुक्त पर भरोसा खत्म हो गया है। अफसरों के निवास पर 300 करोड़ की सम्पत्तिमिल रही है फिर भी सरकार भ्रष्टाचार पर चर्चा कराने को तैयार नहीं है।
26-11-2010

भाजपा के कार्यकर्ता गौरव दिवस के जवाब में समाजवादी पार्टी ने 29 नवम्बर को प्रदेश भर में धिक्कार दिवस मनाने

भोपाल। भाजपा के कार्यकर्ता गौरव दिवस के जवाब में समाजवादी पार्टी ने 29 नवम्बर को प्रदेश भर में धिक्कार दिवस मनाने का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि 29 तारीख को वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के वादों की सच्चाई जनता के सामने पेश करेगी।

मप्र में सीमित असर रखने वाली समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सुनीलम ने शुक्रवार को यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री चौहान सरकारी पैसे से अपनी प्रशसा कराने में लगे हैं। 'कार्यकर्ता गौरव दिवस' के नाम पर जनता के धन की बर्बादी की जा रही है। उन्होंने कहा कि 29 नवम्बर को सपा पूरे प्रदेश में धरना, प्रदर्शन एवं सभाएं करेगी। मुख्यमंत्री का खोखलापन जनता के बीच उजागर किया जाएगा।

सुनीलम ने आरोप लगाया कि प्रदेश में हर रोज चार किसान आत्महत्या कर रहे हैं और आठ महिलाओं के साथ प्रतिदिन बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं। कुपोषण से रोजाना 280 बच्चे मारे जा रहे हैं। बाल अपराध में मप्र अग्रणी है और भुखमरी में दुखद स्थिति है। देश में औसत भूख सूचकांक 23 फीसदी के करीब है, जबकि मप्र का लगभग 31 फीसदी। निराश्रित पेंशन भी देश के अन्य राज्यों से कम ही है।

सपा नेता ने यह आरोप भी लगाया कि मप्र में भू माफिया, शराब, खनिज और परिवहन माफिया पूरी तरह हावी है। 9 मंत्रियों के खिलाफ लोकायुक्त में प्रकरण है, लेकिन सभी मंत्री अपने पदों पर बने हुए हैं। किसानों का बुरा हाल है। गांवों को बिजली नहीं मिल रही है और खाद महंगी हो गई है।

ज्ञात हो कि आगामी 29 नवम्बर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री हैं। उनके पूर्व प्रदेश में जितने भी गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री हुए हैं, वे पांच साल इस पद पर नहीं रह पाए। लिहाजा भाजपा ने चौहान का सम्मान करने का कार्यक्रम बनाया है। इसमें सूबे से पार्टी के एक लाख से ज्यादा कार्यकर्ताओं के भोपाल पहुंचने की संभावना है। पार्टी ने इस हिसाब से तैयारियां भी की हैं।

यहां यह उल्लेखनीय है कि प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी भाजपा के इस आयोजन का विरोध किया है और पार्टी उस दिन शर्म दिवस मनाएगी।

कोर्ट के आदेश पर भी नहीं मिला महापौर का चार्ज

Nov 26, भोपाल। बसपा विधायक दल ने राज्य सरकार को दस दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर दस दिन के भीतर पार्टी के सतना मेयर रहे पुष्करसिंह को पुन: चार्ज नहीं दिया गया तो सड़क पर आदोलन किया जाएगा। न्यायालय में भी फिर से दस्तक दी जाएगी।

बसपा विधायक दल के नेता रामलखन सिंह ने शुक्त्रवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि नगर पालिक निगम सतना के महापौर सिंह के खिलाफ जिला न्यायालय सतना ने 30 अगस्त को उनके निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया था जिसके बाद चार सितंबर को राज्य सरकार ने भाजपा पार्षद विष्णुप्रसाद त्रिपाठी को मेयर का कार्यभार सौंप दिया।

पुष्कर सिंह ने उच्च न्यायालय में अपील की जिसके अन्तर्गत न्यायालय ने 19 नवंबर को जिला न्यायालय सतना के निर्णय को निरस्त कर पुन: सुनवाई के निर्देश दिए। बसपा का कहना है कि इससे साफ जाहिर हो गया कि पुष्कर सिंह को फिर से महापौर पद पर बने रहने का अधिकार प्राप्त हो गया है लेकिन फिर आज तक सिंह को कार्यभार नहीं सौंपा जा रहा है।

बसपा विधायक दल के नेता ने कहा कि पार्टी का धैर्य टूट रहा है। 6 दिसम्बर को पार्टी कोर गु्रप की बैठक होगी। इसमें भविष्य में करने वाले आदोलन पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र में काग्रेस और भाजपा की मंशा सत्र चलाने की नहीं थी इसलिए हंगामे में सत्र समाप्त हो गया।

बिल भुगतान के लिये विभाग का नया प्रयोग

बिल भुगतान के लिये विभाग का नया प्रयोग



इंदौर। मध्यप्रदेश में बिजली का बिल भरते समय लम्बी-लम्बी कतारों से परेशान रहने वाले उपभोक्ताओं के लिये अच्छी खबर है। बिजली विभाग ने नया प्रयोग करते हुए इंदौर में ऑल टाइम पेमेंट मशीनें लगायी हैं। उपभोक्ताओं को इन मशीनों के जरिये चौबीस घंटे बिजली का बिल भरने की सहूलियत मिल गयी है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के एक अधिकारी ने आज बताया कि इंदौर में एटीपी मशीन से बिजली बिल भुगतान की सुविधा शुरू की गयी है। पहले चरण में शहर में ऐसी 10 मशीनें लगायी जायेंगी।

उन्होंने बताया कि बिजली बिल भरने के लिये उपभोक्ता को टच स्क्रीन सुविधा वाली एटीपी मशीन में अपना सर्विस क्रमांक दर्ज करना होगा। सही सर्विस क्रमांक दर्ज होने के बाद बिल का ब्यौरा मशीन पर दिखायी देने लगेगा। एटीपी मशीन में नकदी और चेक के विकल्पों से बिजली बिल भुगतान की सुविधा है। बिल राशि सही तरीके से जमा होने पर उपभोक्ता को बाकायदा रसीद भी मिलेगी। शुरूआती तौर पर बिजली विभाग ने हर एटीपी मशीन के पास एक कर्मचारी को तैनात किया है। वह उपभोक्ताओं की इस मशीन के इस्तेमाल में मदद कर रहा है।

शादी न कराये जाने पर की पिता की हत्या

शादी न कराये जाने पर की पिता की हत्या


November 26 - 2010


इंदौर। पुलिस ने आज यहां एक व्यक्ति को उसके पिता की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया। वह कथित तौर पर अपनी शादी न कराये जाने को लेकर अपने पिता से नाराज था। पुलिस ने बताया कि शहर के द्वारकापुरी क्षेत्र में के बाद 35 वर्षीय विजय दुबे ने कथित तौर पर अपने पिता ओमप्रकाश दुबे (60) पर मूसल से वार कर दिया। उनकी मौके पर ही मौत हो गयी। पुलिस को मामले की प्रारंभिक जांच में पता चला कि विजय की अब तक शादी नहीं हुई थी। इस बात को लेकर वह अपने परिवार, खासकर पिता से नाराज था। मामले की विस्तृत जांच जारी है. पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि आरोपी की मानसिक स्थिति कैसी है।

चम्बल में बदलेगी महिलाओं की किस्मत

चम्बल में बदलेगी महिलाओं की किस्मत


November 26 2010 5:41 PM


मुरैना। कभी डकैतों के लिए कुख्यात रहे चम्बल अंचल में अब मशरूम के उत्पादन के जरिये महिलाओं की किस्मत बदलने वाली है। मुरैना के कृषि विज्ञान केन्द्र ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में कदम उठाते हुए अब क्षेत्र की ग्रामीण महिलाओं को स्वावलम्बी बनाने के लिए उन्हें मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देना शुरू किया है। अब महिलाएं घर पर ही मशरुम का उत्पादन करेंगी और इससे उन्हें अच्छी खासी आमदनी भी होगी।

केन्द्र के अनुसार चंबल अंचल में मशरुम उत्पादन का अनुपात काफी कम है. इसलिए यहां ग्रामीण महिलाओं के लिये प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसके तहत प्रारंभिक तौर पर जिले के दो गांव सिरमौर का पुरा एवं निठैरा को चुना गया है। जिले की पोरसा तहसील के आरबीपुरा में तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन कर कृषि वैज्ञानिक वाय पी सिंह ने महिलाओं को स्व-सहायता समूह गठित कर घर बैठे परिवार की आय बढ़ाने का तरीका सुझाया है।

यहां महिलाओं ने ‘आयस्टर मशरुम’ उत्पादन विधि को स्वयं प्रयोग करके देखा, इसके अलावा वे बटन मशरुम, मिल्की मशरुम और बेडीस्टा मशरूम के उत्पादन की तकनीक भी सीख रही हैं। उनका दावा है कि मशरुम की खेती अंचल की महिलाओं की किस्मत बदल देगी क्योंकि इसे कम लागत में अधिक उत्पादन किया जा सकता है। बीस से पच्चीस दिनों में मशरुम का उत्पादन शुरु हो जाता है और आवश्यकता से अधिक मशरुम का उत्पादन होने पर उसे सुखाकर भी बेचा जा सकता है।

भाजपा-कांग्रेस को अपनी नहीं, दूसरे की पूरी खबर

भाजपा-कांग्रेस को अपनी नहीं, दूसरे की पूरी खबर
, November 26 -11=2010


भोपाल। मध्य प्रदेश में इन दिनों राजनीति का मिजाज ही निराला है। सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी कांग्रेस का हाल एक मामले में समान है, और वह है अपने हाल से बेखबर होना। वहीं दूसरी ओर उन्हे अपने विरोधी दल के हाल की पूरी खबर है। विधानसभा में चल रहे हंगामें और आरोप-प्रत्यारोपों के दौर के बीच एक बात खुलकर सामने आ गई है कि दोनों दल अपने भीतरी हाल से ज्यादा एक दूसरे के भीतरी हाल को खूब जानते है।

दोनों ही दल के नेताओं ने इसे जाहिर करने में भी कसर नहीं छोड़ी है। कांग्रेस ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर हंगामा किया है और इससे कार्रवाई भी प्रभावित हो रही है। इतना ही नहीं कांग्रेस ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से इस्तीफा तक मांग लिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विधानसभा में चल रहे हंगामे की वजह कांग्रेस के भीतर नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए चल रही होड़ का नतीजा बताया है। कांग्रेसी हंगामा कर हाईकमान के सामने अपने अंक बढाना चाहते है। उनका मानना है कि यह हंगामा किसी और के इशारे पर हो रहा है। इतना ही नहीं कांग्रेस शिवराज से डरी हुई है। वहीं दूसरी ओर कार्यवाहक नेता प्रतिपक्ष चौधरी राकेश सिंह कहते है कि भाजपा धड़ों में बंटी हुई है, यह बात विधानसभा में नजर भी आ जाती है।

संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा बोलते है तो कोई उनका साथ नहीं देता, वहीं उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का साथ देते भाजपा के पूरे विधायक नजर आते है। इतना ही नहीं विजयवर्गीय ने तो सदन में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का जिक्र कर अपनी मंशा भी जाहिर कर दी। संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस को गुटबाजी से घिरा बताते हुए कहा है कि नेता अपने स्वार्थ की पूर्ति और कद बढ़ाने के लिए सदन का समय खराब किए जा रहे है। दोनों दलों में गुटबाजी और एक दूसरे को शिकस्त देने की कोशिशें किसी से छुपी नहीं है, लेकिन दोनों दलों के नेताओं द्वारा अपने दल के हाल का जिक्र में हिचक दिखाई जाती है। इसकी वजह भी है क्योंकि नेता जानते है कि ऐसा करने से उनका अपना ही नुकसान हो सकता है और इसीलिए वे अपने दल का नहीं दूसरे के दल का हाल बयां करने में पीछे नहीं है।

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया का धरना

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया का धरना


Friday, November 26, 2010


भोपाल। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया ने यहां दो दिसम्बर को एक दिवसीय धरने का ऐलान किया है। पार्टी के उपाध्यक्ष साजिद सिद्दकी ने आज यहां संवाददाताओं से कहा कि यह धरना देश में व्याप्त भय, भूख और भ्रष्टाचार के खिलाफ तथा अजमेर, मालेगांव एवं हैदराबाद की मक्का मस्जिद सहित पूरे देश में बम विस्फोट करने वाले वास्तविक गुनाहगारों को सजा दिलाने और इसमें फंसाए गए बेकसूरों की रिहाई के लिए आयोजित किया गया है।

उन्होंने कहा कि पार्टी ने साम्प्रदायिक दंगों के प्रभावितों को इंसाफ एवं समुचित मुआवजे की मांग भी की है. उन्होंने कहा कि देश इस समय बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है और उसके प्रति वफादार और जिम्मेदार हर नागरिक का फर्ज है कि देश को इस स्थिति से बचाए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने वक्फ संपत्तियों पर सरकारी और गैर सरकारी लोगों का कब्जा, रोजगारी, अलीगढ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के भोपाल सेंटर को जमीन का नहीं देने, मुसलमानों के आरक्षण में रुकावटें दूर करने, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक और किसानों के हित की बात करने के साथ ही भोपाल गैस पीडितों को कम से कम तीन लाख रुपए मुआवजा की मांग भी प्रमुखता से उठाई है।

मंत्री समूह का निर्णय गैस पीड़ितों से धोखा


मंत्री समूह का निर्णय गैस पीड़ितों से धोखा


Story Update : Friday, November 26, 2010 1:53 AM


भोपाल। भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन ने भोपाल पर मंत्री समूह द्वारा गैस पीड़ितों के लिए किए गए मुआवजा के हालिया ऐलान को पीड़ितों से धोखा बताते हुए कहा है कि ऐसा कर उसने तत्कालीन राजीव गांधी सरकार द्वारा यूनियन कार्बाइड से किए गए 470 मिलियन अमेरिकी डालर के मुआवजा समको सही ठहराने का प्रयास किया है।

संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार ने आज यहां संवाददाताओं से कहा कि मंत्री समूह द्वारा कुछ गैस पीड़ितों के लिए मुआवजा के ताजा ऐलान से मृत्यु के प्रकरणों में से लगभग 13,369 एवं घायलों में से 5.34 लाख से अधिक मुआवजा पाने से वंचित रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस साल 24 जून एवं 27 सितंबर को पी चिदम्बरम की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह द्वारा लिया गया निर्णय अन्यायपूर्ण है।

इसमें 48,652 मृत्यु प्रकरणों एवं प्रभावितों को ही मुआवजा दिया जाना है, जिसमें 22,150 मृत्यु दावों में से 8,781 को पूर्व में दिए गए मुआवजे में कटौती होगी तथा 5.74 लाख प्रमाणित घायल दावेदारों में से 39,871 को ही मुआवजा मिलेगा। जब्बार ने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री समूह ने इस निर्णय के जरिए एक बार फिर प्रमाणित कर दिया है कि वह फरवरी 1989 में तत्कालीन राजीव गांधी सरकार द्वारा यूनियन कार्बाइड कार्पोरेशन से किए गए 470 मिलियन अमेरिकी डालर यानि 715 करोड़ रूपये के समको सही ठहराने का प्रयास कर रही है।

शत्रुओं के समक्ष कभी घुटने नहीं टेकेंगे’


प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुम्बईवासियों के ‘जज्बे, एकता और संकल्प’ को सलाम करते हुए कहा है कि 26/11 के साजिशकर्ताओं को सजा दिलाने के लिए सरकार की ओर से प्रयास और तेज किए जाएंगे। मुम्बई हमले की दूसरी बरसी पर मनमोहन सिंह ने एक बयान जारी कर कहा कि दो साल पहले आज के दिन मुम्बई को एक बर्बर आतंकवादी हमले का सामना करना पड़ा था जिसमें सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान चली गई।

मुम्बईवासियों के जज्बे को सलाम
इस हमले में मारे गए लोगों को याद करने और श्रद्धांजलि देने में पूरा देश पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि हम आम मुम्बईवासियों के जज्बे, एकता और संकल्प एवं वर्दी पहने हमारे जवानों की निःस्वार्थ कार्रवाई और बहादुरी को सलाम करते हैं। यही जज्बा है जिसके जरिए हम उन ताकतों को परस्त कर सकते हैं जो हमारी सामाजिक संरचना और जीवनशैली के लिए खतरा पैदा करते हैं।

सजा दिलाने के प्रयास तेज करेंगे
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपने शत्रुओं के समक्ष कभी घुटने नहीं टेकेगा। उन्होंने कहा कि हम विश्वास दिलाते हैं कि मुम्बई के हमलावरों को सजा दिलाने के लिए प्रयास और तेज किए जाएंगे। गौरतलब है कि 26 नवम्बर, 2008 को पाकिस्तान से आए 10 आतंकवादियों ने मुम्बई के ताज होटल सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों पर हमला किया था। इसमें लगभग 166 लोग मारे गए थे।

महाराष्ट्र पुलिस ने दक्षिण मुंबई में की परेड
वहीं, दूसरी तरफ देश की औद्योगिक राजधानी में 26 नवम्बर 2008 के दिन हुए आतंकवादी हमले की बरसी पर आज महाराष्ट्र पुलिस ने दक्षिण मुंबई में एक परेड का आयोजन किया। परेड की शुरूआत आतंकियों का निशाना बने ओबेराय ट्राइडेंट होटल से हुई। इस परेड में फोर्स वन, क्विक रेस्पांस टीम्स (क्यूआरटी) और मुंबई पुलिस के जवान शामिल हुए। मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने परेड की सलामी ली। परेड में आतंकवाद से निपटने के लिए अत्याधुनिक जंगी वाहनों और हथियारों का प्रदर्शन किया गया, जो प्रदेश पुलिस को आतंकवादी हमलों के बाद मिले हैं।

सैकड़ों की संख्या में छात्र मौजूद
परेड के दौरान सैकड़ों की संख्या में मौजूद छात्रों ने लगभग 1.3 किलोमीटर लंबा एक बैनर पकड़ा हुआ था, जिस पर ‘द ग्रेट वॉल ऑफ मुंबई’ लिखा था। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, प्रदेश के गृह मंत्री आर आर पाटिल, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री आरिफ नसीम खान, पुलिस महानिदेशक डी शिवानंदन और मुंबई पुलिस आयुक्त संजीव दयाल ने भी परेड की सलामी ली।

पाटिल की कसाब से मुलाकात शर्मनाक : ठाकरे


<पाटिल की कसाब से मुलाकात शर्मनाक : ठाकरे

Friday, November 26, 2010


शिवसेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री आर आर पाटिल और विधानसभा में विपक्ष के नेता एकनाथ खडसे की 26/11 के आतंकी अजमल कसाब से आर्थर रोड जेल में हाल में की गई मुलाकात को शर्मनाक बताया है। शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में बाल साहब ने आज कहा कि आपको जेल जाकर कसाब से शर्मनाक मुलाकात करने की क्या जरुरत थी। क्या आप आम आदमी की भावनाओं का सम्मान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कसाब मजे में है और सरकारी सुविधाओं का आनंद ले रहा हैं। उल्लेनीय है कि कसाब और अन्य नौ आतंकवादियों ने मुंबई पर दो साल पहले हमला किया था जिसमें 166 लोग मारे गए थे।

कर्नाटक सरकार और लोकायुक्त में ठनी


मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा पर लगे जमीन घोटाला मामले की न्यायिक जांच कराने के राज्य सरकार के फैसले पर लोकायुक्त संतोष हेगड़े ने आपत्ति जताई है और कहा है कि इस मुद्दे पर एक शिकायत की लंबित जांच वह पूरी करेंगे। हेगड़े ने इस संबंध में सरकार को भी लिखा है। उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा लंबित जांच को वे मुझसे नहीं ले सकते। उन्होंने सरकार की इस दलील को खारिज किया कि न्यायिक जांच का दायरा काफी व्यापक है और जिस केंद्रीय कानून के तहत जांच के आदेश दिए गए हैं वह राज्य लोकायुक्त कानून से ऊपर है।

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश हेगड़े ने कहा कि साफ साफ प्रावधान है कि केवल लोकायुक्त के पूर्व सहमति से ही सरकार ऐसे किसी मुद्दे की जांच के आदेश दे सकती है जो पहले से ही लोकायुक्त के समक्ष है। हेगड़े का यह कड़ा बयान न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी पद्माराज के मुख्यमंत्री के खिलाफ एक सदस्यीय जांच आयोग के लिए हां कहने के बाद आया है। कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड की जमीन को अपनी बेटी और गैरअधिसूचित बेंगलूर विकास प्राधिकरण की जमीन को अपने दामाद और बेटों को देने के लगे विपक्ष के लगाए आरोपों की जांच करने के लिए येदियुरप्पा ने जांच के आदेश दिये थे।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एक पत्र में पद्मराज ने लोक हित में इस आयोग की अध्यक्षता स्वीकार कर ली है। उन्होंने आयोग के सुचारू कामकाज के लिए सरकार से जरूरी सुविधाएं उपलध कराने की मांग की है। हेगड़े ने कहा कि लोकायुक्त की पूर्व अनुमति के बिना इस मामले को किसी और जांच के लिए नहीं भेजा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना समकानून का जिक्र किया और कर्नाटक लोकायुक्त कानून भारत के राष्ट्रपति की सहमति से पारित किया गया था।

नीतीश ने फिर संभाली बिहार की कमान


नीतीश ने फिर संभाली बिहार की कमान

पटना।

Friday, November 26, 2010


बिहार विधानसभा चुनाव में जबरदस्त कामयाबी हासिल करने के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के नेता नीतीश कुमार ने पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सुशील मोदी ने भी शपथ ली जो संभवतः उप मुख्यमंत्री के रूप में फिर से नीतीश मंत्रिपरिषद में शामिल होंगे। राज्यपाल देवानंद कुंवर दोपहर ढाई बजे उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। नीतीश के शपथ लेने के बाद मोदी ने शपथ ली।

नए मंत्रिपरिषद में 30 लोगों को जगह
शपथ ग्रहण समारोह के लिए गांधी मैदान में पूरजोर तैयारियां की गई थीं। नए मंत्रिपरिषद में 30 लोगों को जगह दी गई है। शपथ ग्रहण समारोह में राजग केनेता लालकृष्ण आडवाणी, शरद यादव, नितिन गडकरी, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, राजीव प्रताप रूड़ी सहित कई दिग्गज मौजूद थे। नीतीश ने तीसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। वह अपनी पहली पारी में बहुमत के अभाव की वजह से इस पद पर सात दिनों तक ही रह पाए थे। दूसरी बार 2005 में नीतीश बिहार के मुख्यमंत्री बने। इस बार विधानसभा चुनाव में राजग ने विधानसभा की कुल 243 सीटों में से 206 सीटों पर कब्जा जमाया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और लोक जनश्क्ति पार्टी (लोजपा) गठबंधन को महज 25 सीटों से ही संतोष

Saturday, November 13, 2010


भारत की खुफ़िया एजेंसी जिसका गठन सन १९६८ में हुआए ने विभिन्न देशों की गुप्तचर एजेंसियों जैसे अमेरिका की सीआईएए रूस की केजीबीए इसराईल की मोस्साद और फ़्रांस तथा जर्मनी में अपने पेशेगत संपर्क बढाये और एक नेटवर्क खडा़ किया । इन खुफ़िया एजेंसियों के अपने.अपने सूत्र थे और वे आतंकवादए घुसपैठ और चीन के खतरे के बारे में सूचनायें आदान.प्रदान करने में सक्षम थीं । लेकिन ष्रॉष् ने इटली की खुफ़िया एजेंसियों से इस प्रकार का कोई सहयोग या गठजोड़ नहीं किया थाए क्योंकि ष्रॉष् के वरिष्ठ जासूसों का मानना था कि इटालियन खुफ़िया एजेंसियाँ भरोसे के काबिल नहीं हैं और उनकी सूचनायें देने की क्षमता पर भी उन्हें संदेह था ।
सक्रिय राजनीति में राजीव गाँधी का प्रवेश हुआ १९८० में संजय की मौत के बाद । ष्रॉष् की नियमित ष्ब्रीफ़िंगष् में राजीव गाँधी भी भाग लेने लगे थे ;ष्ब्रीफ़िंगष् कहते हैं उस संक्षिप्त बैठक को जिसमें रॉ या सीबीआई या पुलिस या कोई और सरकारी संस्था प्रधानमन्त्री या गृहमंत्री को अपनी रिपोर्ट देती हैद्धए जबकि राजीव गाँधी सरकार में किसी पद पर नहीं थेए तब वे सिर्फ़ काँग्रेस महासचिव थे । राजीव गाँधी चाहते थे कि अरुण नेहरू और अरुण सिंह भी रॉ की इन बैठकों में शामिल हों । रॉ के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने दबी जुबान में इस बात का विरोध किया था चूँकि राजीव गाँधी किसी अधिकृत पद पर नहीं थेए लेकिन इंदिरा गाँधी ने रॉ से उन्हें इसकी अनुमति देने को कह दिया थाए फ़िर भी रॉ ने इंदिरा जी को स्पष्ट कर दिया था कि इन लोगों के नाम इस ब्रीफ़िंग के रिकॉर्ड में नहीं आएंगे । उन बैठकों के दौरान राजीव गाँधी सतत रॉ पर दबाव डालते रहते कि वे इटालियन खुफ़िया एजेंसियों से भी गठजोड़ करेंए राजीव गाँधी ऐसा क्यों चाहते थे घ् या क्या वे इतने अनुभवी थे कि उन्हें इटालियन एजेंसियों के महत्व का पता भी चल गया था घ् ऐसा कुछ नहीं थाए इसके पीछे एकमात्र कारण थी सोनिया गाँधी । राजीव गाँधी ने सोनिया से सन १९६८ में विवाह किया थाए और हालांकि रॉ मानती थी कि इटली की एजेंसी से गठजोड़ सिवाय पैसे और समय की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं हैए राजीव लगातार दबाव बनाये रहे । अन्ततः दस वर्षों से भी अधिक समय के पश्चात रॉ ने इटली की खुफ़िया संस्था से गठजोड़ कर लिया । क्या आप जानते हैं कि रॉ और इटली के जासूसों की पहली आधिकारिक मीटिंग की व्यवस्था किसने की घ् जी हाँए सोनिया गाँधी ने । सीधी सी बात यह है कि वह इटली के जासूसों के निरन्तर सम्पर्क में थीं । एक मासूम गृहिणीए जो राजनैतिक और प्रशासनिक मामलों से अलिप्त हो और उसके इटालियन खुफ़िया एजेन्सियों के गहरे सम्बन्ध हों यह सोचने वाली बात हैए वह भी तब जबकि उन्होंने भारत की नागरिकता नहीं ली थी ;वह उन्होंने बहुत बाद में लीद्ध । प्रधानमंत्री के घर में रहते हुएए जबकि राजीव खुद सरकार में नहीं थे । हो सकता है कि रॉ इसी कारण से इटली की खुफ़िया एजेंसी से गठजोड़ करने मे कतरा रहा होए क्योंकि ऐसे किसी भी सहयोग के बाद उन जासूसों की पहुँच सिर्फ़ रॉ तक न रहकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक हो सकती थी ।
जब पंजाब में आतंकवाद चरम पर था तब सुरक्षा अधिकारियों ने इंदिरा गाँधी को बुलेटप्रूफ़ कार में चलने की सलाह दीए इंदिरा गाँधी ने अम्बेसेडर कारों को बुलेटप्रूफ़ बनवाने के लिये कहाए उस वक्त भारत में बुलेटप्रूफ़ कारें नहीं बनती थीं इसलिये एक जर्मन कम्पनी को कारों को बुलेटप्रूफ़ बनाने का ठेका दिया गया । जानना चाहते हैं उस ठेके का बिचौलिया कौन थाए वाल्टर विंसीए सोनिया गाँधी की बहन अनुष्का का पति ! रॉ को हमेशा यह शक था कि उसे इसमें कमीशन मिला थाए लेकिन कमीशन से भी गंभीर बात यह थी कि इतना महत्वपूर्ण सुरक्षा सम्बन्धी कार्य उसके मार्फ़त दिया गया । इटली का प्रभाव सोनिया दिल्ली तक लाने में कामयाब रही थींए जबकि इंदिरा गाँधी जीवित थीं । दो साल बाद १९८६ में ये वही वाल्टर विंसी महाशय थे जिन्हें एसपीजी को इटालियन सुरक्षा एजेंसियों द्वारा प्रशिक्षण दिये जाने का ठेका मिलाए और आश्चर्य की बात यह कि इस सौदे के लिये उन्होंने नगद भुगतान की मांग की और वह सरकारी तौर पर किया भी गया । यह नगद भुगतान पहले एक रॉ अधिकारी के हाथों जिनेवा ;स्विटजरलैण्डद्ध पहुँचाया गया लेकिन वाल्टर विंसी ने जिनेवा में पैसा लेने से मना कर दिया और रॉ के अधिकारी से कहा कि वह ये पैसा मिलान ;इटलीद्ध में चाहता हैए विंसी ने उस अधिकारी को कहा कि वह स्विस और इटली के कस्टम से उन्हें आराम से निकलवा देगा और यह ष्कैशष् चेक नहीं किया जायेगा । रॉ के उस अधिकारी ने उसकी बात नहीं मानी और अंततः वह भुगतान इटली में भारतीय दूतावास के जरिये किया गया । इस नगद भुगतान के बारे में तत्कालीन कैबिनेट सचिव बीण्जीण्देशमुख ने अपनी हालिया किताब में उल्लेख किया हैए हालांकि वह तथाकथित ट्रेनिंग घोर असफ़ल रही और सारा पैसा लगभग व्यर्थ चला गया । इटली के जो सुरक्षा अधिकारी भारतीय एसपीजी कमांडो को प्रशिक्षण देने आये थे उनका रवैया जवानों के प्रति बेहद रूखा थाए एक जवान को तो उस दौरान थप्पड़ भी मारा गया । रॉ अधिकारियों ने यह बात राजीव गाँधी को बताई और कहा कि इस व्यवहार से सुरक्षा बलों के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है और उनकी खुद की सुरक्षा व्यवस्था भी ऐसे में खतरे में पड़ सकती हैए घबराये हुए राजीव ने तत्काल वह ट्रेनिंग रुकवा दीएलेकिन वह ट्रेनिंग का ठेका लेने वाले विंसी को तब तक भुगतान किया जा चुका था ।
राजीव गाँधी की हत्या के बाद तो सोनिया गाँधी पूरी तरह से इटालियन और पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों पर भरोसा करने लगींए खासकर उस वक्त जब राहुल और प्रियंका यूरोप घूमने जाते थे । सन १९८५ में जब राजीव सपरिवार फ़्रांस गये थे तब रॉ का एक अधिकारी जो फ़्रेंच बोलना जानता थाए उनके साथ भेजा गया थाए ताकि फ़्रेंच सुरक्षा अधिकारियों से तालमेल बनाया जा सके । लियोन ;फ़्रांसद्ध में उस वक्त एसपीजी अधिकारियों में हड़कम्प मच गया जब पता चला कि राहुल और प्रियंका गुम हो गये हैं । भारतीय सुरक्षा अधिकारियों को विंसी ने बताया कि चिंता की कोई बात नहीं हैए दोनों बच्चे जोस वाल्डेमारो के साथ हैं जो कि सोनिया की एक और बहन नादिया के पति हैं । विंसी ने उन्हें यह भी कहा कि वे वाल्डेमारो के साथ स्पेन चले जायेंगे जहाँ स्पेनिश अधिकारी उनकी सुरक्षा संभाल लेंगे । भारतीय सुरक्षा अधिकारी यह जानकर अचंभित रह गये कि न केवल स्पेनिश बल्कि इटालियन सुरक्षा अधिकारी उनके स्पेन जाने के कार्यक्रम के बारे में जानते थे । जाहिर है कि एक तो सोनिया गाँधी तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के अहसानों के तले दबना नहीं चाहती थीं और वे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों पर विश्वास नहीं करती थीं । इसका एक और सबूत इससे भी मिलता है कि एक बार सन १९८६ में जिनेवा स्थित रॉ के अधिकारी को वहाँ के पुलिस कमिश्नर जैक कुन्जी़ ने बताया कि जिनेवा से दो वीआईपी बच्चे इटली सुरक्षित पहुँच चुके हैंए खिसियाये हुए रॉ अधिकारी को तो इस बारे में कुछ मालूम ही नहीं था । जिनेवा का पुलिस कमिश्नर उस रॉ अधिकारी का मित्र थाए लेकिन यह अलग से बताने की जरूरत नहीं थी कि वे वीआईपी बच्चे कौन थे । वे कार से वाल्टर विंसी के साथ जिनेवा आये थे और स्विस पुलिस तथा इटालियन अधिकारी निरन्तर सम्पर्क में थे जबकि रॉ अधिकारी को सिरे से कोई सूचना ही नहीं थीए है ना हास्यास्पद लेकिन चिंताजनकण्ण्ण् उस स्विस पुलिस कमिश्नर ने ताना मारते हुए कहा कि ष्तुम्हारे प्रधानमंत्री की पत्नी तुम पर विश्वास नहीं करती और उनके बच्चों की सुरक्षा के लिये इटालियन एजेंसी से सहयोग करती है। बुरी तरह से अपमानित रॉ के अधिकारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी शिकायत की लेकिन कुछ नहीं हुआ । अंतरराष्ट्रीय खुफ़िया एजेंसियों के गुट में तेजी से यह बात फ़ैल गई थी कि सोनिया गाँधी भारतीय अधिकारियों भारतीय सुरक्षा और भारतीय दूतावासों पर बिलकुल भरोसा नहीं करती हैंए और यह निश्चित ही भारत की छवि खराब करने वाली बात थी । राजीव की हत्या के बाद तो उनके विदेश प्रवास के बारे में विदेशी सुरक्षा एजेंसियाँए एसपीजी से अधिक सूचनायें पा जाती थी और भारतीय पुलिस और रॉ उनका मुँह देखते रहते थे । ;ओट्टावियो क्वात्रोची के बार.बार मक्खन की तरह हाथ से फ़िसल जाने का कारण समझ में आया उनके निजी सचिव विंसेंट जॉर्ज सीधे पश्चिमी सुरक्षा अधिकारियों के सम्पर्क में रहते थेए रॉ अधिकारियों ने इसकी शिकायत नरसिम्हा राव से की थी लेकिन जैसी की उनकी आदत थी वे मौन साध कर बैठ गये ।
संक्षेप में तात्पर्य यह किए जब एक गृहिणी होते हुए भी वे गंभीर सुरक्षा मामलों में अपने परिवार वालों को ठेका दिलवा सकती हैंए राजीव गाँधी और इंदिरा गाँधी के जीवित रहते रॉ को इटालियन जासूसों से सहयोग करने को कह सकती हैंए सत्ता में ना रहते हुए भी भारतीय सुरक्षा अधिकारियों पर अविश्वास दिखा सकती हैंए तो अब जबकि सारी सत्ता और ताकत उनके हाथों मे हैए वे क्या.क्या कर सकती हैंए बल्कि क्या नहीं कर सकती । हालांकि ष्मैं भारत की बहू हूँष् और ष्मेरे खून की अंतिम बूँद भी भारत के काम आयेगीष् आदि वे यदा.कदा बोलती रहती हैंए लेकिन यह असली सोनिया नहीं है । समूचा पश्चिमी जगतए जो कि जरूरी नहीं कि भारत का मित्र ही होए उनके बारे में सब कुछ जानता हैए लेकिन हम भारतीय लोग सोनिया के बारे में कितना जानते हैं घ् ;भारत भूमि पर जन्म लेने वाला व्यक्ति चाहे कितने ही वर्ष विदेश में रह लेए स्थाई तौर पर बस जाये लेकिन उसका दिल हमेशा भारत के लिये धड़कता है! और इटली में जन्म लेने वाले व्यक्ति का भी

Tuesday, November 23, 2010

पर्यटन निगम से चालीस फीसदी के रियायती गोल्डन कार्ड से लुत्फ



पर्यटन निगम से चालीस फीसदी के रियायती गोल्डन कार्ड से लुत्फ
भोपाल । भले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश को आने वाले समय में स्वर्णिम बनाने का प्रयास करें परन्तु अफसरों का स्वर्णिम मप्र तो पहले से ही बना हुआ है। उन्हें उच्च पदों पर आसाीन होने के कारण पहले से ही भारी भरकम सरकारी सुविधायें पहले से ही मिली हुई हैं परन्तु इसके अलावा वे मप्र पर्यटन विकास निगम का चालीस प्रतिशत रियायती गोल्डन कार्ड लेकर पर्यटन निगम की होटलों और उनके खानपान का जमकर लुत्फ उठा रहे हैं। सरकारी धन एवं सुविधाओं से बने पर्यटन निगम की होटलों को तो आम लोगों की पहुंच से दूर रखने के लिये पहले से ही भारी भरकम दरें निर्धारित की हुई हैं परन्तु अफसरों को इसका लाभ देने के लिये या उनका एशगाह बनाने के लिये उन्हें जमकर रियायतें दे रखी हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि पर्यटन निगम ने गरीब वर्ग के लोगों के लिये विभिन्न धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन केद्रों पर एक भी आउटलेट नहीं बनाया है जबकि राज्य की शिवराज सरकार एकात्म मानववाद का नारा देकर अंतिम पंक्ति पर बैठे व्यक्ति को सरकारी योजनाओं, कार्यक्रमों एवं गतिविधियों का लाभ देने का नारा लगाती है।
पर्यटन निगम को अफसरों की एशगाह बनाने का भडाफोड़ किया है एक एनजीओ संस्था जनसंवेदना ने। इस एनजीओ के प्रमुख राधेश्याम अग्रवाल ले सूचना के अधिकार का कानून के तहत पर्यटन निगम से अफसरों को रियायती कार्ड देने सम्बन्धी जो जानकारी हासिल की वह चौंकाने वाली है। इसमें लोकायुक्त से लेकर चीफ सेके्रटरी, डीजीपी, आयकर आयुक्त, मेजर जनरल और भारतीय वन सेवा के लोग तक भी शामिल हैं। कई महिला आईएएस एवं आईपीएस अधिकारी भी इस रियायत का लुत्फ उठाने में पीछे नहीं हैं। यही नहीं आयकर छापे में करोड़ों रुपये निवास से मिलने पर निलम्बित आईएएस अधिकारी अरविन्द जोशी को भी पर्यटन निगम ने इस साल गोल्डन रियायती कार्ड जारी किया हुआ है।
सूचना के अधिकार कानून के तहत लगे आवेदन पर पर्यटन निगम ने जानकारी दी है कि उसने अफसरों को गोल्ड कार्ड जारी किये हैं जिसमें पर्यटन निगम के होटलों के कक्षों में ठहरने हेतु चालीस प्रतिशत तथा खानपान पर तीस प्रतिशत की छूट दी जाती है। ऐसे गोल्डन कार्ड वर्ष 2009-10 तथा वर्ष 2010-11 दोनों में जारी किये गये हैं।
ये अफसर उठा रहे हैं गोल्डन कार्ड का लुत्फ : राकेश साहनी, आभा अस्थाना, अनुराग जैन, वीरा राणा, प्रवेश शर्मा, प्रशांत मेहता, सुमित बोस, अंशु वैश्य, दिलीप मेहरा, अवनि वैश्य, एपी श्रीवास्तव, डीपी तिवारी, आईएस दाणी, एसपीएस परिहार, पद्मवीर सिंह, डीएस राय, सुधा चौधरी, मनोज झालानी, आरके स्वाई, अरविन्द कुमार जोशी, स्नेहलता श्रीवास्तव, रंजना चौधरी, एके अग्रवाल, मोहम्मद सुलेमान, केके सिंह, एएन अस्थाना, शहबाज अहमद, आलोक दवे, डीबी गंगोपाध्याय, एचएस पाबला, सुहास कुमार, पीके शर्मा, अनिल जैन, सुखराज सिंह, अरविन्द कुमार, एसके राउत, एमपी जार्ज, एमआर कृष्णा, डीजी कपाडिया, आईएस चौहान, पवन कुमार जैन, विजय कुमार, विजय रमन, संजीव कुमार सिंह, वीके पंवार, संजलय राणा, एमपी द्विवेदी, यूसी सारंगी, एमबी सागर, आरके दिवाकर, स्वराज पुरी, सीपीजी उन्नी, ओपी रावत, राजेन्द्र कुमार, रमन कक्कड़, यूके लाल, अन्वेष मंगलम, वीके सिंह, रमेश शर्मा, ओपी गर्ग, आईएन कंसोटिया, आरसी छारी, डीसी जुगरान, पंकज राग, आरपी कपूर, एससी बेहार, निर्मला बुच, केएस शर्मा, अलका उपाध्याय, अशोक दोहरे, हेमंत सरीन, महेश शर्मा, विश्वमोहन उपाध्याय, एसपी डंगवाल, एमके मोघे, आरपी शर्मा, एससी शर्मा, डीएस सेंगर, जेएस माथुर, एसआर मोहन्ती,एम मोहन राव, देवेन्द्र सिंघई, एम नटराजन, जयदीप गोविन्द, एएस जोशी, राकेश बंसल, राकेश अग्रवाल, राकेश बहल, वीआर खरे, डीएस माथुर, सरबजीत सिंह, मनोज झालानी, एके दुबे, शिखा दुबे, विनोद चौधरी, शिवनारायण द्विवेदी, अशोक दास, एसके मितना, अजीता वाजपेई, एआर पवार, शैलेन्द्र श्रीवास्तव, एमएम उपाध्याय, जब्बार ढाकवाला,केसी गुप्ता, विपिन दीक्षित, आरएस नेगी, एमएस राणा, एके रेखी, वीणा घाणेकर, वीरेन्द्र सिंह, आईएम चहल, केके तिवारी, आरबी सिंह, टी धर्माराव, राजन एस कटोच, शैलेन्द्र सिंह, विनोदानन्द झा, एसके वेद, राजेन्द्र मिश्रा, अजय कुमार शर्मा, के नायक, मेजर जनरल वायएस नेगी, जगदीश प्रसाद, आरके गर्ग, ललित कुमार सूद, आर परशुराम, एमआर आसुदानी, एससी वर्धन, अनिमेश शुक्ल, एसएन मिश्रा, पुरुषोत्तम शर्मा, एके राणा, आरबी सिन्हा, सुशाील कुमार लूथरा, पीपी नावलेकर, जीके सिन्हा, एमपी सिंह, पीएम शर्मा तथा एसपी शुक्ला।
क्या कहना है पर्यटन निगम का : उच्च पदों पर बैठे सरकारी प्रमुखों को रियायती दर का गोल्डन कार्ड देने के बारे में पर्यटन निगम के अफसर चुप्पी साधे हैं। एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि हम तो ऐस किसी भी रियाय के खिलाफ हैं परन्तु मंत्रालय में बैठे शासन के लोगों के दबाव में ऐसा करना पड़ता है।


आर.एस. अग्रवाल
9826013975
लोकवार्ता इंटरनेट समाचार सेवायह है अफसरों का स्वर्णिम मप्र

मंत्री दर्जा प्राप्त होने पर मंत्रिमंडल से बाहर 36 लोगों को लालबत्ती की सुविधा

मंत्री दर्जा प्राप्त होने पर मंत्रिमंडल से बाहर 36 लोगों को लालबत्ती की सुविधा

भोपाल, 23 नवंबर 2010। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की सरकार में निगम मंडलों व अन्य पदों पर पदस्थ 36 लोगों को कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री एवं उपमंत्री का दर्जा प्राप्त है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा में विधायक गिरिजाशंकर के प्रश्न के जवाब में उक्त जानकारी देते हुए बताया कि कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री, उपमंत्री दर्जा आदेश जारी होने के लिए निवासी संबंधी जानकारी लेने की प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने बताया कि इन 36 लोगों को स्वैच्छानुदान राशि देने पर कहा कि प्रश्न ही नहीं उठता है।
सदन में दी गई जानकारी के अनुसार सर्वश्री विजय पाल सिंह, अध्यक्ष मप्र पाठ्य पुस्तक निगम (राज्यमंत्री), श्रीमती कृष्णकांता तोमर, अध्यक्ष म.प्र. राज्य महिला आयोग (मंत्री), श्रीमती उषा चतुर्वेदी अध्यक्ष, मप्र राज्य समाज कल्याण सलाहकार बोर्ड (राज्यमंत्री), श्री देवेन्द्र वर्मा उपाध्यक्ष, म.प्र राज्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण निगम (राज्यमंत्री), श्री कोकसिंह नरवरिया, अध्यक्ष म.प्र. स्टेट माइनिंग कार्पाेरेशन (राज्यमंत्री), श्री राजेन्द्र पाठक अध्यक्ष, राज्य कृषक आयोग (मंत्री), श्री गुरुप्रसाद शर्मा, अध्यक्ष मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम (मंत्री), श्री ध्रुवनारायण सिंह, अध्यक्ष मप्र पर्यटन विकास निगम (मंत्री), श्री जयसिंह कुशवाह, अध्यक्ष विशेष क्षेत्र प्राधिकरण ग्वालियर (मंत्री), श्री शैतान सिंह पाल, अध्यक्ष राज्य पशुधन कुक्कुट विकास निगम (मंत्री), श्री बाबूलाल जैन, अध्यक्ष मप्र सामान्य निर्धन वर्ग कल्याण निगम (मंत्री), श्री शिवराज भैया लोधी, उपाध्यक्ष बुंदेलखण्ड विकास प्राधिकरण (राज्यमंत्री), श्री अशोक चौरसिया, उपाध्यक्ष बुन्देलखण्ड विकास प्राधिकरण (राज्यमंत्री), श्री जयप्रकाश चतुवेदी, उपाध्यक्ष बुन्देलखण्ड विकास प्राधिकरण (राज्यमंत्री), श्री नारायण सिंह बंजारा, अध्यक्ष मप्र. राज्य विमुक्त घुमक्कड़ एवं अद्र्ध घुम्मकड़ जाति विकास अभिकरण (राज्यमंत्री), श्री गुफराने आजम, अध्यक्ष म.प्र. वक्फ बोर्ड (कैबिनेट मंत्री), श्री मोहम्मद सलीम कुरैशी, अध्यक्ष मप्र राज्य हज कमेटी (राज्यमंत्री), श्री डालचंद पटेल कुशवाह, उपाध्यक्ष बुंदेलखण्ड विकास प्राधिकरण (राज्यमंत्री), श्री जी.व्ही. एल, नरसिंहराव, मीडिया सलाहकार मुख्यमंत्री (राज्यमंत्री), श्री निर्मलजीत सिंह सलूजा, उपाध्यक्ष मप्र पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम (राज्यमंत्री), श्री गंगाराम घोसरे, उपाध्यक्ष मप्र राज्य सफाई कामगार आयोग (राज्यमंत्री), श्री शशिकान्त शुक्ला, उपाध्यक्ष महाकौशल विकास प्राधिकरण (राज्यमंत्री), श्री राकेश साहनी, सलाहकार एवं अध्यक्ष ऊर्जा मध्यप्रदेश शासन भोपाल एवं राज्य विद्युत मंडल (मंत्री), सुश्री शला खéा, अध्यक्ष म.प्र. बाल अधिकार संरक्षण आयोग (मंत्री), श्री रमेश शर्मा (गुट्टू भैया), अध्यक्ष स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पारेशन (मंत्री), श्री सत्यनारायण सŸान, अध्यक्ष मप्र. खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड (मंत्री), श्री मधुकर हर्णे, अध्यक्ष मप्र राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम (मंत्री), श्री रामकिशन चौहान, अध्यक्ष स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डेव्हलपमेंट कार्पारेशन (मंत्री), श्री बृजेन्द्र सिंह सिसौदिया, अध्यक्ष म.प्र. ऊर्जा विकास निगम (मंत्री), श्रीमती अनिता नायक, उपाध्यक्ष स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पारेशन (राज्यमंत्री), श्री कमलेश्वर सिंह, उपाध्यक्ष मप्र राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम (राज्यमंत्री), श्री गोविन्द मालू, उपाध्यक्ष स्टेट माईनिंग कार्पाेरेशन (राज्यमंत्री), श्री बाबूलाल मेवरा, उपाध्यक्ष वन विकास निगम (राज्यमंत्री), श्री रामलाल रौतेल, अध्यक्ष मप्र राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग (कैबिनेट मंत्री), श्री शिवराज शाह ‘शिव भैया’ सदस्य मप्र राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग (राज्यमंत्री) मंत्री दर्जा प्राप्त होने पर लालबत्ती के साथ बंगला एवं नौकर की सुविधा मिली है। के साथ बंगला एवं नौकर की सुविधा मिली है।
आर.एस. अग्रवाल
9826013975
लोकवार्ता इंटरनेट समाचार सेवा

विमान ने उड़ान भरी, 23 वर्ष के एक पुरुष यात्री ने अपने सभी कपड़े उतार दिए और आसमान में उड़ान भर चुके हवाई जहाज़ के बीचोंबीच के रास्ते में चिल्लाकर दौ


रूस में ओंम्क और व्लादिवोस्टोक शहरों के बीच यात्रा कर रहे विमान में सवार एक यात्री ने अपने कपड़े उतार कर हंगामा खड़ा कर दिया। दोनों शहरों के बीच हवाई यात्रा की दूरी छह घंटों की है।

जैसे ही विमान ने उड़ान भरी, 23 वर्ष के एक पुरुष यात्री ने अपने सभी कपड़े उतार दिए और आसमान में उड़ान भर चुके हवाई जहाज़ के बीचोंबीच के रास्ते में चिल्लाकर दौड़ने लगा।

हवाई जहाज में सवार बाकी यात्री यह देखकर स्तब्ध रह गए। उन्हें ये पता नहीं चल पा रहा था कि वो क्या करें और किधर देखें। यह अजीबोगरीब परिस्थिति करीब डेढ़ घंटे तक चली।

हवाई जहाज जब ईंधन भरवाने के लिए क्रैस्नोयार्क्स शहर उतरा, तब उधम मचाने वाले इस यात्री को विमान से उतार दिया गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, ये देखने के लिए कि कहीं वे नशे की हालत में तो नहीं है।

इसके बाद यात्रियों ने राहत की साँस ली और हवाई जहाज ने अपने गंतव्य के लिए उड़ान भरी। एयरलाइन को कथित तौर पर किसी भी यात्री से इस घटना के संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है।

योग से डायबिटीज दूर


योग से डायबिटीज दूर
इन दिनों डायबिटीज के मरीजों की संख्या में दिन-ब-दिन बढ़ोतरी हो रही है। वक्रासन, कुर्मासन, योगमुद्रा, शलभासन, धनुरासन आदि के माध्यम से काफी हद तक डायबिटीज को दूर किया जा सकता है।

लोनावला स्थित केवल्यधाम नामक योग संस्था में वैज्ञानिकों ने शोध कर पाया कि योगासनों के माध्यम से पूर्ण रूप से डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए मरीजों को नियमित एक घंटे योग करना जरूरी है। इसके साथ अपनी गतिविधियों पर भी नियंत्रण रखना होता है। पेनक्रियाज (क्लोम गं्रथि) ही रक्त में बढ़ी हुई इंसुलिन को नियंत्रित करती है, जिससे डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है। योगासन इन पेनक्रियाज पर जोर डालते हुए उसे दोबारा इंसुलिन के लिए तैयार करते हैं।

योग से तैयार होता है इंसुलिन

योग न सिर्फ डायबिटीज के लिए बल्कि वह अन्य शारीरिक बीमारियों को भी दूर करते हैं। हमारे शरीर में कोशिकाएं ग्लूकोज को तैयार नहीं कर पाती। इसके लिए इंसुलिन नामक हार्मोन की आवश्यकता पड़ती है, जो पेनक्रियाज के कमजोर होने से बराबर कार्य नहीं कर पाती हंै। आसनों का सीधा प्रभाव कोशिकाओं व पेनक्रियाज पर पड़ता है। डायबटिज खान-पान और तनाव को प्रमुख कारण माना गया है। खाने में कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा, अधिक शकर, मीठा और चॉकलेट आदि से होता है।



यूनिवर्सिटी के योग केंद्र के एचओडी डॉ. एसएस शर्मा बताते हैं कि योग के कुछ ऎसे आसन होते है जिनका असर सीधा शरीर के उन भागों पर पड़ता हैं, जो ंइंसुलिन बनाने में सहयोग करते हैं। साथ ही पेनक्रियाज को नियंत्रण में रखने की क्षमता भी बढ़ाते है। डायबिटीज को कंट्रोल करने वाले आसन शरीर के लिए बेहद लाभदायक हैं, जिसे नियमित करने से स्वस्थ रहा जा सकता है।

नक्सलियों ने कर्मा के भाई का गला रेता

नक्सलियों ने कर्मा के भाई का गला रेता

जगदलपुर । सलवा जुड़ूम के अगुवा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा के चचेरे भाई नंदू कर्मा की नक्सलियों ने गला रेतकर हत्या कर दी। घटना भैरमगढ़ थानांतर्गत ग्राम चिडिलापाल में शनिवार की रात को हुई। हथियारबंद नक्सली देर रात फरसपाल रोड स्थित नंदू कर्मा (45) के घर पहुंचे और उन्हें जगाया। फिर घसीटकर बाहर निकाला और कुछ देर पूछताछ करने के बाद धारदार हथियार से उसका गला रेत दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद नक्सली जंगल की ओर भाग गए। इस घटना से इलाके में दहशत है।

नंदू नक्सलियों के खिलाफ चले हर अभियान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते थे। जिला पंचायत सदस्य विक्रम शाह मंडावी ने चिंता जताते हुए कहा कि कांग्रेस और भाजपा से जुड़े लोग नक्सलियों के निशाने पर हैं। इसके बावजूद शासन और पुलिस प्रशासन जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है।

अब तक 90 परिजन लाल आतंक के शिकार

महेंद्र कर्मा के परिजन नक्सलियों के टारगेट में रहे हैं। कर्मा के बेटे बंटी कर्मा ने बताया कि सलवा जुड़ूम के बाद से अब तक कर्मा परिवार के 30 सदस्य नक्सलियों के हाथों मारे जा चुके हैं। मार्च 2009 में महेंद्र कर्मा के भतीजे और फरसपाल के सरपंच छन्नू कर्मा की कतियाररास रेलवे क्रॉसिंग के पास हत्या कर दी गई थी।

इसी तरह परिवार के पोदिया कर्मा, कुम्मा कर्मा, सुक्कू कर्मा, सुखराम कर्मा और नंदू कर्मा भी लाल आतंक के शिकार हुए हैं। परिवार के अलावा अन्य 60 रिश्तेदारों ने जान गंवाई है। तीन साल पहले माटवाड़ा के पास कर्मा के काफिले पर नक्सलियों ने हमला किया पर वे किसी तरह बच निकले। उनके पुत्र और जिला पंचायत अध्यक्ष छविंद्र कर्मा पर भैरमगढ़ के नजदीक दो साल पहले नक्सलियों ने हमला किया था।

भाजपा ने भेजा दिग्विजय को नोटिस

भाजपा ने भेजा दिग्विजय को नोटिस

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने को लेकर कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के खिलाफ कानूनी नोटिस भेजा गया है।

भाजपा कार्यकर्ता अभिनव त्रिपाठी की ओर से यह नोटिस अधिवक्ता चारू सिंह ने भेजा है। नोटिस में कहा गया है कि सिंह की कथित टिप्पणी से वह आहत हुए हैं। इसलिए कांग्रेस नेता के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई होनी चाहिए। नोटिस में कहा गया है कि सिंह ने गडकरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे और कहा था कि 20 साल पहले लूना पर चलने वाला व्यक्ति रातोरात अरबपति कैसे हो गया।

छत्तीसगढ़ में मुठभेड़, नौ नक्सली ढेर

छत्तीसगढ़ में मुठभेड़, नौ नक्सली ढेर

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में आज सुरक्षा बलों ने नौ नक्सलियों को ढेर कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को दंतेवाड़ा के जगरगुंडा में हुई मुठभेड़ में नौ नक्सलियों को मार गिराने में कामयाबी मिली है।

पुलिस के मुताबिक कई नक्सली फरार होने में सफल रहे। पुलिस के अनुसार घटना मंगलवार सुबह दंतेवाड़ा के कोंटा ब्लाक में जगंलों के इलाके में स्थित जगरगुंडा में मंगलवार सुबह हुई। पुलिस को खुफिया सूचना मिली थी कि 50 से 60 माओवादी इलाके में मौजूद हैं और कोई योजना बना रहे हैं।

इसके बाद स्थानीय पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और राज्य के कोया कमांडो ने इलाके की घेराबंदी की और मंगलवार सुबह धावा बोल दिया। तकरीबन आधे घंटे तक चली मुठभेड़ में नौ नक्सली मारे गए जबकि बाकी घटनास्थल से फरार हो गए।

शिवराज के इस्तीफे की मांग, कांग्रेस का हंगामा


शिवराज के इस्तीफे की मांग, कांग्रेस का हंगामा

भोपाल। मध्य प्रदेश की विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जमकर हंगामा किया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे की मांग की। हंगामे के चलते विधानसभा की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। चौहान ने इस हंगामे को पार्टी हाईकमान के सामने अंक बढ़ाने की कोशिश बताया है।

विधानसभा सत्र के दूसरे दिन प्रश्न काल खत्म होते ही शून्य काल में कांग्रेस सदस्यों ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग करते हुए अध्यक्ष ईश्वर दास रोहाणी की आसंदी के समीप जमकर नारेबाजी की। इस हंगामे के चलते रोहाणी ने विधानसभा की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

दोबारा कार्यवाही शुरू होते ही कार्यवाहक नेता प्रतिपक्ष चौधरी राकेश सिंह ने भ्रष्टाचार पर चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री चौहान सहित कई मंत्रियों के खिलाफ लोकायुक्त में मामले चल रहे हैं और वे अपने पद का दुरूपयोग कर जांच को प्रभावित कर रहे हैं।

इस पर उद्योगमंत्री कैलाश विजयवर्गीय व संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया, जिस पर दोनों पक्षों में नोक-झोंक हुई। उसके बाद कांग्रेस सदस्यों ने फिर से अध्यक्ष की आसंदी के समीप पहंुचकर नारेबाजी शुरू कर दी।

विधानसभा अध्यक्ष रोहाणी ने कांग्रेसी सदस्यों से सदन की कार्यवाही में व्यवधान न डालने का बार-बार आग्रह किया लेकिन इसके बावजूद जब कांग्रेस सदस्य नहीं मानें तो उन्होंने सदन की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी। सदन के बाहर कांग्रेस व भाजपा के विधायकों ने भी एक दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की ।

नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि महाराष्ट्र में मात्र आरोप लगने पर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पद से अशोक चव्हाण को हटा दिया। भाजपा को भी इसका अनुसरण करना चाहिए। जबकि यहां के मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों के खिलाफ लोकायुक्त में मामले दर्ज है।

वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री चौहान ने इस हंगामे को कांग्रेस की मजबूरी करार दिया है। उन्होंने संसद में चल रहे हंगामे की ओर इशारा करते हुए कहा कि वहां कुछ हो रहा है इसलिए यहां कुछ तो करना है। वहीं नेता प्रतिपक्ष को लेकर भी कांग्रेस में होड़ मची हुई है, लिहाजा वे अपने नंबर बढ़ाने के लिए शिवराज पर हमला कर रहे हैं। कांग्रेस के पास चर्चा के लिए कोई विषय नहीं है लिहाजा वे हंगामा कर रहे है।

संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि मंगलवार को सूखे जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा होनी थी मगर विपक्ष ने इस गंभीर विषय की बजाय अपने स्वार्थो की पूर्ति के लिए हंगामा किया।

लड़कियों के मोबाइल फोन रखने पर बैन !


लड़कियों के मोबाइल फोन रखने पर बैन !

मुजफ्फरनगर। खाप पंचायतों के बाद एक और पंचायत ने तुगलकी फरमान जारी किया है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक गांव की पंचायत ने कुंवारी लड़कियों के मोबाइल फोन इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। पंचायत का कहना है कि लड़कियों को नौजवान लड़कों से दूर रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।

पंचायत के प्रवक्ता राजेंद्र मलिक ने बताया कि जिले के सभी जाति और समुदायों के लोगों ने लांक गांव की पंचायत में मिल कर मोबाइल के दुष्प्रभाव पर चर्चा की। इसी के तहत उन्होंने युवाओं के फोन रखने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया।

उनका कहना है कि अविवाहित लड़कियों को उनके माता-पिता की इच्छा के खिलाफ नौजवान लड़कों से मिलने से रोकने के लिए पंचायत ने यह फैसला किया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले जिले के ही शोरम गांव की खाप पंचायतों ने समान गोत्र विवाह का विरोध कर हिंदु विवाह अधिनियम,1955 में संशोधन में मांग की थी।

DATE23-11-2010

'मुस्लिमों के लिए एक अलग स्टेट चाहते थे 26/11 के हमलावर'


मुंबई ।। पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब और उसके साथियों को लश्करे तैयबा के हुक्मरानों ने 26/11 आतंकी हमले
में ज्यादा से ज्यादा लोगों को बंधक बनाने को कहा था, जिससे कि वे भारत सरकार से मुस्लिमों के लिए अलग स्टेट की मांग कर सकें।

कसाब को मिली मौत की सजा पर सुनवाई कर रही बम्बई हाई कोर्ट को सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने यह जानकारी दी। कसाब को 26/27 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमलों के दौरान जिंदा पकड़ा गया था।

भारत में मुस्लिमों के लिए अलग राज्य और कश्मीर की आजादी के लिए लश्कर के सरगनाओं ने आतंकियों को फोन पर वीआईपी लोगों को बंधक बनाने को कहा ताकि सरकार उनकी मांग पूरी करने को मजबूर हो जाए।

सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने कहा कि 26/11 हमले के दौरान आतंकियों की पाकिस्तान में बैठे हुक्मरानों से हुई बातचीत के रेकॉर्ड से यह बात सामने आई है।

उन्होंने कहा कि लश्कर के सरगनाओं ने हमलावरों को यह भी सलाह दी कि वे खुद को इंडियन मुजाहिदीन से संबंधित भारतीय मुस्लिम बताएं और अपनी पाकिस्तानी पहचान को छिपाएं।

न्यायमूर्ति रंजना देसाई और न्यायमूर्ति आरवी मोर की पीठ को निकम ने बताया, 'यही लक्ष्य रखकर कसाब और उसका साथी मालाबार हिल इलाके की ओर बढ़े जहां हाई कोर्ट के जज, मंत्री और राज्यपाल जैसे वीआईपी लोग रहते हैं ताकि वे इन्हें बंधक बना अपनी मांगें पूरी करा सकें। कसाब के ही बयान का हवाला देते हुए निकम ने कहा कि मारे गए आतंकी अबू इस्माइल को मालाबार हिल जाने की वजह की जानकारी थी जबकि कसाब को इस्माइल ने कहा था कि वहां पहुंचने पर ही वह योजना का खुलासा करेगा।

अदालत में हुई सुनवाई के दौरान कसाब विडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए से पेश हुआ।
bambay22nav2010

Monday, November 22, 2010

आज भी हनुमान से नाराज हैं लोग


सबसे बड़ी चीज होती है विश्वास। पर जब उस पर चोट पहुंचती है तो पीड़ा देनेवाले को बख्शा नहीं जाता है। फिर चाहे वह देवता या भगवान ही क्यों न हो। जी हाँ! दुर्गम पर्वतॊं पर बसा एक गांव ऐसा भी है जहां के लोग आज भी हनुमान जी से सख्त नाराज हैं। कारण कि हनुमान ने उन लोगों के आराध्य देव पर चोट पहुंचायी है और सरासर अहित किया है। यह आराध्य देव कोई और नहीं स्यंव साक्षात ‘पर्वत ही हैं, जिसका नाम है-द्रोणागिरी। सभी जानते हैं कि इस पर्वत में संजीवनी बूटी विद्धमान होने से हनुमान एक भाग तोड़कर ले उड़े थे। इसी पुराण-प्रसिद्ध द्रोणागिरि पर्वत की छांव में बसे हनुमान से नफरत करने वाले गांव का नाम है-द्रोणागिरि।
इस बारे में द्रोणागिरि गांव में एक दूसरी ही मान्यता प्रचलित है। बताते हैं कि जब हनुमान बूटी लेने के लिये इस गांव में पहुंचे तो वे भ्रम में पड़ गए। उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा था कि किस पर्वत पर संजीवनी बूटी हो सकती है। तब गांव में उन्हें एक वृद्ध महिला दिखाई दी। उन्होंने पूछा कि संजीवनी बूटी किस पर्वत पर होगी? वृद्धा ने द्रोणागिरि पर्वत की तरफ इशारा किया। हनुमान उड़कर पर्वत पर गये पर बूटी कहां होगी यह पता न कर सके। वे फिर गांव में उतरे और वृद्धा से बूटीवाली जगह पूछने लगे। जब वृद्धा ने बूटीवाला पर्वत दिखाया तो हनुमान ने उस पर्वत के काफी बड़े हिस्से को तोड़ा और पर्वत को लेकर उड़ते बने। बताते हैं कि जिस वृद्धा ने हनुमान की मदद की थी उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया।
आज भी इस गांव के आराध्य देव पर्वत क विशेष पूजा पर लोग महिलाओं के हाथ का दिया नहीं खाते हैं और न ही महिलायें इस पूजा में मुखर होकर भाग लेती हैं। गांव की पत्रिता के लिए आज भी जब किसी महिला का बच्चा होता है तो प्रसव के दौरान उस महिला को गांव से अलग काफी दूर नदी के किनारे वाले स्थान पर डेरा बनाकर रखा जाता है। शिशु जनने के बाद ही वह गांव आ सकती है। इस दौरान उसका पति, सास अन्य परिवारजन उसकी मदद करते हैं। :



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मणिपुर के बच्चे कहाँ जाएं


:: शिरीष खरे ::

मणिपुर में उग्रवाद और उग्रवाद के विरोध में जारी हिसंक गतिविधियों के चलते बीते कई दशकों से बच्चे हिंसा की कीमत चुके रहे हैं. यह सीधे तौर से गोलियों और अप्रत्यक्ष तौर से गरीबी, अशिक्षा, कुपोषण की तरफ धकेले जा रहे हैं. राज्य में स्थितियां तनावपूर्ण होते हुए भी कई बार नियंत्रण में तो बन जाती हैं, मगर स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे बुनियादी ढ़ांचे कुछ इस तरह से चरमराए हैं कि बच्चों और मरीजों का विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरना यहां के लिए आम बात लगने लगती है.



इनदिनों हम मणिपुर के इलाकों में यहां के हालातों को समझने की कोशिश कर रहे हैं. क्राई हिंसा से सबसे ज्य़ादा प्रभावित तीन जिलों चंदेल, थौंबल और चुराचांदपुर में काम कर रहा है. क्राई द्वारा यहां जगह-जगह बच्चों के सुरक्षा समूह बनाने गए हैं, और बहु जातीय समूहों में आत्मविश्वास जगाने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है. ऐसी ही एक कार्यशाला के बाद क्राई से असीम घोष बता रहे हैं कि ‘‘यहां के बच्चे डर, रहस्य, अनिश्चिता और हिंसा के साये में लगातार जी रहे हैं, यहां जो माहौल है उसमें बच्चे न तो सही तरीके से कुछ सोच सकते हैं, न ही कह, कर या कोई फैसला ही ले सकते हैं. इसलिए कार्यशालाओं के पहले स्तर में हमारी कोशिश बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान बनाने की रहती है.’''



मणिपुर में बच्चों को हिंसा के प्रभाव से बचाने के लिए क्राई द्वारा सरकार और नागरिक समूहों से लगातार मांग की जाती रही है. इनदिनों यह संस्था राष्ट्रीय स्तर पर जैसे कि बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय आयोग और संबंधित मंत्रालयों पर दबाव बना रही है कि वह मणिपुर में हिंसा से प्रभावित बच्चों की समस्याओं और जरूरतों को प्राथमिकता दें. अहम मांगों में यह भी शामिल है कि अतिरिक्त न्यायिक शक्तियों से सुसज्जित सेना यह सुनिश्चित करे कि हिंसा और आघातों के बीच किसी भी कीमत पर बच्चों को निशाना नहीं बनाया जाएगा. इसी के साथ ही राज्य में किशोर न्याय देखभाल के प्रावधानों और संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार किशोर न्याय प्रणाली को प्रभावपूर्ण ढंग से लागू किया जाएगा. राज्य के अधिकारियों पर सार्वजनिक सुविधाओं पर निवेश बढ़ाने और अधिकारों से संबंधित सेवाओं जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, बच्चों के लिए आर्ट यानी एंटी रेट्रोविरल थेरेपी और स्कूल की व्यवस्थाओं को दुरुस्त बनाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है. दरअसल प्राथमिकता के स्तर पर अधिकारों से संबंधित सेवाओं को दुरुस्त बनाने के दृष्टिकोण को सैन्य दृष्टिकोण से ऊपर रखे जाने की जरूरत है.



मणिपुर में आंतकवाद से संबंधित घातक परिणामों के चलते 1992-2006 तक 4383 लोग भेट चढ़ गए हैं. जम्मू-काश्मीर और असम के बाद मणीपुर देश के सबसे हिंसक संघर्षों का क्षेत्र बन चुका है. अंतर जातीय संघर्ष और विद्रोह की वजह से 1950 को भारत सरकार ने इस राज्य में एएफएसपीए यानी सशक्त्र बलों के विशेष शक्ति अधिनियम लागू किया. इस अधिनियम ने विशेष बलों को पहली बार सीधे सीधे हमले की शक्ति दी, जो कि सुरक्षा बलों के लिए प्रभावी ढंग से व्यापक शक्तियों में रूपांतरित हो गई. यहां जो सामाजिक सेवाएं हैं, वह भी अपनी बहाली के इंतजार में हैं, जहां स्कूल और आंगनबाड़ियां सही ढ़ंग से काम नहीं कर पा रही हैं, वहीं जो थोड़े बहुत स्वास्थ्य केन्द्र हैं वह भी साधनों से विहीन हैं. प्रसव के दौरान चिकित्सा व्यवस्था का अकाल पड़ा है. न जन्म पंजीकरण हो रहा है और न जन्म प्रमाण पत्र बन रहा है. अनाथ बच्चों की संख्या बेहताशा बढ़ रही है, बाल श्रम और तस्करी को भू मंडलीकरण के पंख लग गए हैं, और बेकार हो गए परिवारों के बच्चे वर्तमान संघर्ष का हिस्सा बन रहे हैं. बच्चों के लिए खेलने और सार्वजनिक तौर पर आपस में मिलने के सुरक्षित स्थान अपना पता बहुत पहले ही खो चुके हैं.



गैर सरकारी संस्थाओं के अनुमान के मुताबिक मणिपुर में व्याप्त हिंसा के चलते 5000 से ज्यादा महिलाएं विधवा हुई हैं, और 10000 से ज्यादा बच्चे अनाथ हुए हैं. अकेले जनवरी- दिसम्बर 2009 के आकड़े देखें जाए तो सुरक्षा बालों द्वारा 305 लोगों को कथित तौर पर मुठभेड़ में मार गिराए जाने का रिकार्ड दर्ज है. बन्दूकी मगर गैर राजकीय हिंसक गतिविधि में 139 लोगों के मारे जाने का रिकार्ड मिलता है. विभिन्न हथियारबंद वारदातों के दौरान 444 लोगों के मारे जाने का रिकार्ड मिलता है. जबकि नवम्बर 2009 तक कुल 3348 मामले दर्ज किए गए हैं. महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले देखें तो 2007 से 2009 तक कुल 635 मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें 24 हत्याओं और 86 बलात्कार के मामले हैं. बाल तस्करी का हाल यह है कि जनवरी 2007 से जनवरी 2009 तक अखबारों में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर 198 बच्चे तस्करी का शिकार हुए हैं. बाल श्रम के आकड़ों पर नज़र डाले तो 2007 को श्रम विभाग, मणिपुर द्वारा कराये गए सर्वे में 10329 बाल श्रमिक पाए गए. जहां तक स्कूली शिक्षा की बात है तो सितम्बर 2009 से जनवरी 2010 तक 4 लाख से ज्यादा बच्चे स्कूलों में हाजिर नहीं हो सके. और सरकारी स्कूली व्यवस्था तो यहां जैसे एक तरह से विफल ही हो गई है.